ककराई में जिला स्तरीय कार्यक्रम, ग्रामीणों ने बताईं समस्याएं; कार्यक्रम की सूचना और मीडिया संवाद को लेकर उठे सवाल
शाडौरा/अशोकनगर। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत ग्राम पंचायत ककराई में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम अब प्रशासनिक व्यवस्थाओं और मीडिया से संवाद को लेकर सवालों के घेरे में है। कार्यक्रम में ग्वालियर संभाग आयुक्त मनोज खत्री, अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय, पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन के अनुसार शिविर में 238 आवेदन प्राप्त हुए और 63 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया।
लेकिन कार्यक्रम की प्रशासनिक उपलब्धियों से अलग, स्थानीय पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों ने एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है—जब अभियान का नाम ही ‘जन विश्वास’ है और प्रशासन जनता से संवाद की बात कर रहा है, तो पत्रकारों के सवालों का सामना करने में आखिर परेशानी क्या थी?
‘जन विश्वास’ के कार्यक्रम में मीडिया से संवाद क्यों नहीं?
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार ककराई में आयोजित कार्यक्रम की सूचना को लेकर पत्रकारों और ग्रामीणों के बीच असंतोष सामने आया। आरोप है कि कार्यक्रम की पर्याप्त जानकारी स्थानीय स्तर पर नहीं पहुंचाई गई।
कार्यक्रम में पहुंचे पत्रकारों ने जब संभाग आयुक्त मनोज खत्री और कलेक्टर साकेत मालवीय से कार्यक्रम की सूचना एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े सवाल पूछने का प्रयास किया, तो वे कथित तौर पर सवालों का जवाब दिए बिना अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए और वहां से रवाना हो गए।
यदि स्थानीय रिपोर्ट में लगाया गया यह आरोप सही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जनता के बीच जाकर विश्वास कायम करने वाले अभियान में मीडिया के सवालों से दूरी क्यों बनाई गई?
जनता के सवालों का जवाब जरूरी, पत्रकारों के सवालों का भी
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रशासन की अपनी जानकारी के अनुसार शिविरों का उद्देश्य आम जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण, सरकारी सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। अशोकनगर प्रशासन ने ककराई शिविर में भी आमजन की समस्याओं के निराकरण को अभियान का प्रमुख उद्देश्य बताया है।
ऐसे में सवाल यह है कि अगर प्रशासन जनता के सवाल सुनने के लिए शिविर लगा सकता है, तो जनता की समस्याओं को सामने लाने वाले पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए कुछ मिनट क्यों नहीं निकाले जा सकते?
कार्यक्रम खत्म होते ही ग्रामीणों ने घेरा रास्ता
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ग्राम रुसली की महिलाओं और ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने सड़क, विधवा पेंशन और प्रसूता सहायता राशि जैसी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से समाधान की मांग की।
यह स्थिति अपने आप में बताती है कि सरकारी योजनाओं और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच अभी भी नागरिकों की शिकायतें मौजूद हैं।
प्रशासन ने बताए ये आंकड़े
प्रशासनिक विवरण के अनुसार ककराई शिविर में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 152 हितग्राहियों को हितलाभ एवं शासकीय सेवाओं का लाभ दिया गया। इनमें आयुष्मान कार्ड, लाड़ली लक्ष्मी योजना, फौती नामांतरण, खसरे की नकल, प्रसूति सहायता, जन्म प्रमाण-पत्र और क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएं शामिल रहीं।
इसी दौरान 16 स्व-सहायता समूहों को ₹45 लाख की ऋण राशि उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
आंकड़े अपनी जगह, जवाबदेही अपनी जगह
शिविर में कितने आवेदन आए, कितनों का निराकरण हुआ और कितने हितग्राहियों को लाभ मिला—ये आंकड़े प्रशासन की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हैं। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक उपलब्धियों के साथ सवाल पूछने और जवाब मांगने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पत्रकार यदि कार्यक्रम की सूचना, ग्रामीणों की शिकायतों और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित सवाल पूछते हैं, तो उन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना ही संवाद की स्वस्थ प्रक्रिया है।
‘जन विश्वास’ सिर्फ मंच और आंकड़ों से नहीं बनता
जन विश्वास केवल एक सरकारी कार्यक्रम का नाम नहीं होना चाहिए। विश्वास तब मजबूत होता है, जब जनता अपनी समस्या लेकर अधिकारी के पास जाए और उसे जवाब मिले; जब पत्रकार सवाल पूछे तो उसे तथ्य मिलें; और जब प्रशासन की किसी व्यवस्था पर सवाल उठे तो अधिकारी अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखें।
ककराई की घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है—
“जब अभियान का उद्देश्य जनसंवाद है, तो पत्रकारों के सवालों से संवाद क्यों नहीं?”
प्रशासन से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्यक्रम की सूचना स्थानीय पत्रकारों और ग्रामीणों तक किस माध्यम से पहुंचाई गई, मीडिया को कार्यक्रम की जानकारी देने की जिम्मेदारी किस विभाग की थी और पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों पर अधिकारियों की वास्तविक प्रतिक्रिया क्या थी।
जन विश्वास का रास्ता सवालों को रोककर नहीं, सवालों का जवाब देकर मजबूत होता है।

















