ऋषभ पंत के भविष्य पर आकाश चोपड़ा का बड़ा बयान, चयन समिति ने बना लिया है मन

ऋषभ पंत के भविष्य पर आकाश चोपड़ा का बड़ा बयान, चयन समिति ने बना लिया है मन

Sudarshantoday ब्यूरो: भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने एक बड़ा दावा किया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले पंत की भूमिका और टीम में उनकी स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। चोपड़ा का मानना है कि चयनकर्ताओं ने पंत के भविष्य को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर ली है।

वनडे सीरीज का कार्यक्रम

भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली आगामी वनडे सीरीज का आगाज 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में होगा। इसके बाद दूसरा मुकाबला 30 सितंबर को गुवाहाटी में खेला जाएगा, जबकि सीरीज का निर्णायक तीसरा मैच 3 अक्टूबर को नई चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।

पंत की बदलती भूमिका पर आकाश चोपड़ा की राय

आकाश चोपड़ा ने पंत के लाल गेंद (टेस्ट) और सफेद गेंद (वनडे/टी20) क्रिकेट में अलग-अलग भूमिकाओं पर प्रकाश डाला है। उनका कहना है कि टीम प्रबंधन पंत को जिस तरह से इस्तेमाल कर रहा है, वह उनके भविष्य के रोडमैप को दर्शाता है।

पंत को जिस तरह से अलग-अलग प्रारूपों में अलग जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, उससे साफ है कि चयन समिति ने उनके बारे में अपना मन बना लिया है। टीम मैनेजमेंट उन्हें एक विशेष भूमिका में देखना चाहता है।

मुख्य बिंदु

  • वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज का पहला मैच 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में होगा।
  • आकाश चोपड़ा के अनुसार, पंत की भूमिका को लेकर टीम प्रबंधन का नजरिया स्पष्ट है।
  • पंत को टेस्ट और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अलग-अलग भूमिकाएं दी जा रही हैं।

पंत के लिए यह सीरीज खुद को साबित करने और टीम की योजनाओं में अपनी जगह पक्की करने का एक बड़ा अवसर है। क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि चयनकर्ताओं का यह ‘मन’ टीम के प्रदर्शन में कैसे बदलता है।

IIM जम्मू का विवादित फरमान: पीएम मोदी के जन्मदिन कार्यक्रम में न आने पर 500 रुपये का जुर्माना?

IIM जम्मू का विवादित फरमान: पीएम मोदी के जन्मदिन कार्यक्रम में न आने पर 500 रुपये का जुर्माना?

Sudarshantoday ब्यूरो: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जम्मू एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में शामिल न होने वाले छात्रों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस दावे के बाद शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक आयोजनों की अनिवार्यता को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर इस कथित नोटिस की एक प्रति साझा की है। आरोप है कि संस्थान प्रशासन ने छात्रों को अनिवार्य रूप से कार्यक्रम में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि जो छात्र इस कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे, उन्हें आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा।

छात्रों को शिक्षा के मंदिर में ज्ञान अर्जन के लिए भेजा जाता है, न कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम की अनिवार्य उपस्थिति के लिए। IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का इस तरह का फरमान न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह शैक्षणिक स्वतंत्रता का भी हनन है।

विपक्ष का हमला और संस्थान की चुप्पी

इस घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों का राजनीतिकरण किया जा रहा है। हालांकि, IIM जम्मू प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर वायरल नोटिस को लेकर सरकार को घेरा।
  • आरोप है कि पीएम मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थिति अनिवार्य थी।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई है।
  • शिक्षाविदों ने इस कदम को छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है।

फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और छात्र समुदाय में इसे लेकर काफी रोष देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या संस्थान प्रशासन इस पर कोई सफाई देता है या यह विवाद और तूल पकड़ता है।

CBFC में रिकी केज की एंट्री: 'बच्चों को बचाने का मतलब वयस्कों की फिल्मों को बदलना नहीं'

CBFC में रिकी केज की एंट्री: ‘बच्चों को बचाने का मतलब वयस्कों की फिल्मों को बदलना नहीं’

Sudarshantoday ब्यूरो: ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज ने हाल ही में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पुनर्गठित पैनल में अपनी नियुक्ति को एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया है। केज का मानना है कि सेंसरशिप का मतलब रचनात्मकता को दबाना नहीं, बल्कि दर्शकों को सही जानकारी देना है।

आयु-आधारित प्रमाणन पर जोर

रिकी केज ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता फिल्मों में अनावश्यक कटौती करने के बजाय ‘आयु-आधारित प्रमाणन’ (Age-based certification) को अधिक प्रभावी बनाना है। उनका तर्क है कि यदि कोई फिल्म वयस्कों के लिए बनी है, तो उसे उसी रूप में रहने देना चाहिए, बशर्ते दर्शकों को पहले से चेतावनी दी गई हो।

बच्चों को अनुचित सामग्री से बचाना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हम वयस्कों के लिए बनाई गई परिपक्व सिनेमा को ‘सैनिटाइज’ करना शुरू कर दें। हमें संतुलन बनाने की आवश्यकता है ताकि माता-पिता अपने बच्चों के लिए सही चुनाव कर सकें।

वैश्विक दृष्टिकोण का समावेश

केज का कहना है कि वे बोर्ड में अपने वैश्विक अनुभव, संगीत की समझ और कहानी कहने की कला का उपयोग करेंगे। उनका लक्ष्य भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना है, जहाँ कलात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच एक स्वस्थ तालमेल हो।

मुख्य बिंदु:

  • फिल्मों में अनावश्यक सेंसरशिप के बजाय बेहतर वर्गीकरण पर ध्यान।
  • माता-पिता को सशक्त बनाना ताकि वे बच्चों के लिए सही कंटेंट चुन सकें।
  • वैश्विक सिनेमाई मानकों और भारतीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन।
  • कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करना।

रिकी केज की यह नई भूमिका फिल्म जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। उम्मीद है कि उनके आने से सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और तार्किकता आएगी।

मलयालम सिनेमा का जलवा: 'हाफ' ने टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में रचा इतिहास

मलयालम सिनेमा का जलवा: ‘हाफ’ ने टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में रचा इतिहास

Sudarshantoday ब्यूरो: मलयालम सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए, फिल्म ‘हाफ’ ने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) के प्रतिष्ठित ‘मिडनाइट मैडनेस’ सेक्शन में अपनी जगह बनाकर इतिहास रच दिया है। यह पहली बार है जब किसी मलयालम फिल्म को इस श्रेणी में प्रदर्शित किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती धमक को दर्शाता है।

दर्शकों और समीक्षकों की मिली-जुली सराहना

फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान दर्शकों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही। फिल्म की कसी हुई पटकथा और इसके अनूठे विजुअल स्टाइल ने न केवल समीक्षकों को प्रभावित किया, बल्कि वहां मौजूद दर्शकों को भी अंत तक बांधे रखा। फिल्म के एक्शन सीक्वेंस और साउंड डिजाइन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जमकर तारीफ हो रही है।

कलाकारों ने साझा किए अनुभव

स्क्रीनिंग के बाद आयोजित एक विशेष प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A) में फिल्म के मुख्य कलाकार रंजीत सजीवन और ऐश्वर्या राज ने अपने किरदारों के साथ जुड़ी चुनौतियों और अनुभवों को साझा किया।

फिल्म की सफलता पर बात करते हुए कलाकारों ने कहा, ‘यह हमारे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। एक मलयालम फिल्म का टोरंटो जैसे बड़े मंच पर इस तरह से सराहा जाना पूरी टीम की कड़ी मेहनत का परिणाम है।’

फिल्म की मुख्य विशेषताएं

  • टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के मिडनाइट मैडनेस सेक्शन में शामिल होने वाली पहली मलयालम फिल्म।
  • फिल्म के एक्शन दृश्यों और साउंड डिजाइन को वैश्विक स्तर पर सराहा गया।
  • रंजीत सजीवन और ऐश्वर्या राज के अभिनय की विशेष प्रशंसा।

यह उपलब्धि न केवल फिल्म ‘हाफ’ के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि यह मलयालम फिल्म उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी है। वैश्विक दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने के बाद, अब इस फिल्म को लेकर भारत में भी उत्सुकता बढ़ गई है।

‘चुंबक’ में पारसी मां के किरदार पर दिलनाज ईरानी का खुलासा, बताया कैसे मिली भूमिका

‘चुंबक’ में पारसी मां के किरदार पर दिलनाज ईरानी का खुलासा, बताया कैसे मिली भूमिका

Sudarshantoday ब्यूरो: अभिनेत्री दिलनाज ईरानी इन दिनों नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘चुंबक’ में गुलशन तारापुरवाला की भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। एक ओवरबेयरिंग पारसी मां के रूप में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने इस किरदार को निभाने के अपने अनुभव और तैयारी के बारे में खुलकर बात की।

आतिश कपाड़िया ने खास दिलनाज के लिए लिखा किरदार

दिलनाज ने बताया कि फिल्म के निर्देशक आतिश कपाड़िया ने यह भूमिका विशेष रूप से उन्हें ध्यान में रखकर लिखी थी। अभिनेत्री ने याद करते हुए कहा कि ऑडिशन की तैयारी के लिए उन्होंने अपने ही अलमारी से पुराने कपड़े निकाले और उस लुक को अपनाया जो एक पारसी महिला के व्यक्तित्व को दर्शाता हो।

मेरे सह-कलाकार अनंत जोशी का मानना है कि इस फिल्म की शूटिंग के बाद मैं अब और भी ज्यादा ‘पारसी’ हो गई हूं। यह किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि इसमें बनावटीपन नहीं बल्कि वास्तविकता है।

क्यों झिझक रही थीं दिलनाज?

अभिनेत्री ने स्वीकार किया कि वह पहले पारसी किरदारों को निभाने से बचती थीं, क्योंकि अक्सर फिल्मों में उन्हें केवल एक ‘कैरीकेचर’ या मजाक का पात्र बनाकर पेश किया जाता था। हालांकि, ‘चुंबक’ की पटकथा ने उन्हें प्रभावित किया।

फिल्म की मुख्य विशेषताएं

  • पारसी परिवार के जीवन को एक नई और गहरी दृष्टि से पेश किया गया है।
  • किरदार में केवल हास्य नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की परतें हैं।
  • फिल्म में पारसी संस्कृति की विशिष्ट आदतों को बहुत ही खूबसूरती से बुना गया है।

दिलनाज का मानना है कि ‘चुंबक’ एक ऐसी कहानी है जो समुदायों के प्रति बनी पुरानी धारणाओं को तोड़ने का काम करती है और दर्शकों को एक प्रामाणिक अनुभव प्रदान करती है।

नानी के 'चोटी' वाले बयान पर छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

नानी के ‘चोटी’ वाले बयान पर छिड़ी बहस, सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

Sudarshantoday ब्यूरो: अपनी आगामी फिल्म ‘द पैराडाइज’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता नानी का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म में अपने किरदार ‘जडल’ के अनोखे लुक और लंबी चोटी को लेकर नानी ने एक ऐसा सुझाव दिया, जिसने दर्शकों और नेटिजन्स के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाओं को जन्म दे दिया है।

फिल्म प्रमोशन के दौरान का वाकया

प्रमोशन इवेंट के दौरान नानी ने न केवल अपने किरदार के लुक को फ्लॉन्ट किया, बल्कि मजाकिया अंदाज में महिलाओं को भी चोटी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बालों के रखरखाव और स्टाइलिंग को लेकर कुछ हल्की-फुल्की टिप्पणियां कीं, जिसे वहां मौजूद पत्रकारों ने काफी दिलचस्प माना। हालांकि, यह बातचीत जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लोगों की राय बंटी हुई नजर आई।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

जहाँ नानी के प्रशंसक इसे एक मजाकिया और सहज बातचीत के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने उनके बयान को लेकर अपनी असहमति जताई है। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग इस पर अपनी राय रख रहे हैं।

नानी ने कहा, ‘मेरा यह लुक सिर्फ एक स्टाइल नहीं, बल्कि एक पहचान है। मुझे लगता है कि महिलाओं को भी इस तरह के पारंपरिक और सुंदर हेयरस्टाइल को अपनाना चाहिए, यह न केवल सुविधाजनक है बल्कि आकर्षक भी लगता है।’

फिल्म ‘द पैराडाइज’ के बारे में

नानी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द पैराडाइज’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। फिल्म के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • फिल्म का शीर्षक: द पैराडाइज
  • रिलीज की तारीख: 24 सितंबर
  • नानी का किरदार: जडल (एक अनूठा और चुनौतीपूर्ण रोल)
  • फिल्म का जॉनर: ड्रामा और एंटरटेनमेंट

कुल मिलाकर, नानी का यह बयान फिल्म के प्रमोशन के लिए एक चर्चा का केंद्र बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या यह विवाद फिल्म की रिलीज पर कोई असर डालता है या फिर दर्शक इसे महज एक अभिनेता की शरारत मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

धोनी, कोहली या रोहित नहीं, पैट कमिंस ने इस भारतीय खिलाड़ी को माना सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी

धोनी, कोहली या रोहित नहीं, पैट कमिंस ने इस भारतीय खिलाड़ी को माना सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी

Sudarshantoday ब्यूरो: ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के कप्तान पैट कमिंस ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि भारतीय टीम के खिलाफ खेलते हुए उन्हें सबसे अधिक चुनौती किस बल्लेबाज से मिली। अक्सर चर्चाओं में विराट कोहली, रोहित शर्मा या एमएस धोनी का नाम होता है, लेकिन कमिंस ने एक ऐसे खिलाड़ी को चुना है जिसने अपनी रक्षात्मक तकनीक से ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए थे।

चेतेश्वर पुजारा: दीवार बनकर खड़े हुए बल्लेबाज

पैट कमिंस ने दिग्गज भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को अपना सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी करार दिया है। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान पुजारा का धैर्य और क्रीज पर टिके रहने की क्षमता ने न केवल कमिंस बल्कि पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम को परेशान किया था। कमिंस के अनुसार, पुजारा का विकेट लेना किसी भी गेंदबाज के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होती थी।

पुजारा का विकेट लेना हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रही है। उनका संयम और क्रीज पर डटे रहने का जज्बा उन्हें अन्य बल्लेबाजों से अलग बनाता है। बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के दौरान उन्होंने जिस तरह से हमारी गेंदबाजी का सामना किया, वह अविश्वसनीय था।

आंकड़े जो पुजारा की महानता बयां करते हैं

चेतेश्वर पुजारा ने अपने टेस्ट करियर में जो छाप छोड़ी है, वह आंकड़ों में साफ झलकती है। उन्होंने भारत के लिए 25 टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2,074 रन बनाए हैं। उनका औसत 49.38 का रहा है, जो उनकी निरंतरता को दर्शाता है।

अन्य दिग्गज खिलाड़ी भी कमिंस की सूची में

पैट कमिंस ने केवल पुजारा का ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अन्य दिग्गजों का भी जिक्र किया। उन्होंने ब्रेंडन मैकुलम, सईद अजमल, एलिस्टेयर कुक और एबी डिविलियर्स को भी उन खिलाड़ियों में गिना है जिन्होंने अपने करियर के दौरान उन्हें कड़ी चुनौती दी है।

  • चेतेश्वर पुजारा का टेस्ट औसत 49.38 रहा है।
  • कमिंस ने पुजारा की रक्षात्मक तकनीक को ‘अभेद्य’ बताया।
  • बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में पुजारा का प्रदर्शन निर्णायक साबित हुआ था।

कमिंस का यह बयान स्पष्ट करता है कि आधुनिक क्रिकेट में केवल आक्रामक शॉट ही नहीं, बल्कि धैर्य और तकनीक का भी अपना एक विशेष स्थान है। पुजारा की यह पहचान उन्हें क्रिकेट के इतिहास में एक ‘दीवार’ के रूप में हमेशा याद रखेगी।

सिंधिया पर लगातार टिप्पणी के बाद ममता मीना के पति पर FIR, सियासी हलकों में उठे सवाल

सिंधिया पर लगातार टिप्पणी के बाद ममता मीना के पति पर FIR, सियासी हलकों में उठे सवाल

गुना की राजनीति में फिर गरमाया मामला, रिटायर्ड IPS रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ जाति प्रमाणपत्र मामले में केस

योगेंद्र शर्मा ब्यूरो चीफ गुना

गुना/भोपाल। मध्य प्रदेश के गुना जिले की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चांचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना के पति और रिटायर्ड IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में FIR दर्ज की गई है। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने यह कार्रवाई की है। मामला वर्ष 1984 में जारी बताए जा रहे ST जाति प्रमाणपत्र और उसके आधार पर सरकारी सेवा में आरक्षण का लाभ लेने के आरोपों से जुड़ा है।

FIR दर्ज होने की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले दिनों चांचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुना दौरे के दौरान सामने आए कुछ वीडियो और घटनाक्रम को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। इसी वजह से राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई राजनीतिक संबंध है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में FIR को ममता मीना द्वारा सिंधिया पर की गई टिप्पणियों से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।

सिंधिया के गुना दौरे के दौरान दो घटनाओं पर हुई थी चर्चा

ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया गुना दौरे के दौरान दो घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में चर्चा का विषय बने।

पहली घटना श्रद्धांजलि सभा से जुड़ी थी, जहां सिंधिया के जूते उतारने को लेकर चर्चा हुई। दूसरी घटना खाद वितरण केंद्र से संबंधित थी, जहां उन्होंने किसानों से बातचीत की और खाद की उपलब्धता को लेकर उनकी समस्याएं सुनीं।

खाद वितरण केंद्र पर सिंधिया ने किसानों से बातचीत के दौरान अधिकारियों को भी निर्देश दिए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने खाद वितरण में किसानों को परेशानी नहीं होने देने की बात कही और अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।

ममता मीना ने उठाए थे सवाल

इन घटनाओं को लेकर चांचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना ने सिंधिया पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की थी। उनके बयानों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा हुई।

अब 18 सितंबर 2026 को उनके पति रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक बहस ने नया मोड़ ले लिया है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ममता मीना की टिप्पणियों और उनके पति के खिलाफ दर्ज FIR के बीच सीधे संबंध का कोई आधिकारिक प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।

क्या है रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ मामला?

पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा के अनुसार मामला कथित तौर पर ST जाति प्रमाणपत्र के इस्तेमाल से सरकारी सेवा में आरक्षण का लाभ लेने से संबंधित है।

जांच से जुड़े उपलब्ध विवरण के अनुसार रघुवीर सिंह मीना के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया था। बाद में शासन स्तर पर गठित अनुसूचित जनजाति संदेहास्पद जाति प्रमाणपत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने इस प्रमाणपत्र की जांच की और इसे अमान्य घोषित किया।

OBC से ST प्रमाणपत्र का आरोप, पुराने रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

पुलिस जांच में सामने आए रिकॉर्ड के आधार पर यह भी आरोप है कि पुलिस सेवा में आने से पहले रघुवीर सिंह मीना सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और उस दौरान उनके रिकॉर्ड में OBC वर्ग दर्ज था।

इसके बाद MPPSC के माध्यम से DSP पद पर नियुक्ति के समय ST प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि जाति वर्ग में यह बदलाव किस प्रक्रिया के तहत हुआ और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए थे।

2009 से चल रही थी जाति प्रमाणपत्र को लेकर जांच

मामला पूरी तरह नया नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2009 में तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (विजिलेंस) की ओर से रघुवीर सिंह मीना की जाति को लेकर शिकायत की गई थी। इसके बाद मामला उच्च स्तरीय छानबीन समिति तक पहुंचा।

रिपोर्टों के मुताबिक वर्ष 2016 में समिति की जांच में भी शिकायत को सही ठहराया गया था। अब पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ थाना सतर्कता, पुलिस मुख्यालय भोपाल में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B, 167 और 420 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(q) के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।

यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है।

रघुवीर सिंह मीना की राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि

रिपोर्टों के अनुसार रघुवीर सिंह मीना वर्ष 1986 में DSP के पद पर पुलिस सेवा में नियुक्त हुए थे और वर्ष 2002 में उन्हें IPS अवार्ड मिला। सेवानिवृत्ति के बाद वे गुना जिले की जिला पंचायत की राजनीति से भी जुड़े रहे हैं।

उनकी पत्नी ममता मीना वर्ष 2013 से 2018 तक चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रही हैं।

FIR और सिंधिया विवाद के बीच क्या कोई संबंध है?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे राजनीतिक सवाल बन गया है। ममता मीना द्वारा सिंधिया के गुना दौरे से जुड़े मामलों पर टिप्पणी किए जाने के बाद उनके पति के खिलाफ FIR सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं।

लेकिन उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों में FIR का आधार जाति प्रमाणपत्र से संबंधित पुरानी शिकायत, उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच और उसके निष्कर्ष बताए गए हैं। किसी उपलब्ध आधिकारिक बयान में यह नहीं कहा गया है कि FIR ममता मीना की सिंधिया पर की गई टिप्पणियों के कारण दर्ज की गई।

प्रशासन की ओर से क्या कहा गया?

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में प्रशासन की ओर से ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है, जिसमें इस FIR को ममता मीना द्वारा सिंधिया पर की गई राजनीतिक टिप्पणियों से जोड़कर देखा गया हो।

सतर्कता शाखा की कार्रवाई का आधिकारिक आधार जाति प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज और जांच समिति के निष्कर्ष बताए गए हैं। आगे की स्थिति पुलिस विवेचना और सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

गुना की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल

रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR के बाद गुना और चांचौड़ा की राजनीति में इस मामले को लेकर बयानबाजी बढ़ने की संभावना है। एक तरफ पुलिस इसे पुराने जाति प्रमाणपत्र और आरक्षण लाभ से जुड़ा कानूनी मामला बता रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक नजरिए से इसे ममता मीना और सिंधिया के बीच चल रही बयानबाजी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, संबंधित पक्षों के बयान और प्रशासन की ओर से आने वाली जानकारी से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

IES University Bhopal: आधुनिक शिक्षा, बहुविषयक पाठ्यक्रम और करियर-केंद्रित अवसरों का केंद्र

IES University Bhopal: भोपाल में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रही IES University

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित IES University उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फार्मेसी, कृषि, विज्ञान, प्रबंधन, नर्सिंग, शिक्षा, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और शोध स्तर के कार्यक्रम संचालित करने वाली बहुविषयक यूनिवर्सिटी के रूप में कार्य कर रही है। विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी जानकारी के अनुसार IES समूह वर्ष 1999 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

50 एकड़ से अधिक का हरित परिसर

IES University का भोपाल परिसर Ratibad Main Road क्षेत्र में स्थित है। विश्वविद्यालय अपनी वेबसाइट पर परिसर को 50+ एकड़ का हरा-भरा कैंपस बताता है, जबकि उसकी वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर जानकारी में 60 एकड़ के परिसर का उल्लेख है। विश्वविद्यालय के अनुसार परिसर में स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, खेल सुविधाएं, ऑडिटोरियम, स्वास्थ्य केंद्र, कैफेटेरिया और अन्य विद्यार्थी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय के अनुसार उसका परिसर IGBC Gold Certified Green Campus, AICTE Clean Campus Award से संबद्ध तथा मध्यप्रदेश का पहला Tobacco-Free Campus होने की उपलब्धियों से जुड़ा है।

2026-27 में कई प्रमुख पाठ्यक्रमों में प्रवेश

IES University की वेबसाइट पर Academic Session 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया उपलब्ध है। विश्वविद्यालय के अनुसार UG और PG कार्यक्रमों के लिए आवेदन किए जा सकते हैं तथा पाठ्यक्रम के अनुसार प्रवेश Entrance Test, Interview या Counseling के माध्यम से हो सकता है।

इंजीनियरिंग में आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम

2026-27 के लिए विश्वविद्यालय द्वारा सूचीबद्ध प्रमुख इंजीनियरिंग कार्यक्रमों में शामिल हैं—

B.Tech Computer Science & Engineering

B.Tech Artificial Intelligence & Machine Learning

B.Tech Cyber Security

B.Tech Civil Engineering

B.Tech Mechanical Engineering

B.Tech Electrical & Electronics Engineering

इसके अलावा M.Tech कार्यक्रम भी उपलब्ध हैं।

फार्मेसी, कृषि, विज्ञान और नर्सिंग

विश्वविद्यालय में B.Pharm, D.Pharm, B.Sc. (Hons.) Agriculture, B.Sc., B.Sc. Hospitality and Hotel Administration तथा B.Sc. Nursing जैसे कार्यक्रम भी सूचीबद्ध हैं। इसके साथ Post Basic Diploma Nursing और विभिन्न अन्य कार्यक्रम भी संचालित किए जाते हैं।

मैनेजमेंट, कॉमर्स और शिक्षा के विकल्प

Management और Commerce के क्षेत्र में BBA, B.Com, B.Com (Taxation), B.Com (Computer Application) और MBA जैसे पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। Education में B.Ed. और M.Ed. कार्यक्रम सूचीबद्ध हैं।

पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई

मीडिया और पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए भी विश्वविद्यालय में विकल्प मौजूद हैं। 2026-27 की सूची में BJMC (Mass Communication) तथा Master of Journalism and Mass Communication (MJMC) शामिल हैं।

डिप्लोमा और पैरामेडिकल कार्यक्रम

विश्वविद्यालय की 2026-27 सूची में Diploma in Computer Science & Engineering, Diploma in Electrical Engineering, Diploma in Hotel Management, DMLT, D.Pharm और Post Basic Diploma Nursing जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं।

शोध और Ph.D. के अवसर

IES University की प्रवेश संबंधी जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय UG और PG के अलावा research programmes तथा Ph.D. कार्यक्रम भी संचालित करता है। विश्वविद्यालय ने Engineering, Management, Science और Languages सहित विभिन्न क्षेत्रों में doctoral/research programmes की जानकारी दी है।

आधुनिक लाइब्रेरी और डिजिटल शिक्षा व्यवस्था

विश्वविद्यालय के अनुसार कैंपस में 15,000 से अधिक पुस्तकों और reference books वाली लाइब्रेरी, subscribed e-journals, computer labs, Wi-Fi तथा digital classrooms उपलब्ध हैं। स्मार्ट क्लासरूम में audio-visual teaching facilities और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

प्रयोगशालाएं और प्रैक्टिकल लर्निंग

IES University अपने विभिन्न academic programmes के लिए laboratories को महत्वपूर्ण academic infrastructure के रूप में प्रस्तुत करता है। विश्वविद्यालय के अनुसार विद्यार्थियों को theoretical education के साथ practical learning का अवसर देने के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं।

हॉस्टल, खेल और विद्यार्थी सुविधाएं

परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल, Wi-Fi, dining facilities, security और medical support जैसी सुविधाओं का उल्लेख विश्वविद्यालय की infrastructure जानकारी में किया गया है। इसके अलावा indoor और outdoor sports facilities, gymnasium तथा fitness zones भी उपलब्ध बताए गए हैं।

1000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम

विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार कैंपस में 1,000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला auditorium है, जिसका उपयोग seminars, workshops, cultural programmes और अन्य academic activities के लिए किया जाता है।

प्लेसमेंट और इंडस्ट्री कनेक्शन

IES University अपनी वेबसाइट पर 250+ recruiting companies, 120+ multiple-offer students, 85+ national/international university MOUs और 345+ Scopus/SCI research papers जैसे आंकड़े प्रदर्शित करती है। विश्वविद्यालय के अनुसार 2024-25 batch से संबंधित जानकारी में 143 कंपनियों, 120 multiple offers और 50+ patents का भी उल्लेख है। ये आंकड़े विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित संस्थागत दावे हैं।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2020 batch के लिए 46 कंपनियों द्वारा 516 job offers तथा highest package ₹13 लाख प्रति वर्ष का उल्लेख भी किया गया है। अलग-अलग batches और वर्षों के आंकड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए विद्यार्थी वर्तमान placement data के लिए विश्वविद्यालय से पुष्टि कर सकते हैं।

उपलब्धियों और अकादमिक गतिविधियों पर जोर

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर 150+ awards, 17,000+ students, 12,000+ alumni और 5,500+ placements जैसे institutional figures प्रदर्शित किए गए हैं। विश्वविद्यालय 8 NBA-accredited programmes, NIRF Pharmacy ranking और अन्य institutional recognitions का भी उल्लेख करता है।

2026-27 प्रवेश प्रक्रिया कैसे है?

IES University के अनुसार विद्यार्थी तीन माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं—

  1. विश्वविद्यालय की वेबसाइट से admission form डाउनलोड कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा करना।
  1. Online application form भरना।
  1. Admission Cell से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर जमा करना।

योग्यता की जांच के बाद संबंधित पाठ्यक्रम के अनुसार Entrance Test, Interview अथवा Counseling की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

फीस कितनी है?

IES University ने अपनी वेबसाइट पर Programme Fee के लिए अलग पेज उपलब्ध कराया है। विश्वविद्यालय के अनुसार फीस में programme के अनुसार tuition तथा अन्य academic components शामिल हो सकते हैं और कुछ मामलों में installment/payment-plan की सुविधा भी उपलब्ध है। Merit और financial need के आधार पर scholarships/financial aid की जानकारी भी विश्वविद्यालय ने दी है।

महत्वपूर्ण: वर्तमान वेबसाइट पर सभी पाठ्यक्रमों की पूरी राशि एक ही सार्वजनिक तालिका में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं हो रही है। इसलिए B.Tech, B.Pharm, MBA, Nursing, BJMC, MJMC आदि की 2026-27 की सटीक फीस admission से पहले विश्वविद्यालय के Admission Office से सत्यापित करना उचित रहेगा। विश्वविद्यालय स्वयं भी नवीनतम programme fee के लिए अपनी वेबसाइट/Admission Office से संपर्क करने की सलाह देता है।

फर्जी प्रवेश से सावधान रहने की अपील

IES University ने अपनी वेबसाइट पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए चेतावनी जारी की है कि विश्वविद्यालय की अनुमति के बिना कोई व्यक्ति, एजेंट या संस्था admission अथवा fee collection नहीं कर सकती। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों से admission एवं अन्य भुगतान केवल आधिकारिक माध्यमों से करने और किसी अनधिकृत व्यक्ति के निजी बैंक खाते, UPI या QR code में भुगतान न करने की सलाह दी है।

IES University Bhopal — संपर्क विवरण

विश्वविद्यालय का पता:
IES University Bhopal
Ratibad Main Road, Bhopal, Madhya Pradesh – 462044

Admission Helpline:
📞 +91 8516064444
📞 +91 9229251422
📞 +91 9229251478

WhatsApp:
📱 +91 9229251475

Academic Enquiry:
📞 +91 9229251460

Exam Enquiry:
📞 +91 9770972287

ई-मेल:
📧 contact@iesuniversity.ac.in
📧 admissions@iesuniversity.ac.in

वेबसाइट:
www.iesuniversity.ac.in

विश्वविद्यालय visiting hours सोमवार से शनिवार सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक हैं, जबकि lunch time 1:30 से 2:00 बजे तक है।

निष्कर्ष

IES University Bhopal का academic portfolio इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से लेकर फार्मेसी, कृषि, नर्सिंग, मैनेजमेंट, कॉमर्स, शिक्षा, पत्रकारिता एवं मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट तथा शोध कार्यक्रमों तक फैला हुआ है। 2026-27 के लिए विश्वविद्यालय ने विभिन्न UG, PG, Diploma और research programmes में admission information उपलब्ध कराई है। विद्यार्थियों के लिए campus infrastructure, laboratories, digital classrooms, library, hostel, sports, healthcare और placement-oriented activities इसकी प्रमुख संस्थागत विशेषताओं में शामिल हैं।

राधिका आप्टे का बड़ा बयान: '12 घंटे की शिफ्ट के बाद भी घर का काम महिलाओं की नियति क्यों?'

राधिका आप्टे का बड़ा बयान: ’12 घंटे की शिफ्ट के बाद भी घर का काम महिलाओं की नियति क्यों?’

Sudarshantoday ब्यूरो: बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री राधिका आप्टे ने हाल ही में महिलाओं के जीवन में संतुलन और उनके व्यक्तिगत समय को लेकर एक गंभीर चर्चा छेड़ दी है। ‘लस्ट स्टोरीज 3’ के संदर्भ में एक साक्षात्कार के दौरान, राधिका ने उस कड़वे सच को उजागर किया है जिसे अक्सर समाज अनदेखा कर देता है। उन्होंने कहा कि एक महिला जब 12 घंटे की कठिन शिफ्ट के बाद घर लौटती है, तो भी उसे आराम नहीं मिलता, बल्कि वह सीधे रसोई में खाना बनाने के काम में जुट जाती है।

मातृत्व ही पहचान नहीं

राधिका ने इस बात पर जोर दिया कि मातृत्व किसी भी महिला की एकमात्र पहचान नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज ने महिलाओं पर घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी का ऐसा बोझ डाल दिया है कि उनके पास खुद के लिए ‘जीरो टाइम’ बचता है।

महिलाओं को यह समझने की जरूरत है कि वे केवल एक मां या पत्नी नहीं हैं। जब तक घर की जिम्मेदारियों को साझा नहीं किया जाएगा, तब तक महिलाएं अपनी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने के लिए समय नहीं निकाल पाएंगी।

घरेलू काम का असमान बोझ

अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक पुरुष और महिलाएं घर के कामों को बराबरी से साझा नहीं करेंगे, तब तक यह असंतुलन बना रहेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो कि एक चिंताजनक स्थिति है।

मुख्य बिंदु:

  • महिलाओं पर घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी का बोझ।
  • मातृत्व को महिला की संपूर्ण पहचान बनाने की मानसिकता पर प्रहार।
  • घरेलू कार्यों में समान भागीदारी की सख्त जरूरत।
  • महिलाओं के लिए व्यक्तिगत समय और आत्म-विकास की वकालत।