Sudarshan Today
मध्य प्रदेश

जनजाती सुरक्षा मंच के संयोजक डॉ.महेन्द्रसिंह काल्यासिंह चौहान

दामजीपुरा हरीश लालन राठौर

 

दामजीपुरा:- जनजाती सुरक्षा मंच के संयोजक डॉ.महेन्द्रसिंह काल्यासिंह चौहान ने बबैतुल:- जनजाती सुरक्षा मंच के संयोजक डॉ.महेन्द्रसिंह काल्यासिंह चौहान ने बताया की डीलिस्टिंग की मांग को लेकर हमारे द्वारा गांव गांव पहुंचकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है आज बैतुल ग्रामीण के ग्राम खमालपुर , खोखरा व अन्य क्षेत्रों में भी गांव गांव जाकर युवाओं व जनजातीय समाज के लोगों को जनजातीय महारैली में आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

28 मई को न्यु बैतुल ग्राउंड मे होने वाली जनजाती महासभा और जनजाती महारैली मे आने का किया आवहान ।

 

पिछले दिनों मध्यप्रदेश के धार जिले में हजारों की संख्या में एकत्रित हुए लोगों के द्वारा डीलिस्टिंग की मांग की गई। यह मांग मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में की जा रही है और यह मांग अभी से नहीं बल्कि लंबे समय सन 1967 से की जा रही है। डिलिस्टिंग का मतलब है उन लोगों को सूची से हटाना जो कभी अनुसूचित जनजाति समाज के हुआ करते थे और अब वे लोग अब धर्म परिवर्तन कर या तो ईसाई धर्म में या मुस्लिम धर्म में चले गए हैं और ऐसे लोग अभी भी जनजातीय समाज का आरक्षण या अन्य सुविधाएं ले रहे हैं ऐसे लोगों का जाती प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग। जनजाति सुरक्षा मंच ने 2009 में 28 लाख जनजातीय लोगों के हस्ताक्षर करवा कर डीलिस्टिंग की मांग उठाई थी और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को ज्ञापन सौंपा था। यह मांग अब पुनः 2020 में 288 जिलों में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया 14 राज्यो में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे गए और 7 राज्यो में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन लगातार उठ रही जनजातीय समाज की यह मांग को अभी तक नहीं सुनी गई है। लेकिन अब जनजातीय सुरक्षा मंच यह मांग को पुरजोर तरीके से उठा रहा है व राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई है ताकि डीलिस्टिंग की जा सकेताया की डीलिस्टिंग की मांग को लेकर हमारे द्वारा गांव गांव पहुंचकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है आज बैतुल ग्रामीण के ग्राम खमालपुर , खोखरा व अन्य क्षेत्रों में भी गांव गांव जाकर युवाओं व जनजातीय समाज के लोगों को जनजातीय महारैली में आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

28 मई को न्यु बैतुल ग्राउंड मे होने वाली जनजाती महासभा और जनजाती महारैली मे आने का किया आवहान ।

 

पिछले दिनों मध्यप्रदेश के धार जिले में हजारों की संख्या में एकत्रित हुए लोगों के द्वारा डीलिस्टिंग की मांग की गई। यह मांग मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर में की जा रही है और यह मांग अभी से नहीं बल्कि लंबे समय सन 1967 से की जा रही है। डिलिस्टिंग का मतलब है उन लोगों को सूची से हटाना जो कभी अनुसूचित जनजाति समाज के हुआ करते थे और अब वे लोग अब धर्म परिवर्तन कर या तो ईसाई धर्म में या मुस्लिम धर्म में चले गए हैं और ऐसे लोग अभी भी जनजातीय समाज का आरक्षण या अन्य सुविधाएं ले रहे हैं ऐसे लोगों का जाती प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग। जनजाति सुरक्षा मंच ने 2009 में 28 लाख जनजातीय लोगों के हस्ताक्षर करवा कर डीलिस्टिंग की मांग उठाई थी और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को ज्ञापन सौंपा था। यह मांग अब पुनः 2020 में 288 जिलों में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया 14 राज्यो में राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे गए और 7 राज्यो में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन लगातार उठ रही जनजातीय समाज की यह मांग को अभी तक नहीं सुनी गई है। लेकिन अब जनजातीय सुरक्षा मंच यह मांग को पुरजोर तरीके से उठा रहा है व राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की गई है ताकि डीलिस्टिंग की जा सके

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