तरुण तेजपाल ने किया आत्मसमर्पण: 2013 दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहुंचे गोवा कोर्ट

तरुण तेजपाल ने किया आत्मसमर्पण: 2013 दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहुंचे गोवा कोर्ट

Sudarshantoday ब्यूरो: तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने 2013 के बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में आखिरकार गोवा की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्हें दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया गया था।

कानूनी लड़ाई और अदालती आदेश

तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दोषी करार दिया गया था। हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में 2021 में गोवा सत्र अदालत द्वारा तेजपाल को दी गई बरी करने की रिहाई को पलट दिया था। हाई कोर्ट ने उन्हें दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट निर्देश में कहा था कि तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा, जिसके बाद ही उनकी अपील पर आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

मामले के मुख्य बिंदु

  • 2013 में तहलका की एक पूर्व महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
  • 2021 में गोवा की निचली अदालत ने सबूतों के अभाव में तेजपाल को बरी कर दिया था।
  • बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए उन्हें दोषी ठहराया।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, आत्मसमर्पण के बाद अब उन्हें सजा काटनी होगी, जो उनकी अपील के अंतिम परिणाम के अधीन होगी।

तरुण तेजपाल के आत्मसमर्पण के साथ ही अब कानूनी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि उनकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख क्या होगा। फिलहाल, उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अब मामला पूरी तरह से शीर्ष अदालत के विचाराधीन है।

गणेश चतुर्थी की धूम: लालबागचा राजा से लेकर तमिलनाडु तक भक्ति में डूबा पूरा भारत

गणेश चतुर्थी की धूम: लालबागचा राजा से लेकर तमिलनाडु तक भक्ति में डूबा पूरा भारत

Sudarshantoday ब्यूरो: आज पूरा देश गणेश चतुर्थी के पावन पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मना रहा है। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के स्वागत के लिए हर गली-मोहल्ले में विशेष तैयारियां की गई हैं। मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा से लेकर तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों तक, भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

श्रद्धा का केंद्र: लालबागचा राजा से लेकर दक्षिण भारत तक

गणेशोत्सव की सबसे भव्य तस्वीरें मुंबई से सामने आ रही हैं, जहां लालबागचा राजा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। वहीं, दक्षिण भारत में भी परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु और कर्नाटक के मंदिरों में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ बप्पा का आह्वान किया गया है।

सामाजिक संदेशों का मंच बने पंडाल

इस वर्ष गणेश पंडालों की सजावट केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संदेशों का माध्यम भी बनी है। कई पंडालों में पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों को कलाकृतियों के जरिए दर्शाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गणेश चतुर्थी का यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह देश में एक नई सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का संचार भी करता है।

त्योहारों के सीजन की शुरुआत

गणेश चतुर्थी के साथ ही देश में आने वाले त्योहारों के सीजन का बिगुल बज गया है। विशेष रूप से बंगाल और उत्तर भारत में इस उत्सव को आने वाली समृद्धि और खुशहाली का अग्रदूत माना जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • देशभर के प्रमुख मंदिरों और पंडालों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी है।
  • मुंबई के लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।
  • पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों और सजावट पर इस बार विशेष जोर दिया गया है।
  • गणेशोत्सव के साथ ही देश भर में आगामी त्योहारों के लिए उत्साह का माहौल है।
दिशा सालियान मौत मामला: सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, मुंबई पुलिस से ली जांच की कमान

दिशा सालियान मौत मामला: सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, मुंबई पुलिस से ली जांच की कमान

Sudarshantoday ब्यूरो: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है और अब जांच की पूरी कमान मुंबई पुलिस के हाथों से अपने नियंत्रण में ले ली है। यह घटनाक्रम लंबे समय से चल रही राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी दांव-पेच के बाद सामने आया है।

जांच का दायरा और नई दिशा

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के कारण हुई थी। मुंबई पुलिस ने शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना था, लेकिन सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद इस मामले ने कई गंभीर मोड़ लिए। अब सीबीआई की एंट्री से यह उम्मीद जताई जा रही है कि मामले से जुड़े उन अनसुलझे सवालों के जवाब मिल सकेंगे, जिन पर परिवार और प्रशंसकों ने बार-बार चिंता जताई थी।

सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि एजेंसी ने मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और केस डायरी मुंबई पुलिस से प्राप्त कर ली है। अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का नए सिरे से विश्लेषण किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • दिशा सालियान की मौत के मामले में सीबीआई ने औपचारिक रूप से जांच शुरू की।
  • मुंबई पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच की फाइलों की समीक्षा की जा रही है।
  • मामले के हर पहलू, जिसमें दुर्घटना और अन्य संभावनाओं पर गौर किया जाएगा।
  • आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण गवाहों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

दिशा सालियान का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में भी काफी संवेदनशील रहा है। विपक्ष ने बार-बार इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद अब इस बात पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या जांच में कोई नया खुलासा सामने आता है या फिर यह मामला पहले की तरह ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह से साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित होगी।

ब्रिक्स घोषणापत्र पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, कहा- भारत की बढ़ती वैश्विक धमक का प्रमाण

ब्रिक्स घोषणापत्र पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, कहा- भारत की बढ़ती वैश्विक धमक का प्रमाण

Sudarshantoday ब्यूरो: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच हाल ही में संपन्न हुए संयुक्त घोषणापत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर आम सहमति बन रही है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आज दुनिया भारत की बात को गंभीरता से सुन रही है।

देर रात तक चली मैराथन वार्ता

ब्रिक्स देशों के बीच यह सहमति कोई आसान उपलब्धि नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, सदस्य देशों के बीच गहन वार्ता का दौर शनिवार सुबह 4 बजे तक चला। यह स्थिति काफी हद तक 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन की याद दिलाती है, जहां भारत ने जटिल भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद एक साझा घोषणापत्र पर सभी देशों को सहमत कर लिया था।

पश्चिम एशिया संकट पर मतभेद

वार्ता के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर थी। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच इस मुद्दे पर गहरे मतभेद थे, जिसके कारण सहमति बनाना बेहद कठिन हो गया था। इससे पहले भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक भी बिना किसी संयुक्त बयान के समाप्त हो गई थी, जिससे इस बार के शिखर सम्मेलन पर दबाव और अधिक बढ़ गया था।

कूटनीतिक सफलता के मुख्य बिंदु

  • भारत की मध्यस्थता ने सदस्य देशों के बीच बनी खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाई।
  • घोषणापत्र में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दी गई है।
  • यह सफलता भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की नीति की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘आज का भारत केवल एक भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने वाला देश बन चुका है। ब्रिक्स का यह संयुक्त घोषणापत्र इस बात का प्रमाण है कि भारत की कूटनीति दुनिया को साथ लेकर चलने में सक्षम है।’

दिव्यांगजन अधिकार नीति: एक दशक बाद भी बदलाव का इंतजार, फाइलों में उलझा भविष्य

दिव्यांगजन अधिकार नीति: एक दशक बाद भी बदलाव का इंतजार, फाइलों में उलझा भविष्य

Sudarshantoday ब्यूरो: भारत में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके समावेशी विकास के लिए बनी राष्ट्रीय नीति को एक दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके पुनर्गठन की प्रक्रिया आज भी फाइलों में दम तोड़ रही है। वर्ष 2016 में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के आने के बाद उम्मीद जगी थी कि नीतिगत ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन होगा, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी निराशाजनक बनी हुई है।

नीतिगत सुस्ती और चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान नीति आधुनिक समय की जरूरतों और तकनीक के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही है। शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में दिव्यांगों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिस तेजी की आवश्यकता थी, वह नदारद है। सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी और बजट आवंटन में स्पष्टता का अभाव इस देरी के मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

दिव्यांगजन अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उसे लागू करने वाली नीति को समय के अनुसार अपडेट नहीं किया जाता, तब तक समानता का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रहेगा।

प्रमुख बिंदु जो नीति में सुधार की मांग करते हैं

  • डिजिटल इंडिया के दौर में दिव्यांगों के लिए सुलभ तकनीक का अभाव।
  • निजी क्षेत्र में दिव्यांगों के लिए रोजगार के अवसरों का सीमित होना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास केंद्रों की भारी कमी।
  • सरकारी भवनों और परिवहन प्रणालियों में ‘एक्सेसिबिलिटी’ का अधूरा क्रियान्वयन।

सामाजिक न्याय मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नई नीति के मसौदे पर विचार-विमर्श जारी है, लेकिन अंतिम मंजूरी में हो रही देरी ने दिव्यांग समुदाय में असंतोष पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि सरकार इस महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार को कब तक धरातल पर उतार पाती है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी के रात्रिभोज में शी जिनपिंग की जगह शामिल हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी के रात्रिभोज में शी जिनपिंग की जगह शामिल हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी

Sudarshantoday ब्यूरो: रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित विशेष रात्रिभोज में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। उनकी जगह चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस कार्यक्रम में प्रतिनिधित्व किया।

रात्रिभोज में वांग यी की उपस्थिति

ब्रिक्स नेताओं के लिए आयोजित इस भव्य रात्रिभोज में दुनिया भर के कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे। हालांकि, शी जिनपिंग के स्थान पर वांग यी का पहुंचना अंतरराष्ट्रीय गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे गया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव चीन की आंतरिक प्राथमिकताओं या किसी विशेष रणनीतिक निर्णय का हिस्सा हो सकता है।

चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन वांग यी की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि चीन इस शिखर सम्मेलन के महत्व को कम नहीं आंक रहा है।

भारत-चीन संबंधों पर असर

हाल ही में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर हुए समझौते के बाद यह पहली बड़ी मुलाकात थी। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता पर अभी भी सबकी नजरें टिकी हैं, लेकिन वांग यी की भागीदारी ने राजनयिक स्तर पर संवाद की निरंतरता को बनाए रखा है।

मुख्य बिंदु:

  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन रूस के कज़ान शहर में किया गया।
  • पीएम मोदी के रात्रिभोज में शी जिनपिंग के बजाय वांग यी ने हिस्सा लिया।
  • हालिया एलएसी समझौते के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीदें जगी हैं।
  • कूटनीतिक स्तर पर वांग यी की उपस्थिति को एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिक्स का विस्तार हो रहा है और वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज को मुखर करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच होने वाली संभावित मुलाकात पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी।

सांसद सुखदेव भगत पर लगाए आरोप को लेकर भानु प्रताप शाही के खिलाफ प्राथमिकी की मांग

सांसद सुखदेव भगत पर लगाए आरोप को लेकर भानु प्रताप शाही के खिलाफ प्राथमिकी की मांग

युवा कांग्रेस के इमरान आजाद अंसारी ने लोहरदगा थाना में दिया आवेदन, आदिवासी सांसद की छवि धूमिल करने का लगाया आरोप

झारखंड युवा कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी इमरान आजाद अंसारी ने रविवार को लोहरदगा थाना प्रभारी को आवेदन देकर भवनाथपुर के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता भानु प्रताप शाही के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 11 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी द्वारा जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा एवं बहाली को लेकर आयोजित धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान भानु प्रताप शाही ने लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत पर सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए। आवेदन के अनुसार धरना-प्रदर्शन के दौरान भानु प्रताप शाही ने सांसद सुखदेव भगत पर पैसा लेकर नौकरी देने का आरोप लगाया। इमरान आजाद अंसारी ने इसे झूठा और आपत्तिजनक आरोप बताते हुए कहा है कि इस तरह के बयान से एक आदिवासी सांसद की सामाजिक एवं राजनीतिक छवि को धूमिल करने और उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिसंबर 2014 से दिसंबर 2019 तक रघुवर दास के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी और उस अवधि में जेपीएससी की परीक्षा नहीं ली गई थी। भानु प्रताप शाही द्वारा एक आदिवासी सांसद पर झूठा आरोप लगाकर उनकी छवि को धूमिल एवं अपमानित करने का अनुचित प्रयास किया गया है। उन्होंने थाना प्रभारी से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भानु प्रताप शाही के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

बालाघाट में हुई नारेबाजी से भड़के अभिजीत दिपके, कहा- 'मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं'

बालाघाट में हुई नारेबाजी से भड़के अभिजीत दिपके, कहा- ‘मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं’

Sudarshantoday ब्यूरो: मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई नारेबाजी के बाद सीजेपी (CJP) के अभिजीत दिपके ने राज्य सरकार पर तीखा कटाक्ष किया है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में ‘मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं’ कहकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यह घटना उस समय हुई जब कार्यक्रम में मौजूद कुछ लोगों ने सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

घटना का विवरण और विरोध के मायने

बालाघाट में आयोजित एक कार्यक्रम में जब अभिजीत दिपके मंच पर पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस अप्रत्याशित विरोध से नाराज दिपके ने अपना आपा खोने के बजाय व्यंग्य का सहारा लिया। उन्होंने माइक संभालते हुए तंज कसा कि यदि जनता की यही इच्छा है, तो वे तुरंत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उनका यह बयान सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीतियों और स्थानीय प्रशासन की विफलता पर एक करारा प्रहार माना जा रहा है।

अभिजीत दिपके ने अपने संबोधन में कहा, ‘अगर मेरी उपस्थिति या सरकार के निर्णयों से आप इतने ही व्यथित हैं, तो मैं अभी इस्तीफा देने को तैयार हूं। यह लोकतंत्र है या भीड़तंत्र, इसका फैसला जनता को करना होगा।’

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

इस घटना के बाद से ही मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकार की अलोकप्रियता का प्रमाण बताया है, वहीं सत्ता पक्ष के नेता इसे एक सोची-समझी साजिश करार दे रहे हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • बालाघाट कार्यक्रम में नारेबाजी के बाद अभिजीत दिपके का तीखा बयान।
  • ‘इस्तीफा’ वाले तंज ने राजनीतिक बहस को नई दिशा दी।
  • स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।
  • विपक्ष ने इसे सरकार के खिलाफ जन-आक्रोश के रूप में पेश किया।

फिलहाल, इस मामले पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दिपके का यह अंदाज आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और अधिक तल्खी पैदा कर सकता है।

भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने की राह पर मलेशिया और इथियोपिया

भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने की राह पर मलेशिया और इथियोपिया

Sudarshantoday ब्यूरो: भारत की बढ़ती वैश्विक रक्षा साख का लोहा अब दुनिया भर के देश मान रहे हैं। इसी क्रम में मलेशिया और इथियोपिया ने भारत के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की इच्छा जताई है। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।

रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय

हाल के दिनों में भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित रक्षा उपकरणों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाई है। मलेशिया, जो पहले से ही भारत के साथ रक्षा सहयोग में सक्रिय है, अब अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए भारतीय रक्षा प्रणालियों में गहरी रुचि दिखा रहा है। वहीं, इथियोपिया ने भी अफ्रीकी महाद्वीप में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत के साथ रक्षा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में साझेदारी की इच्छा व्यक्त की है।

विशेषज्ञों की राय

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत का रक्षा निर्यात पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मलेशिया और इथियोपिया जैसे देशों का भारत की ओर रुख करना यह दर्शाता है कि भारत अब केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है।

सहयोग के प्रमुख बिंदु

  • रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • सैन्य प्रशिक्षण और खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग।
  • हिंद महासागर और अफ्रीकी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना।
  • तकनीकी हस्तांतरण के जरिए स्थानीय रक्षा उद्योगों को सशक्त बनाना।

भारत की विदेश नीति के केंद्र में ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करना रहा है। मलेशिया और इथियोपिया के साथ यह बढ़ता रक्षा सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले समय में इन देशों के साथ रक्षा समझौतों के और अधिक विस्तार की संभावना है।

दिल्ली में आज से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत, दुनिया की आधी आबादी के नेताओं की अहम बैठक

दिल्ली में आज से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत, दुनिया की आधी आबादी के नेताओं की अहम बैठक

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आज से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत होने जा रही है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत BRICS देशों के प्रमुख नेता एक मंच पर नजर आएंगे। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, इस सम्मेलन को उभरती वैश्विक व्यवस्था और बदलते वर्ल्ड ऑर्डर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एक मंच पर दिखेंगे मोदी, जिनपिंग और पुतिन

18वें BRICS शिखर सम्मेलन की सबसे बड़ी तस्वीर भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात और उनके बीच होने वाली बातचीत पर खास नजर रहेगी।

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ समय में संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, जबकि रूस वैश्विक स्तर पर लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में तीनों नेताओं का एक ही मंच पर आना अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है।

भारत मंडपम में होगा क्लोज्ड डोर सेशन

सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में BRICS नेताओं का क्लोज्ड डोर सेशन आयोजित किया जाएगा। इस बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, बहुपक्षीय सहयोग, विकासशील देशों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

BRICS का विस्तार होने के बाद संगठन का वैश्विक प्रभाव और बढ़ा है। ऐसे में सम्मेलन में शामिल देशों के नेता दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी रणनीति और प्राथमिकताएं सामने रख सकते हैं।

दुनिया की आधी आबादी से जुड़े देशों के नेता एक साथ

BRICS समूह को दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। इसके सदस्य देशों की संयुक्त आबादी विश्व की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा है। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाली इस बैठक को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पीएम मोदी की मेजबानी में डिनर

शिखर सम्मेलन के कार्यक्रम में देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में विशेष डिनर का भी आयोजन होगा। इस दौरान BRICS देशों के शीर्ष नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत का अवसर मिलेगा। औपचारिक बैठकों के अलावा ऐसे आयोजन नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद और द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी अहम होते हैं।

दुनिया की नजर दिल्ली पर

18वें BRICS शिखर सम्मेलन के जरिए भारत वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक भूमिका को भी प्रदर्शित करेगा। अमेरिका और यूरोप के प्रभाव से इतर BRICS को एक वैकल्पिक वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मंच के रूप में देखा जाता है।

ऐसे में दिल्ली में मोदी, जिनपिंग और पुतिन समेत BRICS नेताओं की मौजूदगी सिर्फ एक शिखर बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का बड़ा संकेत भी मानी जा रही है। सम्मेलन में होने वाली बैठकों, नेताओं की द्विपक्षीय मुलाकातों और जारी होने वाले साझा बयानों पर दुनिया की निगाहें रहेंगी।