₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर 0.4% MDR: व्यापारी वर्ग में बढ़ी चिंता, सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग

₹2,000 से अधिक UPI भुगतान पर 0.4% MDR: व्यापारी वर्ग में बढ़ी चिंता, सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत क्यों? व्यापारी संगठनों ने उठाए सवाल

भोपाल। संतोष राज की विशेष रिपोर्ट : 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने की घोषणा के बाद व्यापारी वर्ग में चिंता और असंतोष का माहौल है। नए प्रावधान के तहत यह शुल्क व्यापारी-पक्ष से लिया जाएगा और ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से सरकार और बैंकिंग व्यवस्था ने डिजिटल भुगतान, UPI और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दिया। ग्राहकों और दुकानदारों को बार-बार डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। आज बड़ी संख्या में व्यापारी अपने कारोबार का हिसाब-किताब डिजिटल माध्यम से रखते हैं और ग्राहक भी UPI को अपनी रोजमर्रा की भुगतान व्यवस्था का हिस्सा बना चुके हैं। ऐसे समय में बड़े व्यापारी लेनदेन पर MDR लगाने से व्यापारियों की लागत बढ़ने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। व्यापारी संगठनों का तर्क है कि पहले से ही कारोबारी वर्ग GST, आयकर, स्थानीय निकाय शुल्क, लाइसेंस फीस और अन्य वैधानिक दायित्वों का भुगतान करता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा पर अतिरिक्त लागत डालने से छोटे और मध्यम कारोबारियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार और NPCI का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार का तर्क है कि इससे UPI के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही ₹2,000 तक के P2M भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। लेकिन व्यापारी वर्ग का सवाल है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिन व्यापारियों ने वर्षों तक डिजिटल भुगतान को अपनाया, उन्हीं पर अब अतिरिक्त लागत डालना कितना उचित है?, व्यापारी संगठनों की ओर से यह भी चिंता जताई जा रही है कि अतिरिक्त लागत के कारण कुछ कारोबारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लग सकते हैं। हाल में Retailers Association of India सहित कुछ कारोबारी संगठनों ने भी MDR को लेकर आपत्तियां और पुनर्विचार की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को ऐसी किसी भी नई व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए जिससे कारोबार की लागत बढ़ती हो। यदि डिजिटल भुगतान देश की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, तो उसे और सरल, सस्ता तथा व्यापारी-अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारियों का कहना है कि व्यापार में मार्जिन पहले ही कई क्षेत्रों में सीमित है। ऐसे में प्रत्येक बड़े डिजिटल लेनदेन पर लगने वाली अतिरिक्त लागत सालभर में महत्वपूर्ण राशि बन सकती है। सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी रखा है। सीधे बैंक खाते में QR के माध्यम से UPI से प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे विक्रेताओं को MDR से छूट दी गई है। व्यापारी वर्ग लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय बाजार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। राजनीतिक दलों के लिए भी व्यापारियों की समस्याएं और उनकी आर्थिक चिंताएं महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दे हैं। ऐसे में व्यापारियों का कहना है कि नई UPI-MDR व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को व्यापारी संगठनों के साथ व्यापक संवाद करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की नीति और व्यापारियों पर पड़ने वाली लागत के बीच संतुलन बना रहे। व्यापारी वर्ग का कहना है कि सरकार से नाराजगी किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का विषय मात्र नहीं, बल्कि नीति से जुड़े सवाल का विषय है। यदि किसी नीति से व्यापारी और आम उपभोक्ता प्रभावित होते हैं तो सरकार को उनकी आपत्तियां सुनकर आवश्यक सुधार पर विचार करना चाहिए। व्यापारियों की मांग है कि UPI-MDR की नई व्यवस्था की समीक्षा की जाए, छोटे एवं मध्यम कारोबारियों पर पड़ने वाले वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जाए और व्यापारी संगठनों के साथ चर्चा के बाद ही आगे की व्यवस्था तय की जाए। अब देखना होगा कि 15 अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था पर व्यापारी संगठनों की आपत्तियों के बीच सरकार और NPCI आगे क्या कदम उठाते हैं।

Adidas का गुरुग्राम टेक हब: छंटनी की मार, 50% कर्मचारियों पर लटकी तलवार

Adidas का गुरुग्राम टेक हब: छंटनी की मार, 50% कर्मचारियों पर लटकी तलवार

Sudarshantoday ब्यूरो: वैश्विक स्पोर्ट्सवियर दिग्गज एडिडास ने अपने गुरुग्राम स्थित टेक्नोलॉजी हब में बड़े पैमाने पर छंटनी की पुष्टि की है। 15 सितंबर को हुई एक टाउन हॉल मीटिंग के बाद कंपनी ने भारत में अपने तकनीकी कार्यबल को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य पर संकट के बादल छा गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एडिडास के गुरुग्राम स्थित टेक हब में करीब 700 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारियों को इस छंटनी से प्रभावित होने की आशंका है। कंपनी ने कई कर्मचारियों को पहले ही एग्जिट लेटर थमा दिए हैं, जबकि अन्य को 15 दिसंबर तक का समय दिया गया है ताकि वे अपने कार्यों का हैंडओवर पूरा कर सकें।

कंपनी का आधिकारिक पक्ष

एडिडास ने अपने बयान में कहा है कि यह निर्णय परिचालन को सरल बनाने और कंपनी की महत्वपूर्ण क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लिया गया है। भारत हमारे लिए भविष्य के विकास के लिहाज से एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार बना रहेगा।

प्रभावित कर्मचारियों के लिए आगे क्या?

  • कंपनी ने छंटनी के पीछे परिचालन दक्षता को मुख्य कारण बताया है।
  • प्रभावित कर्मचारियों को हैंडओवर प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिसंबर मध्य तक का समय दिया गया है।
  • एडिडास ने स्पष्ट किया कि भारत में उनकी उपस्थिति और निवेश की प्रतिबद्धता बनी रहेगी।

यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों द्वारा किए जा रहे पुनर्गठन का हिस्सा माना जा रहा है, जहां कंपनियां अपनी लागत कम करने और तकनीकी ढांचे को अधिक चुस्त बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। फिलहाल, गुरुग्राम ऑफिस में काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।

जब अल पचीनो ने अपनी पूरी कमाई दान कर दी थी: 1980 की उस विवादित फिल्म की अनकही कहानी

जब अल पचीनो ने अपनी पूरी कमाई दान कर दी थी: 1980 की उस विवादित फिल्म की अनकही कहानी

Sudarshantoday ब्यूरो: हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अल पचीनो का नाम हमेशा से ही उनकी बेबाक अदाकारी और साहसी फैसलों के लिए जाना जाता है। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा मोड़ भी आया जब उन्होंने 1980 में आई अपनी फिल्म ‘क्रूजिंग’ (Cruising) से मिली पूरी कमाई को दान करने का एक बड़ा और साहसी निर्णय लिया। यह फिल्म उस दौर में काफी विवादों में रही थी और इसे लेकर LGBTQ+ समुदाय की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

विवादों के घेरे में ‘क्रूजिंग’

विलियम फ्राइडकिन द्वारा निर्देशित ‘क्रूजिंग’ में अल पचीनो ने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी जो न्यूयॉर्क के अंडरग्राउंड गे क्लबों में एक सीरियल किलर की तलाश करता है। फिल्म की रिलीज के समय ही इसे लेकर भारी विरोध हुआ था। आलोचकों और कार्यकर्ताओं का मानना था कि फिल्म में LGBTQ+ समुदाय का चित्रण बेहद आपत्तिजनक और हानिकारक तरीके से किया गया है।

पचीनो ने महसूस किया कि फिल्म का प्रभाव समुदाय के लिए नकारात्मक रहा है, इसलिए उन्होंने अपनी कमाई का उपयोग एक सकारात्मक विरासत छोड़ने के लिए किया।

पचीनो का बड़ा फैसला

फिल्म की रिलीज के बाद मचे बवाल को देखते हुए अल पचीनो ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी उम्मीद बहुत कम लोग करते हैं। उन्होंने फिल्म से मिली अपनी पूरी फीस एक ‘इरिवोकेबल ट्रस्ट फंड’ (irrevocable trust fund) में डाल दी। उनका यह कदम इस बात का प्रमाण था कि वे फिल्म के संदेश और उसके सामाजिक प्रभाव से खुद को अलग करना चाहते थे।

फिल्म के निर्देशक ने भी मानी गलती

समय बीतने के साथ, फिल्म के निर्देशक विलियम फ्राइडकिन ने भी इस बात को स्वीकार किया कि फिल्म के नैरेटिव में कुछ गंभीर कमियां थीं। उन्होंने माना कि फिल्म जिस तरह से पेश की गई, उसने कई लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

  • अल पचीनो ने फिल्म ‘क्रूजिंग’ से मिली पूरी रकम को दान कर दिया था।
  • यह फिल्म 1980 में रिलीज हुई थी और अपने विवादास्पद विषय के लिए जानी जाती है।
  • फिल्म में LGBTQ+ समुदाय के चित्रण को लेकर व्यापक विरोध हुआ था।
  • पचीनो ने इस कदम के जरिए एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की थी।
एशिया कप ट्रॉफी विवाद: कपिल देव ने मोहसिन नकवी पर कसा तंज, दिया ये मजेदार जवाब

एशिया कप ट्रॉफी विवाद: कपिल देव ने मोहसिन नकवी पर कसा तंज, दिया ये मजेदार जवाब

Sudarshantoday ब्यूरो: दुबई में आयोजित महिला एशिया कप के फाइनल में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 72 रनों से करारी शिकस्त देकर रिकॉर्ड आठवीं बार खिताब अपने नाम किया। हालांकि, जीत की इस चमक के बीच ट्रॉफी सेरेमनी के दौरान एक अजीब वाकया देखने को मिला, जब भारतीय खिलाड़ियों ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेने से परहेज किया। इस घटना ने खेल जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

विवाद की जड़ और बीसीसीआई का पक्ष

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि भारतीय टीम ने मंच पर मौजूद अधिकारियों के बजाय खुद ही ट्रॉफी को रिसीव करने का फैसला किया। इस पूरे मामले पर बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने सफाई देते हुए कहा कि बोर्ड ने आयोजकों को पहले ही सूचित कर दिया था और यह निर्णय पूरी तरह से टीम का सामूहिक फैसला था।

बीसीसीआई के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि प्रोटोकॉल और टीम की अपनी प्राथमिकताओं का मामला था।

कपिल देव का मजाकिया अंदाज

जब इस पूरे विवाद पर पूर्व दिग्गज कप्तान कपिल देव से प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बेहद चतुराई और मजाकिया अंदाज में इसे टाल दिया। कपिल देव ने किसी भी तरह के विवाद में पड़ने के बजाय एक चुटीली टिप्पणी की, जिससे वहां मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए। उन्होंने संकेत दिया कि खेल के मैदान पर जीत सबसे महत्वपूर्ण है और छोटी-मोटी बातों को तूल नहीं दिया जाना चाहिए।

मैच के मुख्य आकर्षण

  • भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर आठवीं बार एशिया कप जीता।
  • भारतीय बल्लेबाजों ने दुबई की पिच पर शानदार प्रदर्शन किया।
  • ट्रॉफी सेरेमनी के दौरान बीसीसीआई और एसीसी के बीच समन्वय पर सवाल उठे।
  • कपिल देव की टिप्पणी ने विवाद को हल्का करने का काम किया।

फिलहाल, भारतीय महिला टीम की इस ऐतिहासिक जीत पर पूरा देश गर्व कर रहा है और बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले को अब और अधिक तूल देने की आवश्यकता नहीं है।

यूपीआई शुल्क पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, कहा- मुफ्त की चीजों की कद्र नहीं होती

यूपीआई शुल्क पर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान, कहा- मुफ्त की चीजों की कद्र नहीं होती

Sudarshantoday ब्यूरो: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई (UPI) पर शुल्क लगाने के विचार का समर्थन करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अक्सर लोग उन सेवाओं की अहमियत नहीं समझते जो उन्हें मुफ्त में मिलती हैं। उनके इस बयान ने डिजिटल इकोनॉमी और उपभोक्ता व्यवहार पर एक नई बहस छेड़ दी है।

मुफ्त सेवाओं पर उमर अब्दुल्ला की राय

उमर अब्दुल्ला ने अपने हालिया संबोधन में डिजिटल लेनदेन की सुगमता पर बात करते हुए कहा कि यूपीआई ने भारत में वित्तीय क्रांति ला दी है, लेकिन किसी भी सेवा को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उसकी लागत का प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई सेवा पूरी तरह से मुफ्त होती है, तो समाज में उसकी वास्तविक उपयोगिता और मूल्य को लेकर गंभीरता कम हो जाती है।

डिजिटल भुगतान का ढांचा खड़ा करना और उसे सुरक्षित रखना एक खर्चीली प्रक्रिया है। मेरा मानना है कि यदि मामूली शुल्क लगाया जाता है, तो यह न केवल सिस्टम को मजबूत करेगा बल्कि उपयोगकर्ताओं में जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करेगा।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव सरकार और बैंकों के सामने एक बड़ी चुनौती है। जहां एक ओर यह बैंकों के लिए राजस्व का जरिया बन सकता है, वहीं दूसरी ओर आम जनता के बीच डिजिटल भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता पर इसका असर पड़ सकता है।

प्रमुख बिंदु:

  • यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने से बैंकों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिल सकती है।
  • उमर अब्दुल्ला के अनुसार, शुल्क लगाने से सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार होगा।
  • आम जनता की प्रतिक्रिया अभी भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है।
  • डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार को संतुलन बनाना होगा।

फिलहाल, सरकार की ओर से यूपीआई पर किसी भी तरह के शुल्क लगाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा तेज हो गई है।

निक जोनस के जन्मदिन पर भावुक हुईं मधु चोपड़ा, दामाद को बताया 'बेटे जैसा'

निक जोनस के जन्मदिन पर भावुक हुईं मधु चोपड़ा, दामाद को बताया ‘बेटे जैसा’

Sudarshantoday ब्यूरो: प्रियंका चोपड़ा की मां मधु चोपड़ा ने अपने दामाद और मशहूर अमेरिकी गायक निक जोनस के जन्मदिन के अवसर पर एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाला संदेश साझा किया है। सोशल मीडिया पर निक के लिए लिखे गए इस नोट में मधु चोपड़ा ने न केवल उनके प्रति अपना प्यार जाहिर किया, बल्कि उन्हें अपने सगे बेटे जैसा दर्जा भी दिया है।

रिश्तों की गहराई और प्यार

मधु चोपड़ा ने निक जोनस के साथ अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए कुछ अनदेखी तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में परिवार के साथ बिताए गए खास पलों की झलक साफ देखी जा सकती है। उन्होंने निक की तारीफ करते हुए लिखा कि वह न केवल एक बेहतरीन कलाकार हैं, बल्कि एक बेहद दयालु और मेहनती इंसान भी हैं।

निक, तुम मेरे लिए सिर्फ एक दामाद नहीं, बल्कि एक बेटे की तरह हो। तुम्हारी सादगी और दूसरों के प्रति तुम्हारा सम्मान हमें हमेशा प्रेरित करता है। जन्मदिन मुबारक हो!

2018 की वो शाही शादी

गौरतलब है कि प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस ने साल 2018 में जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में एक शाही समारोह में शादी की थी। तब से निक चोपड़ा परिवार का एक अभिन्न हिस्सा बन गए हैं और अक्सर उन्हें भारतीय त्योहारों और पारिवारिक कार्यक्रमों में पूरी गर्मजोशी के साथ शामिल होते देखा जाता है।

प्रियंका चोपड़ा का आगामी प्रोजेक्ट

जहाँ एक ओर परिवार में जश्न का माहौल है, वहीं प्रियंका चोपड़ा अपने करियर के अगले पड़ाव के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।

  • फिल्म ‘वाराणसी’ की रिलीज डेट: 7 अप्रैल, 2027
  • निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा की शादी: 2018
  • मधु चोपड़ा का निक के प्रति स्नेह: एक बेटे के समान

फैंस इस पोस्ट पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं और निक जोनस को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जो चोपड़ा और जोनस परिवार के बीच के मजबूत बंधन को दर्शाता है।

बनवार में विभाग की सख्ती एलटी केबल जलने की समस्या पर ट्रांसफार्मरों की जांच, मीटर डायरेक्ट कर हीटर चलाने वालों पर कार्रवाई

बनवार में विभाग की सख्ती एलटी केबल जलने की समस्या पर ट्रांसफार्मरों की जांच, मीटर डायरेक्ट कर हीटर चलाने वालों पर कार्रवाई

संवाददाता रानू जावेद खान
सुदर्शन टुडे

जवेरा दमोह। बिजली वितरण केंद्र बनवार में बार-बार बिजली कटौती और एलटी केबल जलने की समस्या से परेशान बनवार के बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए विद्युत विभाग ने क्षेत्र में जांच अभियान शुरू किया है। बुधवार को नोहटा जेई के नेतृत्व में टीम ने बनवार पहुंचकर ट्रांसफार्मरों के लोड और विद्युत लाइनों की स्थिति का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान अधिक लोड वाले ट्रांसफार्मरों को चिन्हित करने के साथ लाइनों का मेंटेनेंस कराया गया। वहीं कुछ उपभोक्ता मीटर डायरेक्ट कर हीटर चलाते पाए गए। टीम ने हीटर जब्त कर पंचनामा कार्रवाई की।
अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से बिजली का अनधिकृत उपयोग नहीं करने, मीटर से छेड़छाड़ न करने और बिजली बिल समय पर जमा करने की अपील की। विभाग ने कहा कि विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ओवरलोड और अनधिकृत बिजली उपयोग के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
इस दौरान जेई पूजा, अनीश अली, नितेश साहू, पावन यादव सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

सोशल मीडिया की लत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सोशल मीडिया की लत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Sudarshantoday ब्यूरो: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ‘एडिक्टिव डिजाइन’ (लत लगाने वाले डिजाइन) को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई में केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई है कि कैसे एल्गोरिदम और नोटिफिकेशन के जरिए युवाओं और बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का आदी बनाया जा रहा है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं।

डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे तरीके न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि ये उपयोगकर्ता की मनोवैज्ञानिक स्थिति के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि ‘अनंत स्क्रॉलिंग’ (infinite scrolling) और ‘पुश नोटिफिकेशन’ जैसे फीचर्स का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक स्क्रीन से चिपकाए रखना है, जिससे उनकी उत्पादकता और मानसिक शांति प्रभावित हो रही है।

अदालत ने कहा कि तकनीक का उपयोग मानवीय विकास के लिए होना चाहिए, न कि उसे एक ऐसी लत में तब्दील करने के लिए जो समाज के भविष्य यानी युवाओं की एकाग्रता को ही खत्म कर दे।

प्रमुख बिंदु और भविष्य की राह

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम की पारदर्शिता पर सवाल।
  • युवाओं और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता।
  • केंद्र सरकार को यह बताना होगा कि क्या इन प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष नीति बनाई जा रही है।
  • डिजिटल वेलबीइंग को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी बदलावों पर जोर।

फिलहाल, केंद्र सरकार को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को अपने डिजाइन में बदलाव करने के लिए मजबूर किया जाएगा या सरकार कोई नया नियामक ढांचा तैयार करेगी।

हनुमान अंश का जलवा: फिल्म ने वर्ल्डवाइड पार किया 300 करोड़ का आंकड़ा

हनुमान अंश का जलवा: फिल्म ने वर्ल्डवाइड पार किया 300 करोड़ का आंकड़ा

Sudarshantoday ब्यूरो: आध्यात्मिक ड्रामा फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर एक नया इतिहास रच दिया है। अपनी रिलीज के 41वें दिन भी दर्शकों के बीच फिल्म का क्रेज कम नहीं हुआ है और इसने वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये की कमाई का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है।

सफलता का नया कीर्तिमान

लगातार कई हफ्तों से सिनेमाघरों में टिकी ‘हनुमान अंश’ ने साबित कर दिया है कि अच्छी कहानी और दमदार निर्देशन के दम पर कोई भी फिल्म लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकती है। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म अब 300 करोड़ के ऐतिहासिक मील के पत्थर के बेहद करीब पहुंच चुकी है।

दर्शकों का अटूट भरोसा

बुधवार को फिल्म के कलेक्शन में मामूली गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन इसके बावजूद फिल्म का प्रदर्शन सराहनीय बना हुआ है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि जिस तरह से दर्शक इस फिल्म को प्यार दे रहे हैं, वह भारतीय सिनेमा के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

फिल्म की सफलता न केवल इसके तकनीकी पक्ष की जीत है, बल्कि यह भारतीय पौराणिक कथाओं के प्रति दर्शकों की गहरी रुचि को भी दर्शाती है।

  • फिल्म ने वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ का आंकड़ा पार किया।
  • घरेलू बाजार में 300 करोड़ के करीब पहुंच रही है फिल्म।
  • रिलीज के 41वें दिन भी दर्शकों की संख्या में निरंतरता बनी हुई है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अपने लाइफटाइम कलेक्शन में और कितने नए रिकॉर्ड जोड़ती है। फिलहाल, ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है।

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

मैकलमोर का बड़ा ऐलान: फिलिस्तीनी सहायता के लिए दान करेंगे 1 मिलियन डॉलर

Sudarshantoday ब्यूरो: मशहूर अमेरिकी रैपर मैकलमोर ने एक बड़ा और साहसी कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह अपने हालिया टूर से हुई कमाई में से 10 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) फिलिस्तीनी सहायता समूहों को दान करेंगे। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब संगीत जगत में राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर मुखर होने को लेकर बहस तेज हो गई है।

विवाद और टूर से बाहर होने का घटनाक्रम

मैकलमोर का यह फैसला तब सामने आया है जब उन्हें एड शीरन के टूर से हटा दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैकलमोर द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में की गई टिप्पणियों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस घटना के बाद, कई अन्य कलाकारों ने भी एकजुटता दिखाते हुए एड शीरन के टूर से अपना नाम वापस ले लिया, जिसने मनोरंजन जगत में एक नई चर्चा को जन्म दिया है।

अरबपति रॉबर्ट क्राफ्ट को चुनौती

रैपर ने केवल दान की घोषणा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने अरबपति व्यवसायी रॉबर्ट क्राफ्ट को भी सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। मैकलमोर ने उनसे आग्रह किया है कि वे भी इस मानवीय कार्य में आगे आएं और उनके द्वारा दी जा रही इस राशि के बराबर ही दान करें।

प्रमुख बिंदु:

  • मैकलमोर ने फिलिस्तीनी राहत कार्यों के लिए 1 मिलियन डॉलर की राशि आवंटित की है।
  • राजनीतिक बयानों के बाद एड शीरन के टूर से रैपर को बाहर का रास्ता दिखाया गया था।
  • कई अन्य कलाकारों ने मैकलमोर के समर्थन में टूर छोड़ने का साहसी निर्णय लिया।

संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दुनिया में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का एक शक्तिशाली मंच भी है।

यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि आज के दौर में कलाकार अपने वैश्विक प्रभाव का उपयोग मानवीय संकटों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कर रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने करियर में बड़े व्यावसायिक नुकसान का सामना क्यों न करना पड़े।