Sudarshantoday ब्यूरो: चीन अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को तेजी से आधुनिक बनाने और विस्तार देने में जुटा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश भर में सात प्रमुख रणनीतिक ठिकानों पर निर्माण कार्य और अपग्रेडेशन की गतिविधियां देखी गई हैं, जो वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
प्रमुख ठिकानों पर निर्माण और आधुनिकरण
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की एक विस्तृत रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि चीन पिंगटोंग, ज़िटोंग और विशेष रूप से लोप नुर जैसे क्षेत्रों में अपने परमाणु बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। इन स्थानों पर उपग्रह से ली गई तस्वीरों में नई निर्माण गतिविधियों और सुरक्षा प्रणालियों के विस्तार के स्पष्ट संकेत मिले हैं।
परमाणु जखीरे का बढ़ता आकार
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास वर्तमान में अनुमानित 620 परमाणु हथियार मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण कार्य केवल मौजूदा हथियारों के रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में नए डिलीवरी सिस्टम और मिसाइल प्रणालियों के समर्थन के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
चीन का दावा है कि उसकी परमाणु नीति पूरी तरह से रक्षात्मक है और वह ‘नो-फर्स्ट-यूज़’ (पहले इस्तेमाल न करने) की प्रतिबद्धता पर कायम है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और चीन का रुख
चीन के विदेश मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनकी परमाणु क्षमताएं केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हैं। बीजिंग का तर्क है कि वह केवल अपनी परमाणु निवारक क्षमता को आधुनिक बना रहा है ताकि किसी भी बाहरी खतरे का सामना किया जा सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तेजी से हो रहे विस्तार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिहाज से देख रहा है।
- चीन के सात प्रमुख परमाणु स्थलों पर निर्माण कार्य जारी।
- अनुमानित 620 परमाणु हथियार, भविष्य में संख्या बढ़ने की संभावना।
- लोप नुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी।
- चीन का ‘नो-फर्स्ट-यूज़’ नीति पर जोर।















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