Sudarshantoday ब्यूरो: भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस.एस. राजामौली ने हाल ही में एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सिम्हाद्री’ की शूटिंग से जुड़ा एक दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। राजामौली ने साल 2003 में रिलीज हुई इस सुपरहिट फिल्म के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने जूनियर एनटीआर के साथ केरल में अपनी फिल्म का सबसे ‘हिंसक’ और चुनौतीपूर्ण एक्शन सीक्वेंस शूट किया था, जिसके लिए एक विशेष प्रकार का सेटअप तैयार करना पड़ा था। इस खुलासे के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री और फैंस के बीच एक बार फिर से इस क्लासिक एक्शन ड्रामा की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)
- एस.एस. राजामौली ने फिल्म ‘सिम्हाद्री’ की शूटिंग के पुराने दिनों को किया याद।
- केरल विधानसभा के सामने शूट किया गया था यह बेहद खतरनाक और हिंसक एक्शन सीक्वेंस।
- राजामौली के बेटे एस.एस. कार्तिकेय ने इस दृश्य को निर्देशक के करियर का सबसे हिंसक एक्शन सीन बताया।
- यह फिल्म साल 2003 में रिलीज हुई थी, जिसमें जूनियर एनटीआर और भूमिका चावला मुख्य भूमिकाओं में थे।
- फिल्म की कहानी एक ऐसे अनाथ लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे एक दयालु जमींदार पालता-पोसता है।
विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)
भारतीय फिल्म उद्योग को ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी वैश्विक स्तर पर सराही जाने वाली मास्टरपीस फिल्में देने वाले निर्देशक एस.एस. राजामौली आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी फिल्मों का पैमाना, भव्यता और एक्शन सीक्वेंस हमेशा से दर्शकों के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। हाल ही में एक विशेष प्रचार कार्यक्रम के दौरान, राजामौली ने अपनी पुरानी फिल्मों के सफर को याद करते हुए अपने शुरुआती करियर के पन्नों को पलटा। उन्होंने युवा जूनियर एनटीआर के साथ अपनी शुरुआती ब्लॉकबस्टर ‘सिम्हाद्री’ की शूटिंग के दौरान आए अनुभवों को दर्शकों के साथ साझा किया। राजामौली ने बताया कि केरल की हसीन वादियों में इस फिल्म की शूटिंग करना उनके लिए एक बेहद यादगार अनुभव रहा था, लेकिन वहां फिल्माया गया एक खास एक्शन सीक्वेंस तकनीकी और दृश्यात्मक दोनों रूप से बेहद कठिन था।
इस बातचीत के दौरान निर्देशक के बेटे और निर्माता एस.एस. कार्तिकेय ने भी अपने पिता की बात में सहमति जताते हुए एक बड़ा खुलासा किया। कार्तिकेय ने कहा कि उनके पिता के पूरे फिल्मी करियर में, जो हिंसा और एक्शन से भरपूर रहा है, शायद यह सीक्वेंस सबसे ज्यादा हिंसक और क्रूर था। इस सीन को शूट करने के लिए केरल विधानसभा के सामने एक विशेष और जटिल सेटअप लगाना पड़ा था, ताकि दृश्य की गंभीरता और भव्यता को पर्दे पर पूरी सटीकता के साथ उतारा जा सके। फिल्म ‘सिम्हाद्री’ के उस दौर में जब तकनीक आज जितनी उन्नत नहीं थी, राजामौली ने अपनी दूरदर्शिता और अद्भुत विजन के बल पर इस सीक्वेंस को इस तरह से निर्देशित किया कि दर्शक सिनेमाघरों में दंग रह गए थे।
फिल्म ‘सिम्हाद्री’ जब साल 2003 में सिनेमाघरों में उतरी थी, तब इसने बॉक्स ऑफिस के कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और जूनियर एनटीआर को एक मास एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर दिया था। इस फिल्म की कहानी एक अनाथ लड़के (सिंहाद्री) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक दयालु जमींदार आश्रय देता है और अपने परिवार के सदस्य की तरह पालता है। हालांकि, फिल्म की कहानी में कई नाटकीय मोड़ आते हैं जो नायक के अतीत और उसके गुस्से को उजागर करते हैं। केरल में फिल्माया गया वह विवादास्पद और तीव्र एक्शन सीन फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक था, जिसने कहानी के भावनात्मक और एक्शन से भरपूर ताने-बाने को मजबूत किया था।
एस.एस. राजामौली ने कहा, ‘सिम्हाद्री के वे दिन हमारे लिए सीखने और प्रयोग करने के थे। जूनियर एनटीआर की ऊर्जा और केरल के उस विशिष्ट स्थान पर फिल्माया गया वह हिंसक दृश्य आज भी मेरे जेहन में तरोताजा है, जिसके लिए हमने खासी मेहनत की थी।’
भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)
एस.एस. राजामौली द्वारा साझा किए गए ये संस्मरण इस बात का प्रमाण हैं कि एक महान निर्देशक बनने के लिए वर्षों की कड़ी मेहनत, जोखिम उठाने की क्षमता और दृश्यों के प्रति अटूट समर्पण की आवश्यकता होती है। ‘सिम्हाद्री’ जैसी फिल्मों ने ही राजामौली को आज उस मुकाम पर पहुंचाया है जहां वे वैश्विक सिनेमा के मानचित्र पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद न केवल ‘सिम्हाद्री’ के प्रति फैंस का पुराना प्यार जाग उठा है, बल्कि युवा फिल्म निर्माताओं के लिए भी यह एक प्रेरणादायक सबक है कि किस प्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े विजन को साकार किया जा सकता है। आने वाले समय में राजामौली के आगामी प्रोजेक्ट्स से भी इसी तरह के बेजोड़ और रोमांचक सिनेमाई अनुभवों की उम्मीद की जा रही है, जो भारतीय सिनेमा की सीमाओं को और अधिक विस्तार देंगे।














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