जब प्रथम विश्व युद्ध की आग से दहला था मद्रास: SMS Emden का वह खौफनाक हमला

जब प्रथम विश्व युद्ध की आग से दहला था मद्रास: SMS Emden का वह खौफनाक हमला

Sudarshantoday ब्यूरो: 22 सितंबर 1914 की रात मद्रास (अब चेन्नई) के निवासियों के लिए किसी बुरे सपने जैसी थी। प्रथम विश्व युद्ध की लपटें सुदूर यूरोप से निकलकर सीधे भारत के तटों तक पहुँच गई थीं, जब जर्मन युद्धपोत ‘SMS Emden’ ने मद्रास बंदरगाह पर अचानक धावा बोल दिया। महज 10 मिनट के भीतर इस जर्मन क्रूजर ने 125 से अधिक गोले बरसाकर पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया था।

धोखे की रणनीति और अचानक हमला

SMS Emden का कमांडर कार्ल वॉन मुलर एक चतुर रणनीतिकार था। उसने अपने जहाज को एक ब्रिटिश युद्धपोत जैसा दिखाने के लिए एक नकली ‘चौथी चिमनी’ लगा रखी थी। इस भेष में वह ब्रिटिश सुरक्षा घेरे को चकमा देते हुए मद्रास के तट तक पहुँच गया। रात के अंधेरे में अचानक हुए इस हमले ने न केवल सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, बल्कि बर्मा ऑयल कंपनी के विशाल तेल टैंकों को भी आग के हवाले कर दिया, जिससे आसमान में आग की ऊंची लपटें उठने लगीं।

शहर में मची अफरा-तफरी

इस हमले ने मद्रास के निवासियों के बीच इतना खौफ पैदा कर दिया था कि लोग अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। यह भारत की मुख्य भूमि पर प्रथम विश्व युद्ध की पहली और सबसे बड़ी सीधी कार्रवाई थी।

इतिहास में ‘एमडेन’ का प्रभाव

इस हमले के बाद ‘एमडेन’ नाम दक्षिण भारत की स्थानीय भाषा और संस्कृति का हिस्सा बन गया। आज भी कई क्षेत्रों में किसी को डराने या किसी के अचानक गायब हो जाने को ‘एमडेन’ से जोड़कर देखा जाता है। यह नाम उस खौफ का प्रतीक बन गया जो एक जर्मन युद्धपोत ने भारतीय तट पर छोड़ा था।

मुख्य बिंदु:

  • SMS Emden ने 10 मिनट में 125 से अधिक गोले दागे थे।
  • हमले का मुख्य लक्ष्य बर्मा ऑयल कंपनी के तेल डिपो थे।
  • इस घटना के बाद मद्रास में ब्रिटिश सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया गया था।
  • जर्मन जहाज की चालाकी ने ब्रिटिश नौसेना को भी सकते में डाल दिया था।

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