राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल मिश्रा के इंटरव्यू छोड़ने के दावों को नकारा

राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल मिश्रा के इंटरव्यू छोड़ने के दावों को नकारा

Sudarshantoday ब्यूरो: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि पूर्व एयर मार्शल आरकेएस मिश्रा ने मंदिर के सीईओ पद के लिए आयोजित साक्षात्कार प्रक्रिया को बीच में ही छोड़ दिया था। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इन खबरों को निराधार और भ्रामक करार दिया है।

क्या था पूरा मामला?

हाल ही में कुछ मीडिया संस्थानों में यह खबर चली थी कि मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए आयोजित साक्षात्कार प्रक्रिया के दौरान पूर्व एयर मार्शल आरकेएस मिश्रा ने प्रक्रिया को अधूरा छोड़ दिया था। इस दावे के बाद से ही सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।

ट्रस्ट का आधिकारिक रुख

ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित की गई है। ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा है कि साक्षात्कार प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या किसी उम्मीदवार द्वारा प्रक्रिया छोड़ने की घटना नहीं हुई है।

ट्रस्ट के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया अपनी गरिमा और नियमों के अनुरूप चल रही है। पूर्व एयर मार्शल आरकेएस मिश्रा के साक्षात्कार छोड़ने की खबरें पूरी तरह से असत्य हैं। हम ऐसी आधारहीन अटकलों का खंडन करते हैं।’

प्रमुख बिंदु

  • ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया।
  • पूर्व एयर मार्शल आरकेएस मिश्रा के साक्षात्कार छोड़ने की खबर को ट्रस्ट ने सिरे से नकारा।
  • ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में कोई भी विवाद नहीं हुआ है।
  • भ्रामक खबरों से बचने के लिए ट्रस्ट ने आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है।

अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन और संचालन के लिए एक सक्षम सीईओ की नियुक्ति ट्रस्ट की प्राथमिकता है। ट्रस्ट ने कहा है कि नियुक्ति से जुड़ी कोई भी आधिकारिक जानकारी समय आने पर सार्वजनिक की जाएगी।

हनुमान अंश का बॉक्स ऑफिस पर जलवा: 300 करोड़ के क्लब की ओर तेजी से बढ़ी फिल्म

हनुमान अंश का बॉक्स ऑफिस पर जलवा: 300 करोड़ के क्लब की ओर तेजी से बढ़ी फिल्म

Sudarshantoday ब्यूरो: पौराणिक कथाओं और भक्ति से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी ऐतिहासिक यात्रा जारी रखी है। रिलीज के 39 दिन बाद भी दर्शकों के बीच फिल्म का क्रेज कम होने का नाम नहीं ले रहा है। छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी यह फिल्म अब वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को छूने के बेहद करीब पहुंच गई है।

बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन

फिल्म ने अपनी रिलीज के बाद से ही सिनेमाघरों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है। आंकड़ों के अनुसार, 39 दिनों की अवधि में फिल्म ने भारत में 222.88 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया है। वहीं, अगर इसके वैश्विक प्रदर्शन की बात करें, तो फिल्म ने दुनिया भर में 279.80 करोड़ रुपये की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है।

दर्शकों का अटूट विश्वास

फिल्म की सफलता इस बात का प्रमाण है कि दर्शक आज भी अपनी जड़ों से जुड़ी और प्रेरणादायक कहानियों को देखना पसंद करते हैं। हनुमान अंश ने न केवल मनोरंजन किया है, बल्कि लोगों की आस्था को भी नई ऊर्जा दी है।

मुख्य बिंदु

  • फिल्म ने 39 दिनों में भारत में 222.88 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया।
  • वैश्विक स्तर पर कुल कमाई 279.80 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
  • फिल्म छठे सप्ताह में भी सिनेमाघरों में सफलतापूर्वक चल रही है।
  • जल्द ही फिल्म के 300 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की उम्मीद है।

फिल्म समीक्षकों का मानना है कि जिस गति से ‘हनुमान अंश’ आगे बढ़ रही है, आने वाले कुछ दिनों में यह 300 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी। यह उपलब्धि न केवल फिल्म की टीम के लिए बड़ी है, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

जेनिफर एनिस्टन ने जिम कर्टिस के लिए जाहिर किया प्यार, कहा- 'मुझे इस इंसान से प्यार है'

जेनिफर एनिस्टन ने जिम कर्टिस के लिए जाहिर किया प्यार, कहा- ‘मुझे इस इंसान से प्यार है’

Sudarshantoday ब्यूरो: हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा जेनिफर एनिस्टन एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने जिम कर्टिस के नए किताब लॉन्च के मौके पर उनके प्रति अपना गहरा प्रेम सार्वजनिक रूप से जाहिर किया है। एनिस्टन ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें उन्होंने न केवल कर्टिस की नई किताब की सराहना की, बल्कि उनके प्रति अपने स्नेह को भी खुलकर व्यक्त किया।

एक मजबूत और स्वाभाविक रिश्ता

जिम कर्टिस ने हाल ही में अपने और जेनिफर के रिश्ते के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनकी बॉन्डिंग एक लंबी दोस्ती के बाद शुरू हुई थी। कर्टिस के अनुसार, उनका रिश्ता काफी स्वाभाविक और ऑर्गेनिक है। उन्होंने इसे अपने पिछले रिश्तों से अलग बताते हुए कहा कि यह बंधन पहले की तुलना में कम ‘नीडी’ (जरूरतमंद) है, जो इसे और भी अधिक परिपक्व बनाता है।

रिश्ते का सफर

जिम कर्टिस ने कहा, हमारे बीच का जुड़ाव बहुत ही सहज है। हमने एक-दूसरे को काफी समय तक दोस्त के रूप में समझा और फिर यह रिश्ता एक गहरे प्यार में बदल गया।

जेनिफर और जिम के रोमांस की खबरें पहली बार जुलाई 2025 में सामने आई थीं। प्रशंसकों के बीच इस जोड़ी को लेकर काफी उत्साह है। नवंबर में जब उन्होंने अपने रिश्ते को ‘इंस्टाग्राम ऑफिशियल’ किया, तो सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें खूब प्यार दिया।

मुख्य बातें:

  • जेनिफर एनिस्टन ने जिम कर्टिस की किताब के लॉन्च पर उन्हें खास अंदाज में बधाई दी।
  • दोनों का रिश्ता महीनों की दोस्ती के बाद शुरू हुआ।
  • कर्टिस ने अपने रिश्ते को ‘स्वाभाविक और परिपक्व’ बताया है।
  • जुलाई 2025 में इनके रोमांस की खबरें पहली बार सार्वजनिक हुई थीं।
यूसीसी पर अमित शाह के दावे के बाद एनडीए में हलचल, सहयोगियों ने दी नसीहत

यूसीसी पर अमित शाह के दावे के बाद एनडीए में हलचल, सहयोगियों ने दी नसीहत

Sudarshantoday ब्यूरो: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर दिए गए हालिया बयानों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, भाजपा के अपने ही सहयोगी दलों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। टीडीपी और एलजेपी जैसे प्रमुख सहयोगियों ने साफ कर दिया है कि इस विषय पर अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है और वे व्यापक सहमति की वकालत कर रहे हैं।

सहयोगियों का रुख: क्या है चिंता?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी जैसे बड़े नीतिगत बदलावों पर जल्दबाजी के बजाय सभी पक्षों को साथ लेकर चलना जरूरी है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से इस पर कोई ठोस प्रस्ताव साझा नहीं किया गया है। वहीं, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने पारदर्शिता पर जोर दिया है।

यूसीसी पर हमारा रुख स्पष्ट है। हम चाहते हैं कि इस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी समुदायों के साथ व्यापक विचार-विमर्श हो और पूरी पारदर्शिता बरती जाए ताकि किसी भी वर्ग को असुरक्षा महसूस न हो।

प्रमुख बिंदु और चुनौतियां

  • टीडीपी ने कहा है कि यूसीसी पर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
  • एलजेपी ने सभी हितधारकों के साथ विस्तृत चर्चा की मांग की है।
  • विपक्ष इस मुद्दे को लेकर पहले ही सरकार पर हमलावर है।
  • भाजपा के लिए अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी का मुद्दा भाजपा के वैचारिक एजेंडे का हिस्सा रहा है, लेकिन एनडीए सरकार के लिए गठबंधन धर्म का पालन करना अनिवार्य है। सहयोगियों की यह सावधानी दर्शाती है कि आने वाले समय में इस बिल को संसद में पेश करने से पहले सरकार को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। फिलहाल, भाजपा नेतृत्व ने इस पर चुप्पी साधे रखी है, लेकिन सहयोगियों के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि राह इतनी आसान नहीं होगी।

आंगनबाड़ी, आशा एवं मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में वृद्धि की मांग,

आंगनबाड़ी, आशा एवं मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में वृद्धि की मांग,

उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी सामाजिक सुरक्षा की ठोस पहल हो: इंजी. जे.एल. गुप्ता

भोपाल। मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं, आशा कार्यकर्ता, आशा संगिनी तथा मिड-डे मील वर्कर्स लंबे समय से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, विद्यालयीन पोषण एवं जनजागरूकता जैसे कार्यों में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। पत्रकार संतोष राज को मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंजी. जे.एल. गुप्ता ने कहा कि इन महिला कार्यकर्ताओं के कार्य और जिम्मेदारियों को देखते हुए उनके मानदेय के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा पर भी ठोस निर्णय लिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि तथा स्वास्थ्य बीमा की दिशा में की गई पहल स्वागत योग्य है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार को भी आंगनबाड़ी, आशा, आशा संगिनी एवं मिड-डे मील वर्कर्स के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।गुप्ता ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्य के अनुरूप पारिश्रमिक सुनिश्चित करने की मांग की।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शांत प्रकाश जी के निर्देश पर देश एवं विभिन्न प्रदेशों में ज्ञापन सौंपे गए हैं। मध्यप्रदेश में भी भारतीय जनता मजदूर संघ शीघ्र मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इन महिला कार्यकर्ताओं की समस्याओं और मांगों पर चर्चा करेगा।गुप्ता ने कहा कि संगठन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालना है। वर्षों से समाज और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रही इन महिला कार्यकर्ताओं के श्रम का सम्मान अब ठोस नीतिगत निर्णयों के माध्यम से होना चाहिए।

चंदा देंगे, लेकिन अब हिसाब भी लेंगे: मध्य प्रदेश में समाज का शंखनाद

चंदा देंगे, लेकिन अब हिसाब भी लेंगे: मध्य प्रदेश में समाज का शंखनाद

मेरा पैसा–मेरी जिम्मेदारी’ अभियान ने पकड़ी रफ्तार, 30 से अधिक समाजसेवियों ने चार घंटे किया मंथन

भोपाल। सामाजिक आयोजनों के नाम पर जुटाई जाने वाली चंदा और सहयोग राशि को लेकर मध्य प्रदेश में अब समाज के भीतर सवालों की आवाज तेज होने लगी है। समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने साफ कर दिया है कि सहयोग से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन सहयोग के नाम पर लिए गए पैसे का हिसाब भी मांगेंगे। इसी मुद्दे को लेकर ‘मेरा पैसा–मेरी जिम्मेदारी’ अभियान के तहत आयोजित ऑनलाइन जूम बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े 25-30 से अधिक समाजसेवियों एवं जागरूक नागरिकों ने करीब चार घंटे तक गंभीर मंथन किया। बैठक में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि चंदा लिया तो हिसाब कब देंगे? वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक कार्यों और आयोजनों के लिए समाज से सहयोग लेना सामाजिक सहभागिता का हिस्सा है, लेकिन सहयोग राशि मिलने के बाद उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। समाज के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस व्यक्ति ने कितनी राशि देने की घोषणा की, वास्तव में कितना सहयोग प्राप्त हुआ, पैसा नकद, बैंक या सामग्री के रूप में कितना मिला और आयोजन में कुल कितना खर्च किया गया। यदि किसी व्यक्ति ने अपनी ओर से कोई खर्च किया है तो उसकी जानकारी भी स्पष्ट होनी चाहिए। आयोजन के बाद यदि राशि बचती है तो वह कहां और किस उद्देश्य से रखी या खर्च की गई, यह भी समाज को बताया जाना चाहिए। साथ ही जिस उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया था, उसकी वास्तविक स्थिति और आयोजनकर्ता का नाम, पता एवं संपर्क नंबर भी सार्वजनिक होना चाहिए। समाजसेवियों ने कहा कि इन सवालों का जवाब मांगना किसी व्यक्ति का विरोध या किसी संस्था पर आरोप नहीं है, बल्कि समाज के सहयोग से चलने वाले सामाजिक कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार है। बैठक में यह मांग जोरदार तरीके से उठी कि कार्यक्रम समाप्त होते ही हिसाब बंद नहीं, बल्कि वहीं से हिसाब शुरू होना चाहिए। आयोजन पूरा होने के बाद आय-व्यय का स्पष्ट विवरण समाज के सामने रखा जाए, ताकि सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह जानकारी रहे कि उसका पैसा किस कार्य में उपयोग हुआ। बैठक में राष्ट्रीय विधि सलाहकार पुरुषोत्तम गुप्ता एडवोकेट ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं की सबसे बड़ी पूंजी समाज का विश्वास है और यह विश्वास तभी मजबूत होगा जब सामाजिक आयोजनों में पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने समाजहित में जागरूकता बढ़ाने और सहयोग राशि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बैठक में किशोर कुमार लहरपुरे ने कहा कि अब भी संभल जाओ। चंदे का हिसाब खोलो, वरना समाज तुम्हारे किए गए कृत्यों को कहीं न कहीं सबके सामने उजागर करने के लिए मजबूर होगा। संभल जाओ, संभल जाओ, संभल जाओ-समाज के नाम पर चंदा लेकर जवाबदेही से बचने वालों को अब समाज की जागरूकता झकझोरने वाली है। राष्ट्रीय प्रवक्ता किसान केशव साहू ने कहा कि सामाजिक सहयोग के नाम पर पैसा लेने वालों को यह समझना होगा कि समाज अब पहले जैसा नहीं रहा। लोग सवाल पूछेंगे, रिकॉर्ड मांगेंगे और अपने सहयोग के उपयोग की जानकारी भी लेंगे। वरिष्ठ समाज सेवी लक्ष्मण साहू रीवा ने कहा कि समाज को अब भावनाओं में बहकर हर जगह चंदा देने की आदत पर पुनर्विचार करना होगा। हमें जागना होगा, समझना होगा कि चंदा किसको देना है, कब देना है और किस उद्देश्य से देना है। सहयोग देने से पहले जानकारी लेना हमारा अधिकार है और सहयोग देने के बाद हिसाब मांगना भी हमारा अधिकार है। सुनील नारायण लाल साहू, इंदौर ने कहा कि हर सामाजिक कार्यक्रम से पहले बजट तय होना चाहिए और उतनी ही राशि का चंदा लिया जाना चाहिए, ताकि आय-व्यय को लेकर किसी तरह की अविश्वसनीयता, भ्रम या संदेह की स्थिति न बने। इससे समाज का विश्वास मजबूत होगा और सामाजिक आयोजनों में पारदर्शिता बनी रहेगी। संतोष राज, प्रदेश मुख्य सोशल मीडिया प्रभारी, नमो नमो मोर्चा भारत ने चंदे की व्यवस्था को लेकर बेहद तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। सहयोग राशि के लेन-देन में पारदर्शिता को लेकर उन्होंने कहा कि पैसा अब उसी व्यक्ति या संस्था को दिया जाएगा, जिसका बैंक खाता मध्य प्रदेश में है। जिसका बैंक खाता मध्य प्रदेश में नहीं है, उसे किसी भी प्रकार का चंदा न देंगे और न देने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि समाज के पैसों के लेन-देन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सहयोग देने वालों को यह स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए कि राशि किस खाते में जा रही है, किस उद्देश्य से ली जा रही है और उसका उपयोग कहां किया जाएगा। गणेश राम ने कहा कि कार्यक्रम से पहले यही लोग समाज के सामने विनम्र होकर सहयोग मांगते हैं, लेकिन कार्यक्रम समाप्त होते ही जब समाजसेवी हिसाब पूछते हैं तो कुछ लोग अपना रवैया बदल लेते हैं। जिन लोगों से सहयोग लिया गया, उन्हीं समाजसेवियों के प्रति अपमान और तिरस्कार जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि समाज को अब ऐसे रवैये को समझना होगा। जो व्यक्ति समाज के सहयोग से अपना राजनीतिक वर्चस्व, व्यक्तिगत प्रभाव या अपना हित साधने की कोशिश करता है, ऐसे समाजसेवियों को चिन्हित करना और उनसे सावधान रहना जरूरी है। समाज की भोली-भाली भावना का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति अपना स्वार्थ पूरा करे, अब यह व्यवस्था नहीं चलनी चाहिए। शंभु दयाल ने कहा कि समाज का पैसा समाज के काम में ही लगे और उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहे, यही पारदर्शी व्यवस्था की पहली शर्त है। संगठन हो या कोई व्यक्ति, सामाजिक सहयोग एकत्र करने से पहले उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए और बाद में प्राप्त सहयोग तथा खर्च का विवरण भी सामने आना चाहिए। बैठक में संगठनों के स्थानीय बैंक खातों, प्राप्त सहयोग, नकद एवं सामग्री के रूप में मिले योगदान तथा खर्च के व्यवस्थित रिकॉर्ड को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। नारायण साहू रायसेन ने कहा कि समाज अब पहले की तरह आंख बंद करके सहयोग करने वाला नहीं रहेगा। सहयोग देने से पहले लोग यह जानना चाहेंगे कि पैसा किस उद्देश्य के लिए लिया जा रहा है, आयोजन कौन कर रहा है और अनुमानित खर्च कितना है। इसी तरह कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आय-व्यय का विवरण मांगना भी सामान्य सामाजिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए। विनोद साहू कटनी ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना या किसी संस्था को बदनाम करना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें चंदे और सहयोग राशि को लेकर किसी प्रकार का भ्रम, संदेह या सवाल ही खड़ा न हो। जूम बैठक में राष्ट्रीय समन्वयक किशोर कुमार लहरपुरे, राष्ट्रीय विधि सलाहकार पुरुषोत्तम गुप्ता एडवोकेट, राष्ट्रीय प्रवक्ता किसान केशव साहू नर्मदापुरम, जूम बैठक का संचालन प्रदेश प्रवक्ता शंभू दयाल साहू नमो नमो मोर्चा, सुनील नारायण साहू इंदौर आईटी सेल प्रदेश अध्यक्ष नमो नमो मोर्चा भारत, विनोद साहू कटनी, लक्ष्मण साहू रीवा, अरुण साहू रीवा, नारायण साहू रायसेन, भोपाल जिला अध्यक्ष गणेशाराम लोकेश साहू, आशीष साहू , एडवोकेट उमेश गोलहनी लखनादौन एवं संतोष राज प्रदेश मुख्य सोशल मीडिया प्रभारी, रामआश्रय साहू, परमानन्द साहू, आशीष साहू, अबधशरण साहू, भेरु लाल साहू, सोंमचंद साहू सहित विभिन्न जिलों के समाजसेवियों ने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनील नारायण साहू ने की तथा मार्गदर्शन किशोर कुमार लहरपुरे ने एवं आभार लोकेश साहू ने प्रदान किया। अभियान का संदेश भी स्पष्ट है-चंदा देना हमारा सहयोग है, हिसाब मांगना हमारा अधिकार है। सभी समाजसेवियों का कहना था कि अब समाज केवल सहयोग करने वाला समाज नहीं रहेगा, बल्कि अपने सहयोग का हिसाब जानने वाला जागरूक समाज बनेगा। न किसी व्यक्ति को निशाना बनाना है, न किसी संस्था को बदनाम करना है-बस ऐसी व्यवस्था बनानी है, जहां समाज का पैसा हो तो उसका हिसाब भी समाज के सामने हो। संभल जाइए… समाज जाग रहा है। सहयोग होगा, लेकिन पारदर्शिता के साथ। विश्वास होगा, लेकिन जवाबदेही के साथ।

दलबदलू नेताओं पर सख्त: सीजेआई ने कपिल सिब्बल की मांग का किया समर्थन, चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक

दलबदलू नेताओं पर सख्त: सीजेआई ने कपिल सिब्बल की मांग का किया समर्थन, चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक

Sudarshantoday ब्यूरो: देश की राजनीति में दलबदल की संस्कृति पर अब न्यायपालिका के गलियारों से बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा उठाए गए उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें दल बदलने वाले सांसदों और विधायकों को सार्वजनिक पद संभालने से रोकने की वकालत की गई है। यह टिप्पणी दलबदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता पर चल रही बहस को एक नया मोड़ दे सकती है।

राजनीतिक शुचिता के लिए बड़ा कदम

कपिल सिब्बल ने तर्क दिया है कि बार-बार पार्टियां बदलने वाले जनप्रतिनिधि जनता के जनादेश का अपमान करते हैं। सीजेआई ने इस चिंता को जायज ठहराते हुए संकेत दिया है कि दलबदलुओं पर नकेल कसने के लिए कानूनी ढांचे को और अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि कोई नेता अपनी विचारधारा से समझौता कर चुनाव के बाद पाला बदलता है, तो उसे नैतिक और कानूनी रूप से दोबारा चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दलबदल लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है। जब एक मतदाता किसी विशेष पार्टी के उम्मीदवार को वोट देता है, तो वह उस पार्टी की विचारधारा को चुनता है। पाला बदलना उस भरोसे का सीधा उल्लंघन है।

इस मुद्दे पर कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दलबदल विरोधी कानून में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर नेता अक्सर अपनी सरकारें गिराने या बनाने का खेल खेलते हैं।

प्रमुख बिंदु

  • दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों पर आजीवन या निश्चित अवधि के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव।
  • जनता के जनादेश की रक्षा के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता।
  • राजनीतिक नैतिकता और जवाबदेही तय करने पर जोर।

आने वाले समय में यह चर्चा संसद और अदालतों के बीच एक बड़ी बहस का विषय बन सकती है, जिससे भारतीय राजनीति में सुधार की नई उम्मीद जगी है।

गुड़गांव हिट-एंड-रन: वायरल वीडियो वाली बाइकर सिया ने चुप्पी साधी, कानूनी लड़ाई का लिया फैसला

गुड़गांव हिट-एंड-रन: वायरल वीडियो वाली बाइकर सिया ने चुप्पी साधी, कानूनी लड़ाई का लिया फैसला

Sudarshantoday ब्यूरो: गुड़गांव में हाल ही में हुए एक भयावह हिट-एंड-रन मामले ने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को झकझोर कर रख दिया है। घटना का वीडियो इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैला, जिसमें एक महिला बाइकर को सड़क पर टक्कर मारते हुए साफ देखा जा सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले में अब एक नया मोड़ आया है। पीड़ित बाइकर, जिनकी पहचान ‘सिया’ के रूप में हुई है, ने अपनी पहचान गुप्त रखने का निर्णय लिया है और किसी भी प्रकार के मीडिया इंटरव्यू या प्रचार से पूरी तरह दूरी बना ली है।

कानूनी कार्रवाई पर है पूरा ध्यान

सूत्रों के अनुसार, सिया इस समय किसी भी तरह की पब्लिसिटी के बजाय न्याय पाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहतीं और न ही इस घटना पर कोई सार्वजनिक बयान देंगी। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अपने वकील के माध्यम से गुड़गांव पुलिस में औपचारिक एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पीड़ित का स्पष्ट कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य आरोपी को कानून के कटघरे में खड़ा करना है, न कि सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरना।

गुड़गांव पुलिस की जांच जारी

इस घटना का फुटेज वायरल होने के बाद गुड़गांव पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी वाहन चालक की पहचान करने में जुटी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कानूनी धाराएं लगाई जाएंगी।

मामले के मुख्य बिंदु:

  • पीड़ित बाइकर सिया ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाई है।
  • आरोपी की पहचान के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
  • कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, वीडियो साक्ष्य आरोपी के खिलाफ एक मजबूत केस बनाने में मदद करेगा।
  • पीड़ित ने किसी भी प्रकार के साक्षात्कार या सार्वजनिक मंच पर आने से इनकार कर दिया है।

फिलहाल, पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना से जुड़ी कोई ठोस जानकारी हो, तो वह तुरंत अधिकारियों से संपर्क करे।

रवि तेजा की 'इरुमुडी' ओटीटी पर मचाएगी धमाल, जानें कब और कहाँ देखें

रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ओटीटी पर मचाएगी धमाल, जानें कब और कहाँ देखें

Sudarshantoday ब्यूरो: मास महाराजा रवि तेजा की हालिया रिलीज फिल्म ‘इरुमुडी’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। एक पिता के अपनी बेटी के लिए लिए गए धार्मिक संकल्प और उसके भावनात्मक संघर्ष को दर्शाती यह फिल्म दर्शकों के दिलों को छू गई है। फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद अब इसके डिजिटल प्रीमियर का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था।

ओटीटी पर कब रिलीज होगी इरुमुडी?

फिल्म के निर्माताओं ने आधिकारिक घोषणा कर दी है कि ‘इरुमुडी’ 18 सितंबर से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी। ₹200 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार करने वाली यह फिल्म अब घर बैठे दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। यह फिल्म न केवल अपनी कहानी के लिए, बल्कि रवि तेजा के अब तक के सबसे बेहतरीन और भावुक अभिनय के लिए भी चर्चा में है।

फिल्म की सफलता और सितारों की प्रतिक्रिया

इस फिल्म की सफलता का जश्न केवल प्रशंसकों ने ही नहीं, बल्कि टॉलीवुड के दिग्गज सितारों ने भी मनाया है। मेगास्टार चिरंजीवी और राम चरण ने फिल्म की कहानी और इसके मानवीय पहलुओं की जमकर तारीफ की है।

फिल्म की सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म जगत के जानकारों का कहना है कि इरुमुडी का विषय बेहद संवेदनशील है, जो हर पिता और बेटी के रिश्ते को गहराई से जोड़ता है।

फिल्म के मुख्य आकर्षण

  • रवि तेजा का अब तक का सबसे अलग और भावुक किरदार।
  • एक पिता के अटूट संकल्प और धार्मिक यात्रा की मार्मिक कहानी।
  • बॉक्स ऑफिस पर ₹200 करोड़ से अधिक की शानदार कमाई।
  • 18 सितंबर से नेटफ्लिक्स पर वैश्विक स्तर पर उपलब्ध।

यदि आपने सिनेमाघरों में इस भावनात्मक सफर को मिस कर दिया है, तो अब नेटफ्लिक्स पर इसे देखने का मौका न चूकें। फिल्म का निर्देशन और पटकथा इसे एक मस्ट-वॉच अनुभव बनाती है।

गणेश चतुर्थी पर किरण अब्बावरम ने दिया तोहफा, 'KA13' का शानदार फर्स्ट लुक जारी

गणेश चतुर्थी पर किरण अब्बावरम ने दिया तोहफा, ‘KA13’ का शानदार फर्स्ट लुक जारी

Sudarshantoday ब्यूरो: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर टॉलीवुड अभिनेता किरण अब्बावरम ने अपने प्रशंसकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज पेश किया है। अभिनेता ने अपनी आगामी फिल्म, जिसे फिलहाल ‘KA13’ के नाम से जाना जा रहा है, का पहला आधिकारिक पोस्टर जारी कर दिया है। इस पोस्टर में किरण अब्बावरम और अभिनेत्री देविका भट की केमिस्ट्री साफ झलक रही है, जिसे दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है।

फिल्म का खास आकर्षण

यह फिल्म न केवल किरण अब्बावरम के करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उनके निर्देशन में बनने वाली पहली फिल्म भी है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जॉय फिल्म्स के बैनर तले तैयार किया जा रहा है। पोस्टर में फिल्म का उत्सवपूर्ण मिजाज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो इसे एक बड़े बजट की एंटरटेनर फिल्म के रूप में पेश करता है।

दिग्गज कलाकारों का साथ

फिल्म की स्टार कास्ट पर नजर डालें तो किरण और देविका के अलावा, इसमें दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार शरत कुमार और साई कुमार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इन अनुभवी अभिनेताओं की मौजूदगी फिल्म के स्तर को और ऊंचा उठाती है।

फिल्म के निर्माताओं का कहना है कि ‘KA13’ एक अनूठी कहानी है जो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह सक्षम है। हम इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

मुख्य बिंदु

  • फिल्म का शीर्षक फिलहाल ‘KA13’ रखा गया है।
  • किरण अब्बावरम इस फिल्म के जरिए निर्देशन में कदम रख रहे हैं।
  • मुख्य भूमिका में देविका भट के साथ शरत कुमार और साई कुमार नजर आएंगे।
  • फिल्म का निर्माण जॉय फिल्म्स द्वारा किया जा रहा है।

फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पोस्टर आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशंसक अब फिल्म के टीजर और ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।