महाराजगंज स्थित आवास से सुबह ले गई पुलिस
पुलिस ने कहा- आपराधिक मामला दर्ज करने की योजना नहीं
2019 में बने थे नेपाल के मुख्य न्यायाधीश
2022 में महाभियोग प्रस्ताव के बाद हुए थे निलंबित
महाभियोग प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चला मामला
केपी शर्मा ओली के संसद भंग करने के फैसले को किया था खारिज
राणा को जल्द रिहा किए जाने की बात
नेपाल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा हिरासत में, पुलिस ने सुरक्षा कारण बताया
नेपाल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को रविवार सुबह काठमांडू स्थित उनके महाराजगंज आवास से पुलिस अपने साथ ले गई। शुरुआती रिपोर्टों में इसे गिरफ्तारी बताया गया, लेकिन बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि उन्हें एक संभावित सुरक्षा खतरे के कारण सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। पुलिस के मुताबिक फिलहाल उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने की योजना नहीं है और उन्हें रिहा किया जाएगा।
महाराजगंज स्थित आवास से सुबह ले गई पुलिस
पुलिस की टीम रविवार तड़के राणा के महाराजगंज स्थित आवास पर पहुंची। उन्हें वहां से काठमांडू वैली क्राइम इन्वेस्टिगेशन ऑफिस ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार राणा को किसी आपराधिक जांच के तहत गिरफ्तार करने के बजाय सुरक्षा संबंधी चिंता के कारण सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
पुलिस ने कहा- आपराधिक मामला दर्ज करने की योजना नहीं
पुलिस अधिकारियों के अनुसार राणा के खिलाफ फिलहाल कोई आपराधिक मामला चलाने की योजना नहीं है। सुरक्षा संबंधी खतरे को देखते हुए उन्हें पुलिस कार्यालय लाया गया था। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।
2019 में बने थे नेपाल के मुख्य न्यायाधीश
चोलेन्द्र शमशेर राणा ने जनवरी 2019 में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान नेपाल की न्यायपालिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में उनके फैसले चर्चा में रहे।
2022 में महाभियोग प्रस्ताव के बाद हुए थे निलंबित
फरवरी 2022 में संसद में राणा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दर्ज किया गया था। संवैधानिक प्रावधानों के तहत महाभियोग प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्हें मुख्य न्यायाधीश के पद से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद यह मामला लंबे समय तक कानूनी और संवैधानिक विवाद का विषय बना रहा।
महाभियोग प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी चला मामला
राणा के खिलाफ शुरू की गई महाभियोग प्रक्रिया लंबे समय तक पूरी नहीं हो सकी। बाद में इस प्रक्रिया की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। सितंबर 2026 में संवैधानिक पीठ ने संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए महाभियोग प्रस्ताव को आगे जारी रखने से जुड़े मामले को समाप्त कर दिया।
केपी शर्मा ओली के संसद भंग करने के फैसले को किया था खारिज
राणा के मुख्य न्यायाधीश रहते नेपाल की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक फैसला भी आया था। उनकी अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद भंग करने के फैसले को खारिज कर दिया था। इस फैसले का नेपाल की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा था।
राणा को जल्द रिहा किए जाने की बात
ताजा जानकारी के अनुसार पुलिस ने राणा को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर रखा है। अधिकारियों ने कहा है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की कार्रवाई नहीं की जा रही है और उन्हें रिहा किया जाएगा। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि राणा को किस तरह का सुरक्षा खतरा महसूस हुआ था।
निष्कर्ष
नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को उनके आवास से पुलिस द्वारा अपने साथ ले जाने के बाद मामले ने चर्चा बढ़ा दी। शुरुआत में इसे गिरफ्तारी के रूप में बताया गया, लेकिन पुलिस के बाद के स्पष्टीकरण के मुताबिक कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई थी। फिलहाल उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की योजना नहीं है और रिहाई की बात कही गई है।















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