Sudarshantoday ब्यूरो: यूपीआई (UPI) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी ने सरकार से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
एनसीपी (एसपी) के नेताओं का तर्क है कि डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकार कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, वहीं इस तरह के शुल्क छोटे दुकानदारों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। पार्टी का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालना अनुचित है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाना विरोधाभासी है। यह कदम छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ने वाला है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
प्रमुख बिंदु:
- यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव।
- एनसीपी (एसपी) ने इसे ‘जनविरोधी’ और ‘व्यापारी विरोधी’ बताया।
- डिजिटल भुगतान की गति धीमी होने की जताई आशंका।
- सरकार से नीतिगत बदलाव पर पुनर्विचार की मांग।
डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुल्क लागू होता है, तो डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का रुझान कम हो सकता है। छोटे दुकानदार, जो पहले से ही कम मार्जिन पर काम करते हैं, वे इस अतिरिक्त शुल्क को वहन करने में असमर्थ होंगे। एनसीपी (एसपी) ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस पर अपना रुख नहीं बदला, तो वे इसे लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

















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