मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

Sudarshantoday ब्यूरो: मशहूर अमेरिकी रैपर मैकलमोर ने एक बड़ा और साहसी कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह अपने हालिया टूर से हुई कमाई में से 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) फिलिस्तीनी सहायता समूहों को दान करेंगे। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब संगीत जगत में राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर मुखर होने को लेकर बहस तेज हो गई है।

विवाद और टूर से बाहर होने का घटनाक्रम

मैकलमोर का यह फैसला तब सामने आया है जब उन्हें एड शीरन के टूर से हटा दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैकलमोर द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में की गई टिप्पणियों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटना के बाद, कई अन्य कलाकारों ने भी एकजुटता दिखाते हुए एड शीरन के टूर से अपना नाम वापस ले लिया, जिसने मनोरंजन जगत में एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

अरबपति रॉबर्ट क्राफ्ट को चुनौती

रैपर ने केवल दान की घोषणा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने अरबपति व्यवसायी रॉबर्ट क्राफ्ट को भी सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। मैकलमोर ने उनसे आग्रह किया है कि वे भी इस मानवीय कार्य में आगे आएं और उनके द्वारा दी जा रही इस राशि के बराबर ही दान करें।

प्रमुख बिंदु:

  • मैकलमोर ने फिलिस्तीनी राहत कार्यों के लिए 1 मिलियन डॉलर की राशि आवंटित की है।
  • राजनीतिक बयानों के बाद एड शीरन के टूर से रैपर को बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
  • कई अन्य कलाकारों ने मैकलमोर के समर्थन में टूर छोड़ने का साहसी निर्णय लिया।

संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का एक शक्तिशाली मंच भी है।

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि आज के दौर में कलाकार अपने वैश्विक प्रभाव का उपयोग मानवीय संकटों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने करियर में बड़े व्यावसायिक नुकसान का सामना क्यों न करना पड़े।

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने 'सेफ हार्बर' सुरक्षा पर उठाए सवाल

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर मेटा की बढ़ी मुश्किलें, सरकार ने ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर उठाए सवाल

Sudarshantoday ब्यूरो: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा पर चाइल्ड एब्यूज (बाल यौन शोषण) से जुड़ी सामग्री को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त हो गया है। मेटा द्वारा अपनी खामियों को स्वीकार किए जाने के बाद, अब केंद्र सरकार ने कंपनी के ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) स्टेटस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला तब तूल पकड़ा जब प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री को रोकने में मेटा की विफलता सामने आई।

सेफ हार्बर सुरक्षा पर संकट

आईटी नियमों के तहत अब तक मेटा को ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा प्राप्त थी, जिसके तहत प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए कंपनी को कानूनी रूप से सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता था। हालांकि, सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सुरक्षा कवच बिना शर्त नहीं है। यदि प्लेटफॉर्म सुरक्षा मानकों का पालन करने में विफल रहता है, तो यह विशेषाधिकार छीना जा सकता है।

एनसीपीसीआर का स्पष्ट मानना है कि सेफ हार्बर सुरक्षा कोई स्थायी अधिकार नहीं है, बल्कि यह प्लेटफॉर्म द्वारा जिम्मेदारी निभाने की शर्त पर आधारित है। सुरक्षा में चूक होने पर मेटा को कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।

मेटा के लिए नई गाइडलाइंस

सरकार ने मेटा को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के किसी भी मामले को तुरंत संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट करे। कंपनी को अब अपनी एल्गोरिदम और मॉडरेशन नीतियों में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि ऐसी सामग्री को फैलने से रोका जा सके।

प्रमुख बिंदु:

  • मेटा ने अपनी मॉडरेशन प्रणाली में खामियों को स्वीकार किया है।
  • सरकार ने सेफ हार्बर इम्यूनिटी को समीक्षा के दायरे में रखा है।
  • CSAM सामग्री की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
  • प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े तकनीकी मानकों की मांग की गई है।

आने वाले दिनों में मेटा को अपनी जवाबदेही साबित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा उसे भारत में अपनी कानूनी सुरक्षा खोने का बड़ा जोखिम उठाना पड़ सकता है।

ट्रैविस केलसे बने 35 मिलियन डॉलर के पोंजी स्कीम का शिकार, आरोपी को 11 साल की सजा

ट्रैविस केलसे बने 35 मिलियन डॉलर के पोंजी स्कीम का शिकार, आरोपी को 11 साल की सजा

Sudarshantoday ब्यूरो: एनएफएल स्टार और कैनसस सिटी चीफ्स के टाइट एंड ट्रैविस केलसे एक बड़े वित्तीय घोटाले का शिकार हो गए हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले के अनुसार, केलसे उन निवेशकों में शामिल थे, जिन्हें 35 मिलियन डॉलर (लगभग 290 करोड़ रुपये) की पोंजी स्कीम के जरिए ठगा गया। इस मामले में मुख्य आरोपी सिद्धार्थ जवाहर को अदालत ने 11 साल की जेल की सजा सुनाई है।

क्या है पूरा मामला?

कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, सिद्धार्थ जवाहर ने निवेशकों को भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे करोड़ों रुपये जुटाए थे। हालांकि, जवाहर ने इन पैसों को सही जगह निवेश करने के बजाय अपने निजी ऐशो-आराम पर खर्च किया। वह नए निवेशकों से मिले पैसों का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए कर रहा था, जो कि पोंजी स्कीम का एक क्लासिक तरीका है।

जवाहर ने निवेशकों के पैसे का उपयोग निजी जेट, लग्जरी होटलों और आलीशान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए किया, जबकि निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

केलसे का कितना हुआ नुकसान?

हालांकि ट्रैविस केलसे के इस घोटाले में फंसने की पुष्टि हो गई है, लेकिन उनके द्वारा गंवाई गई सटीक राशि का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। केलसे की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह घटना सेलिब्रिटी निवेशों में जोखिम को उजागर करती है।

मुख्य बिंदु:

  • सिद्धार्थ जवाहर को 35 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी का दोषी पाया गया।
  • आरोपी को 11 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
  • निवेशकों का पैसा निजी जेट और लग्जरी लाइफस्टाइल पर उड़ाया गया।
  • ट्रैविस केलसे इस घोटाले के हाई-प्रोफाइल पीड़ितों में से एक हैं।
फरीदाबाद पुलिस मुठभेड़: चोरी के दो वांछित बदमाशों के पैरों में लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

फरीदाबाद पुलिस मुठभेड़: चोरी के दो वांछित बदमाशों के पैरों में लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

Sudarshantoday ब्यूरो: फरीदाबाद में अपराध के खिलाफ पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में बीती रात पुलिस और चोरी के मामलों में वांछित दो बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दोनों आरोपियों के पैरों में गोली लगी है। पुलिस के अनुसार, ये बदमाश लंबे समय से कई चोरी की वारदातों में फरार चल रहे थे और पुलिस को इनकी तलाश थी।

मुठभेड़ का घटनाक्रम

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले दो शातिर अपराधी किसी बड़ी वारदात की फिराक में इलाके में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम ने घेराबंदी शुरू कर दी। जब पुलिस ने संदिग्धों को रुकने का इशारा किया, तो उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें दोनों बदमाश घायल हो गए।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि दोनों आरोपियों को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पास से अवैध हथियार और चोरी का कुछ सामान भी बरामद किया गया है।

मुख्य बिंदु

  • मुठभेड़ में घायल दोनों बदमाशों पर चोरी के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।
  • पुलिस ने आरोपियों के पास से देसी कट्टे और कारतूस बरामद किए हैं।
  • इलाके में बदमाशों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

कानून-व्यवस्था पर पुलिस का रुख

फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि एनसीआर क्षेत्र में अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की यह कार्रवाई अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। फिलहाल, पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि उनके अन्य साथियों और चोरी के माल के ठिकाने का पता लगाया जा सके।

राम तेरी गंगा मैली: मंदाकिनी ने खोला स्तनपान वाले सीन का बड़ा राज, बताया कैसे हुई थी शूटिंग

राम तेरी गंगा मैली: मंदाकिनी ने खोला स्तनपान वाले सीन का बड़ा राज, बताया कैसे हुई थी शूटिंग

Sudarshantoday ब्यूरो: बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री मंदाकिनी ने दशकों बाद अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के उस चर्चित दृश्य पर चुप्पी तोड़ी है, जिसने उस दौर में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म का स्तनपान (breastfeeding) वाला सीन आज भी सिनेमाई चर्चाओं का हिस्सा बना रहता है।

बिना बॉडी डबल के फिल्माया गया था सीन

एक हालिया इंटरव्यू में मंदाकिनी ने स्पष्ट किया कि उस दृश्य को लेकर जो भी कयास लगाए जाते रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उस सीन के लिए किसी बॉडी डबल का इस्तेमाल नहीं किया गया था। मंदाकिनी के अनुसार, यह पूरी तरह से एक कलात्मक प्रस्तुति थी जिसे कैमरे के पीछे से बहुत ही संवेदनशीलता और बारीकी के साथ शूट किया गया था।

मंदाकिनी ने कहा, ‘उस समय तकनीक और सिनेमैटोग्राफी का इस्तेमाल इस तरह किया गया था कि वह दृश्य अश्लील न लगकर एक मां की ममता और उसकी विवशता को दर्शाता था। मैंने इसे पूरी सहजता के साथ निभाया था।’

लगातार होती चर्चाओं से असहज महसूस करती हैं अभिनेत्री

फिल्म की अपार सफलता के बाद मंदाकिनी रातों-रात स्टार बन गई थीं, लेकिन उस एक सीन की वजह से उन्हें लंबे समय तक सार्वजनिक जांच और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्वीकार किया कि आज भी जब उस सीन पर बार-बार सवाल उठाए जाते हैं, तो उन्हें असहजता महसूस होती है।

फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें:

  • ‘राम तेरी गंगा मैली’ 1985 में रिलीज हुई थी और यह उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी।
  • फिल्म का निर्देशन शोमैन राज कपूर ने किया था।
  • मंदाकिनी के अभिनय को उस समय काफी सराहा गया था, हालांकि फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर विवाद भी हुए थे।
  • अभिनेत्री का मानना है कि उस दौर की फिल्मों में भावनाओं को पर्दे पर उतारने का नजरिया आज के मुकाबले काफी अलग था।

मंदाकिनी का यह बयान उन सभी अफवाहों पर विराम लगाता है जो बरसों से फिल्म इंडस्ट्री के गलियारों में तैर रही थीं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक कलाकार के लिए अपनी भूमिका के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग को स्ट्रोक आने का दावा, सोशल मीडिया पर मची खलबली

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शी जिनपिंग को स्ट्रोक आने का दावा, सोशल मीडिया पर मची खलबली

Sudarshantoday ब्यूरो: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज दावा किया गया है। चीन डेमोक्रेसी पार्टी के अध्यक्ष वांग जुनताओ ने यह दावा किया है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग को स्ट्रोक आया था और वे मंच पर बेहोश हो गए थे। हालांकि, इस दावे के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने इस पोस्ट पर कम्युनिटी नोट जोड़कर इसे भ्रामक बताया है।

दावे की सच्चाई और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

वांग जुनताओ ने अपने आधिकारिक हैंडल से दावा किया कि शी जिनपिंग की तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिसके कारण उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी। इस दावे के वायरल होते ही अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मच गई। हालांकि, चीनी सरकार या आधिकारिक मीडिया की ओर से इस पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। इसके उलट, ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की सार्वजनिक उपस्थिति और उनके कार्यक्रमों को सामान्य बताया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। प्लेटफॉर्म ने इसे भ्रामक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी खबरें बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित की जा रही हैं।

प्रमुख बिंदु

  • चीन डेमोक्रेसी पार्टी के प्रमुख ने शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर दावा किया।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने इस पोस्ट पर कम्युनिटी नोट लगाकर इसे भ्रामक बताया।
  • चीनी प्रशासन ने इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
  • ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग की गतिविधियों में कोई असामान्य बदलाव नहीं देखा गया था।

भ्रामक सूचनाओं का दौर

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक नेताओं के स्वास्थ्य को लेकर अक्सर इस तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं, जिनका उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना होता है। वर्तमान में, शी जिनपिंग के स्वास्थ्य को लेकर चल रही ये चर्चाएं केवल अटकलों पर आधारित प्रतीत होती हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि जब तक कोई आधिकारिक स्रोत या विश्वसनीय फुटेज सामने नहीं आती, तब तक ऐसे दावों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: हर जिला मुख्यालय पर बनेंगे दो चार्जिंग स्टेशन, हाईकोर्ट का आदेश

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा: हर जिला मुख्यालय पर बनेंगे दो चार्जिंग स्टेशन, हाईकोर्ट का आदेश

Sudarshantoday ब्यूरो: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते चलन और बुनियादी ढांचे की कमी को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर कम से कम दो इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं।

बुनियादी ढांचे की कमी पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उनके लिए आवश्यक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उस गति से विकसित नहीं हो पा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक चार्जिंग की पर्याप्त सुविधा नहीं होगी, तब तक आम जनता इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में हिचकिचाएगी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना समय की मांग है, लेकिन इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है, जिसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए।

आदेश के मुख्य बिंदु

  • हर जिला मुख्यालय पर न्यूनतम दो ईवी चार्जिंग स्टेशन का निर्माण।
  • सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख मार्गों पर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार।
  • निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरल नीतियां बनाना।
  • पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना।

प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। वर्तमान में चार्जिंग स्टेशनों की कमी के कारण लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से कतराते हैं। अब सरकारी स्तर पर इन केंद्रों के निर्माण से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। राज्य सरकार को अब इस आदेश के अनुपालन के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम 2026: पंजाब सरकार ने गठित की 7 सदस्यीय समन्वय समिति

श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम 2026: पंजाब सरकार ने गठित की 7 सदस्यीय समन्वय समिति

Sudarshantoday ब्यूरो: पंजाब सरकार ने बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों का पालन करते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन) अधिनियम, 2026 से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श के लिए एक सात सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया है। यह कदम राज्य में धार्मिक भावनाओं और सिख समुदाय की मांगों को देखते हुए उठाया गया है।

समिति का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र

इस उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित संशोधन अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से अध्ययन करना और संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित करना है। सरकार का कहना है कि श्री अकाल तख्त साहिब के मार्गदर्शन में यह समिति एक पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी ताकि सिख पंथ की मर्यादा और कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन बना रहे।

सिख समुदाय की आस्था और धार्मिक परंपराओं को सर्वोपरि रखते हुए, सरकार ने अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुरूप इस समिति का गठन किया है, जो अधिनियम से जुड़े सभी संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करेगी।

प्रमुख बिंदु

  • समिति में सात सदस्य शामिल किए गए हैं जो कानूनी और धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ हैं।
  • यह समिति श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के तहत कार्य करेगी।
  • अधिनियम के क्रियान्वयन से पहले सभी संबंधित पक्षों से राय ली जाएगी।
  • इसका मुख्य लक्ष्य धार्मिक सद्भाव और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना है।

राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिति के गठन से अधिनियम को लेकर चल रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी और सरकार व धार्मिक नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

अतिथि शिक्षक भर्ती को लेकर उठे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ?

अतिथि शिक्षक भर्ती को लेकर उठे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ?

मेरिट के आधार पर कम अंक मिलने वालों को दी जॉइनिंग ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें

मेरिट से नीचे वालों को जॉइनिंग, दो और शिकायतें

सुदर्शन टुडे अशोक नगर

अशोकनगर जिले में हाल में हुई अतिथि शिक्षक नियुक्तियों को लेकर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं , और मैरिट अधिक अंक प्राप्त करने के बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्तियां नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग के कार्य प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं और अभ्यर्थियों के मुताबिक इस कार्य प्रणाली को लेकर नियुक्तियों में भ्रष्टाचारियों बू भी अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को आ रहे हैं उक्त मामले में अभ्यर्थियों द्वारा आरोप लगाया गया है कि ।पैनल मेरिट की अनदेखी के आरोपों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कम स्कोर वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति दिए जाने की पिछली शिकायत के बाद अब दो और मामले सामने आए हैं। दोनों मामलों में अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि उनका पैनल स्कोर अधिक होने के बावजूद उनसे कम स्कोर वाले अभ्यर्थियों को स्कूल में जॉइन करा दिया गया। पीड़ित अभ्यर्थी अब सीएम हेल्पलाइन से लेकर बीईओ कार्यालय तक शिकायत लेकर चक्कर लगा रहे हैं। पहला मामला हिंदी वर्ग-2 से जुड़ा है। पार्वती रघुवंशी ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत में बताया कि उनका Guest ID GTKK1925 है और अशोकनगर पैनल में उनकी रैंक 4 तथा पैनल स्कोर 209.11 है। उनका आरोप है कि शासकीय सांदीपनी विद्यालय, अशोकनगर की हिंदी वर्ग-2 की रिक्ति पर उनसे कम 199.93 स्कोर वाली नेहा पाराशर को जॉइन करा दिया गया। शिकायतकर्ता ने 24 अगस्त के DPI निर्देश का हवाला देते हुए पैनल मेरिट के क्रम से अभ्यर्थियों को आमंत्रित किए जाने की बात कही है।
जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित
शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की है। कार्यालय के 7 सितंबर के पत्र में टीम को 24 अगस्त को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी अतिथि शिक्षक आमंत्रण संबंधी निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता ने GFMS रिकॉर्ड और पूर्व की नियुक्ति प्रक्रिया की भी जांच कराने की मांग की है।
अर्थशास्त्र वर्ग-1 में भी अधिक स्कोर वाली अभ्यर्थी ने उठाया सवाल
दूसरा मामला अर्थशास्त्र वर्ग-1 का है। सीमा काछरे ने शिकायत में बताया कि उनका Guest ID GTKK8310 है और उनका पैनल स्कोर 177.71 है। उनका दावा है कि शासकीय सांदीपनी विद्यालय, अशोकनगर में उनसे कम 159.00 स्कोर वाले अभ्यर्थी को जॉइन करा दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें विद्यालय की ओर से किसी प्रकार की सूचना या आमंत्रण भी नहीं दिया गया।अभ्यर्थी ने 24 अगस्त के DPI निर्देशों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, GFMS पोर्टल रिकॉर्ड और जॉइनिंग प्रक्रिया की जांच की मांग की है। साथ ही नियम विरुद्धता पाए जाने पर कार्रवाई करते हुए पैनल मेरिट के आधार पर उन्हें अवसर देने की मांग की गई है।
लगातार शिकायतों से नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
अतिथि शिक्षक नियुक्ति को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों में मुख्य सवाल यही है कि अधिक पैनल स्कोर वाले अभ्यर्थियों को छोड़कर कम स्कोर वालों को किन नियमों के तहत जॉइनिंग दी गई। अब दोनों मामलों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुईं या नहीं। यदि इस पूरे मामले को वास्तविकता और ईमानदारी से देखा जाए तो यदि शिकायतकर्ता अभ्यर्थी सही है तो फिर कम नंबर मिलने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति आखिर कैसे की गई जिम्मेदारों पर एक सवाल खड़ा हो रहा है और पूरे मामले को लेकर भ्रष्टाचार की बू भी वंचित अभ्यर्थियों को आ रही है एक बड़ा सवाल है क्या सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को शिकायत करने के बाद क्या जिला शिक्षा अधिकारी इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर पीड़ित अभ्यर्थियों को न्याय दिला पाएंगे या फिर पुरी की पूरी भारती भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी । यह तो आने वाले समय में पता लगेगा फिलहाल तो मेरिट में अब्बल रहने वाले अभ्यर्थी नियुक्तियों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं।

बाल यौन शोषण सामग्री पर मेटा को सरकार की दो टूक, कहा- नहीं मिलेगी कोई छूट

बाल यौन शोषण सामग्री पर मेटा को सरकार की दो टूक, कहा- नहीं मिलेगी कोई छूट

Sudarshantoday ब्यूरो: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि बाल यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material) से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को हटाने में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है, लेकिन सरकार का रुख साफ है कि कंपनी को इस गंभीर मामले में कोई कानूनी सुरक्षा या छूट नहीं दी जा सकती।

कानूनी जवाबदेही से पीछे नहीं हट सकती कंपनी

हालिया घटनाक्रम में यह बात सामने आई है कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को रोकने में तकनीकी खामियां पाई गई थीं। सरकार ने इसे आईटी नियमों का सीधा उल्लंघन माना है। सूत्रों का कहना है कि मेटा ने अपनी गलती को स्वीकार किया है, लेकिन केवल माफी काफी नहीं है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने उपयोगकर्ताओं, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदार होना होगा।

डिजिटल सुरक्षा के मामले में कोई भी कंपनी कानून से ऊपर नहीं है। मेटा को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसी घिनौनी सामग्री के लिए कोई जगह न हो। सरकार इस मामले में सख्त निगरानी बनाए रखेगी।

क्या हैं सरकार के कड़े निर्देश?

  • मेटा को बाल यौन शोषण सामग्री की पहचान करने और उसे तुरंत हटाने के लिए एल्गोरिदम में सुधार करना होगा।
  • कंपनी को भारत के आईटी कानूनों के तहत अपनी जवाबदेही तय करनी होगी।
  • किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक को ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भविष्य की रणनीति

सरकार अब इस बात पर जोर दे रही है कि मेटा जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की छूट नहीं दी जा सकती। आने वाले दिनों में सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के लिए सुरक्षा मानकों को और अधिक कड़ा करने की योजना बना रही है ताकि बच्चों के लिए इंटरनेट को सुरक्षित बनाया जा सके।