सोशल मीडिया की लत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सोशल मीडिया की लत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Sudarshantoday ब्यूरो: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ‘एडिक्टिव डिजाइन’ (लत लगाने वाले डिजाइन) को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई में केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई है कि कैसे एल्गोरिदम और नोटिफिकेशन के जरिए युवाओं और बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का आदी बनाया जा रहा है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं।

डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि ये उपयोगकर्ता की मनोवैज्ञानिक स्थिति के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि ‘अनंत स्क्रॉलिंग’ (infinite scrolling) और ‘पुश नोटिफिकेशन’ जैसे फीचर्स का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक स्क्रीन से चिपकाए रखना है, जिससे उनकी उत्पादकता और मानसिक शांति प्रभावित हो रही है।

अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग मानवीय विकास के लिए होना चाहिए, न कि उसे एक ऐसी लत में तब्दील करने के लिए जो समाज के भविष्य यानी युवाओं की एकाग्रता को ही खत्म कर दे।

प्रमुख बिंदु और भविष्य की राह

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम की पारदर्शिता पर सवाल।
  • युवाओं और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता।
  • केंद्र सरकार को यह बताना होगा कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष नीति बनाई जा रही है।
  • डिजिटल वेलबीइंग को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी बदलावों पर जोर।

फिलहाल, केंद्र सरकार को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को अपने डिजाइन में बदलाव करने के लिए मजबूर किया जाएगा या सरकार कोई नया नियामक ढांचा तैयार करेगी।

हनुमान अंश का जलवा: फिल्म ने वर्ल्डवाइड पार किया 300 करोड़ का आंकड़ा

हनुमान अंश का जलवा: फिल्म ने वर्ल्डवाइड पार किया 300 करोड़ का आंकड़ा

Sudarshantoday ब्यूरो: आध्यात्मिक ड्रामा फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर एक नया इतिहास रच दिया है। अपनी रिलीज के 41वें दिन भी दर्शकों के बीच फिल्म का क्रेज कम नहीं हुआ है और इसने वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये की कमाई का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।

सफलता का नया कीर्तिमान

लगातार कई हफ्तों से सिनेमाघरों में टिकी ‘हनुमान अंश’ ने साबित कर दिया है कि अच्छी कहानी और दमदार निर्देशन के दम पर कोई भी फिल्म लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकती है। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म अब 300 करोड़ के ऐतिहासिक मील के पत्थर के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

दर्शकों का अटूट भरोसा

बुधवार को फिल्म के कलेक्शन में मामूली गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन इसके बावजूद फिल्म का प्रदर्शन सराहनीय बना हुआ है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि जिस तरह से दर्शक इस फिल्म को प्यार दे रहे हैं, वह भारतीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

फिल्म की सफलता न केवल इसके तकनीकी पक्ष की जीत है, बल्कि यह भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति दर्शकों की गहरी रुचि को भी दर्शाती है।

  • फिल्म ने वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ का आंकड़ा पार किया।
  • घरेलू बाजार में 300 करोड़ के करीब पहुंच रही है फिल्म।
  • रिलीज के 41वें दिन भी दर्शकों की संख्या में निरंतरता बनी हुई है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अपने लाइफटाइम कलेक्शन में और कितने नए रिकॉर्ड जोड़ती है। फिलहाल, ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है।

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

Sudarshantoday ब्यूरो: मशहूर अमेरिकी रैपर मैकलमोर ने एक बड़ा और साहसी कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह अपने हालिया टूर से हुई कमाई में से 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) फिलिस्तीनी सहायता समूहों को दान करेंगे। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब संगीत जगत में राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर मुखर होने को लेकर बहस तेज हो गई है।

विवाद और टूर से बाहर होने का घटनाक्रम

मैकलमोर का यह फैसला तब सामने आया है जब उन्हें एड शीरन के टूर से हटा दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैकलमोर द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में की गई टिप्पणियों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटना के बाद, कई अन्य कलाकारों ने भी एकजुटता दिखाते हुए एड शीरन के टूर से अपना नाम वापस ले लिया, जिसने मनोरंजन जगत में एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

अरबपति रॉबर्ट क्राफ्ट को चुनौती

रैपर ने केवल दान की घोषणा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने अरबपति व्यवसायी रॉबर्ट क्राफ्ट को भी सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। मैकलमोर ने उनसे आग्रह किया है कि वे भी इस मानवीय कार्य में आगे आएं और उनके द्वारा दी जा रही इस राशि के बराबर ही दान करें।

प्रमुख बिंदु:

  • मैकलमोर ने फिलिस्तीनी राहत कार्यों के लिए 1 मिलियन डॉलर की राशि आवंटित की है।
  • राजनीतिक बयानों के बाद एड शीरन के टूर से रैपर को बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
  • कई अन्य कलाकारों ने मैकलमोर के समर्थन में टूर छोड़ने का साहसी निर्णय लिया।

संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का एक शक्तिशाली मंच भी है।

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि आज के दौर में कलाकार अपने वैश्विक प्रभाव का उपयोग मानवीय संकटों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने करियर में बड़े व्यावसायिक नुकसान का सामना क्यों न करना पड़े।

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

Sudarshantoday ब्यूरो: मशहूर अमेरिकी रैपर मैकलमोर ने एक बड़ा और साहसी कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह अपने हालिया टूर से हुई कमाई में से 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) फिलिस्तीनी सहायता समूहों को दान करेंगे। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब संगीत जगत में राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर मुखर होने को लेकर बहस तेज हो गई है।

विवाद और टूर से बाहर होने का घटनाक्रम

मैकलमोर का यह फैसला तब सामने आया है जब उन्हें एड शीरन के टूर से हटा दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैकलमोर द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में की गई टिप्पणियों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटना के बाद, कई अन्य कलाकारों ने भी एकजुटता दिखाते हुए एड शीरन के टूर से अपना नाम वापस ले लिया, जिसने मनोरंजन जगत में एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

अरबपति रॉबर्ट क्राफ्ट को चुनौती

रैपर ने केवल दान की घोषणा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने अरबपति व्यवसायी रॉबर्ट क्राफ्ट को भी सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। मैकलमोर ने उनसे आग्रह किया है कि वे भी इस मानवीय कार्य में आगे आएं और उनके द्वारा दी जा रही इस राशि के बराबर ही दान करें।

प्रमुख बिंदु:

  • मैकलमोर ने फिलिस्तीनी राहत कार्यों के लिए 1 मिलियन डॉलर की राशि आवंटित की है।
  • राजनीतिक बयानों के बाद एड शीरन के टूर से रैपर को बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
  • कई अन्य कलाकारों ने मैकलमोर के समर्थन में टूर छोड़ने का साहसी निर्णय लिया।

संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का एक शक्तिशाली मंच भी है।

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि आज के दौर में कलाकार अपने वैश्विक प्रभाव का उपयोग मानवीय संकटों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने करियर में बड़े व्यावसायिक नुकसान का सामना क्यों न करना पड़े।

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर उठाए सवाल

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर उठाए सवाल

Sudarshantoday ब्यूरो: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा पर चाइल्ड एब्यूज (बाल यौन शोषण) से जुड़ी सामग्री को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त हो गया है। मेटा द्वारा अपनी खामियों को स्वीकार किए जाने के बाद, अब केंद्र सरकार ने कंपनी के ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) स्टेटस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला तब तूल पकड़ा जब प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में मेटा की विफलता सामने आई।

सेफ हार्बर सुरक्षा पर संकट

आईटी नियमों के तहत अब तक मेटा को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्राप्त थी, जिसके तहत प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कंपनी को कानूनी रूप से सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता था। हालांकि, सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुरक्षा कवच बिना शर्त नहीं है। यदि प्लेटफॉर्म सुरक्षा मानकों का पालन करने में विफल रहता है, तो यह विशेषाधिकार छीना जा सकता है।

एनसीपीसीआर का स्पष्ट मानना है कि सेफ हार्बर सुरक्षा कोई स्थायी अधिकार नहीं है, बल्कि यह प्लेटफॉर्म द्वारा जिम्मेदारी निभाने की शर्त पर आधारित है। सुरक्षा में चूक होने पर मेटा को कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।

मेटा के लिए नई गाइडलाइंस

सरकार ने मेटा को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के किसी भी मामले को तुरंत संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करे। कंपनी को अब अपनी एल्गोरिदम और मॉडरेशन नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि ऐसी सामग्री को फैलने से रोका जा सके।

प्रमुख बिंदु:

  • मेटा ने अपनी मॉडरेशन प्रणाली में खामियों को स्वीकार किया है।
  • सरकार ने सेफ हार्बर इम्यूनिटी को समीक्षा के दायरे में रखा है।
  • CSAM सामग्री की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
  • प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े तकनीकी मानकों की मांग की गई है।

आने वाले दिनों में मेटा को अपनी जवाबदेही साबित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा उसे भारत में अपनी कानूनी सुरक्षा खोने का बड़ा जोखिम उठाना पड़ सकता है।

ट्रैविस केलसे बने 35 मिलियन डॉलर के पोंजी स्कीम का शिकार, आरोपी को 11 साल की सजा

ट्रैविस केलसे बने 35 मिलियन डॉलर के पोंजी स्कीम का शिकार, आरोपी को 11 साल की सजा

Sudarshantoday ब्यूरो: एनएफएल स्टार और कैनसस सिटी चीफ्स के टाइट एंड ट्रैविस केलसे एक बड़े वित्तीय घोटाले का शिकार हो गए हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले के अनुसार, केलसे उन निवेशकों में शामिल थे, जिन्हें 35 मिलियन डॉलर (लगभग 290 करोड़ रुपये) की पोंजी स्कीम के जरिए ठगा गया। इस मामले में मुख्य आरोपी सिद्धार्थ जवाहर को अदालत ने 11 साल की जेल की सजा सुनाई है।

क्या है पूरा मामला?

कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, सिद्धार्थ जवाहर ने निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे करोड़ों रुपये जुटाए थे। हालांकि, जवाहर ने इन पैसों को सही जगह निवेश करने के बजाय अपने निजी ऐशो-आराम पर खर्च किया। वह नए निवेशकों से मिले पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए कर रहा था, जो कि पोंजी स्कीम का एक क्लासिक तरीका है।

जवाहर ने निवेशकों के पैसे का उपयोग निजी जेट, लग्जरी होटलों और आलीशान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए किया, जबकि निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

केलसे का कितना हुआ नुकसान?

हालांकि ट्रैविस केलसे के इस घोटाले में फंसने की पुष्टि हो गई है, लेकिन उनके द्वारा गंवाई गई सटीक राशि का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। केलसे की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह घटना सेलिब्रिटी निवेशों में जोखिम को उजागर करती है।

मुख्य बिंदु:

  • सिद्धार्थ जवाहर को 35 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी का दोषी पाया गया।
  • आरोपी को 11 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
  • निवेशकों का पैसा निजी जेट और लग्जरी लाइफस्टाइल पर उड़ाया गया।
  • ट्रैविस केलसे इस घोटाले के हाई-प्रोफाइल पीड़ितों में से एक हैं।
फरीदाबाद पुलिस मुठभेड़: चोरी के दो वांछित बदमाशों के पैरों में लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

फरीदाबाद पुलिस मुठभेड़: चोरी के दो वांछित बदमाशों के पैरों में लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

Sudarshantoday ब्यूरो: फरीदाबाद में अपराध के खिलाफ पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में बीती रात पुलिस और चोरी के मामलों में वांछित दो बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी है। पुलिस के अनुसार, ये बदमाश लंबे समय से कई चोरी की वारदातों में फरार चल रहे थे और पुलिस को इनकी तलाश थी।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले दो शातिर अपराधी किसी बड़ी वारदात की फिराक में इलाके में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी शुरू कर दी। जब पुलिस ने संदिग्धों को रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें दोनों बदमाश घायल हो गए।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि दोनों आरोपियों को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पास से अवैध हथियार और चोरी का कुछ सामान भी बरामद किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • मुठभेड़ में घायल दोनों बदमाशों पर चोरी के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।
  • पुलिस ने आरोपियों के पास से देसी कट्टे और कारतूस बरामद किए हैं।
  • इलाके में बदमाशों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

कानून-व्यवस्था पर पुलिस का रुख

फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि एनसीआर क्षेत्र में अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। फिलहाल, पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि उनके अन्य साथियों और चोरी के माल के ठिकाने का पता लगाया जा सके।

राम तेरी गंगा मैली: मंदाकिनी ने खोला स्तनपान वाले सीन का बड़ा राज, बताया कैसे हुई थी शूटिंग

राम तेरी गंगा मैली: मंदाकिनी ने खोला स्तनपान वाले सीन का बड़ा राज, बताया कैसे हुई थी शूटिंग

Sudarshantoday ब्यूरो: बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री मंदाकिनी ने दशकों बाद अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के उस चर्चित दृश्य पर चुप्पी तोड़ी है, जिसने उस दौर में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म का स्तनपान (breastfeeding) वाला सीन आज भी सिनेमाई चर्चाओं का हिस्सा बना रहता है।

बिना बॉडी डबल के फिल्माया गया था सीन

एक हालिया इंटरव्यू में मंदाकिनी ने स्पष्ट किया कि उस दृश्य को लेकर जो भी कयास लगाए जाते रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उस सीन के लिए किसी बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं किया गया था। मंदाकिनी के अनुसार, यह पूरी तरह से एक कलात्मक प्रस्तुति थी जिसे कैमरे के पीछे से बहुत ही संवेदनशीलता और बारीकी के साथ शूट किया गया था।

मंदाकिनी ने कहा, ‘उस समय तकनीक और सिनेमैटोग्राफी का इस्तेमाल इस तरह किया गया था कि वह दृश्य अश्लील न लगकर एक मां की ममता और उसकी विवशता को दर्शाता था। मैंने इसे पूरी सहजता के साथ निभाया था।’

लगातार होती चर्चाओं से असहज महसूस करती हैं अभिनेत्री

फिल्म की अपार सफलता के बाद मंदाकिनी रातों-रात स्टार बन गई थीं, लेकिन उस एक सीन की वजह से उन्हें लंबे समय तक सार्वजनिक जांच और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि आज भी जब उस सीन पर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं, तो उन्हें असहजता महसूस होती है।

फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें:

  • ‘राम तेरी गंगा मैली’ 1985 में रिलीज हुई थी और यह उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी।
  • फिल्म का निर्देशन शोमैन राज कपूर ने किया था।
  • मंदाकिनी के अभिनय को उस समय काफी सराहा गया था, हालांकि फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर विवाद भी हुए थे।
  • अभिनेत्री का मानना है कि उस दौर की फिल्मों में भावनाओं को पर्दे पर उतारने का नजरिया आज के मुकाबले काफी अलग था।

मंदाकिनी का यह बयान उन सभी अफवाहों पर विराम लगाता है जो बरसों से फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में तैर रही थीं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक कलाकार के लिए अपनी भूमिका के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग को स्ट्रोक आने का दावा, सोशल मीडिया पर मची खलबली

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग को स्ट्रोक आने का दावा, सोशल मीडिया पर मची खलबली

Sudarshantoday ब्यूरो: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज दावा किया गया है। चीन डेमोक्रेसी पार्टी के अध्यक्ष वांग जुनताओ ने यह दावा किया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग को स्ट्रोक आया था और वे मंच पर बेहोश हो गए थे। हालांकि, इस दावे के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने इस पोस्ट पर कम्युनिटी नोट जोड़कर इसे भ्रामक बताया है।

दावे की सच्चाई और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

वांग जुनताओ ने अपने आधिकारिक हैंडल से दावा किया कि शी जिनपिंग की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिसके कारण उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। इस दावे के वायरल होते ही अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मच गई। हालांकि, चीनी सरकार या आधिकारिक मीडिया की ओर से इस पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। इसके उलट, ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की सार्वजनिक उपस्थिति और उनके कार्यक्रमों को सामान्य बताया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। प्लेटफॉर्म ने इसे भ्रामक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी खबरें बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित की जा रही हैं।

प्रमुख बिंदु

  • चीन डेमोक्रेसी पार्टी के प्रमुख ने शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर दावा किया।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने इस पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगाकर इसे भ्रामक बताया।
  • चीनी प्रशासन ने इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
  • ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की गतिविधियों में कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया था।

भ्रामक सूचनाओं का दौर

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेताओं के स्वास्थ्य को लेकर अक्सर इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं, जिनका उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना होता है। वर्तमान में, शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर चल रही ये चर्चाएं केवल अटकलों पर आधारित प्रतीत होती हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि जब तक कोई आधिकारिक स्रोत या विश्वसनीय फुटेज सामने नहीं आती, तब तक ऐसे दावों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: हर जिला मुख्यालय पर बनेंगे दो चार्जिंग स्टेशन, हाईकोर्ट का आदेश

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: हर जिला मुख्यालय पर बनेंगे दो चार्जिंग स्टेशन, हाईकोर्ट का आदेश

Sudarshantoday ब्यूरो: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते चलन और बुनियादी ढांचे की कमी को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर कम से कम दो इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं।

बुनियादी ढांचे की कमी पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उस गति से विकसित नहीं हो पा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक चार्जिंग की पर्याप्त सुविधा नहीं होगी, तब तक आम जनता इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में हिचकिचाएगी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना समय की मांग है, लेकिन इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है, जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

आदेश के मुख्य बिंदु

  • हर जिला मुख्यालय पर न्यूनतम दो ईवी चार्जिंग स्टेशन का निर्माण।
  • सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख मार्गों पर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार।
  • निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरल नीतियां बनाना।
  • पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना।

प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। वर्तमान में चार्जिंग स्टेशनों की कमी के कारण लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से कतराते हैं। अब सरकारी स्तर पर इन केंद्रों के निर्माण से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। राज्य सरकार को अब इस आदेश के अनुपालन के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।