अशोकनगर में ‘जन विश्वास’ अभियान पर सवाल: पत्रकारों के सवालों से क्यों बचते नजर आए अधिकारी?

अशोकनगर में ‘जन विश्वास’ अभियान पर सवाल: पत्रकारों के सवालों से क्यों बचते नजर आए अधिकारी?

ककराई में जिला स्तरीय कार्यक्रम, ग्रामीणों ने बताईं समस्याएं; कार्यक्रम की सूचना और मीडिया संवाद को लेकर उठे सवाल

शाडौरा/अशोकनगर। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत ग्राम पंचायत ककराई में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम अब प्रशासनिक व्यवस्थाओं और मीडिया से संवाद को लेकर सवालों के घेरे में है। कार्यक्रम में ग्वालियर संभाग आयुक्त मनोज खत्री, अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय, पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन के अनुसार शिविर में 238 आवेदन प्राप्त हुए और 63 आवेदनों का मौके पर निराकरण किया गया।

लेकिन कार्यक्रम की प्रशासनिक उपलब्धियों से अलग, स्थानीय पत्रकारों द्वारा उठाए गए सवालों ने एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है—जब अभियान का नाम ही ‘जन विश्वास’ है और प्रशासन जनता से संवाद की बात कर रहा है, तो पत्रकारों के सवालों का सामना करने में आखिर परेशानी क्या थी?
‘जन विश्वास’ के कार्यक्रम में मीडिया से संवाद क्यों नहीं?
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार ककराई में आयोजित कार्यक्रम की सूचना को लेकर पत्रकारों और ग्रामीणों के बीच असंतोष सामने आया। आरोप है कि कार्यक्रम की पर्याप्त जानकारी स्थानीय स्तर पर नहीं पहुंचाई गई।
कार्यक्रम में पहुंचे पत्रकारों ने जब संभाग आयुक्त मनोज खत्री और कलेक्टर साकेत मालवीय से कार्यक्रम की सूचना एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े सवाल पूछने का प्रयास किया, तो वे कथित तौर पर सवालों का जवाब दिए बिना अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए और वहां से रवाना हो गए।
यदि स्थानीय रिपोर्ट में लगाया गया यह आरोप सही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जनता के बीच जाकर विश्वास कायम करने वाले अभियान में मीडिया के सवालों से दूरी क्यों बनाई गई?
जनता के सवालों का जवाब जरूरी, पत्रकारों के सवालों का भी
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रशासन की अपनी जानकारी के अनुसार शिविरों का उद्देश्य आम जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण, सरकारी सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। अशोकनगर प्रशासन ने ककराई शिविर में भी आमजन की समस्याओं के निराकरण को अभियान का प्रमुख उद्देश्य बताया है।

ऐसे में सवाल यह है कि अगर प्रशासन जनता के सवाल सुनने के लिए शिविर लगा सकता है, तो जनता की समस्याओं को सामने लाने वाले पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए कुछ मिनट क्यों नहीं निकाले जा सकते?
कार्यक्रम खत्म होते ही ग्रामीणों ने घेरा रास्ता
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम समाप्त होने के बाद ग्राम रुसली की महिलाओं और ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने सड़क, विधवा पेंशन और प्रसूता सहायता राशि जैसी समस्याओं को लेकर अधिकारियों से समाधान की मांग की।
यह स्थिति अपने आप में बताती है कि सरकारी योजनाओं और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच अभी भी नागरिकों की शिकायतें मौजूद हैं।
प्रशासन ने बताए ये आंकड़े
प्रशासनिक विवरण के अनुसार ककराई शिविर में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 152 हितग्राहियों को हितलाभ एवं शासकीय सेवाओं का लाभ दिया गया। इनमें आयुष्मान कार्ड, लाड़ली लक्ष्मी योजना, फौती नामांतरण, खसरे की नकल, प्रसूति सहायता, जन्म प्रमाण-पत्र और क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएं शामिल रहीं।

इसी दौरान 16 स्व-सहायता समूहों को ₹45 लाख की ऋण राशि उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।

आंकड़े अपनी जगह, जवाबदेही अपनी जगह
शिविर में कितने आवेदन आए, कितनों का निराकरण हुआ और कितने हितग्राहियों को लाभ मिला—ये आंकड़े प्रशासन की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हैं। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक उपलब्धियों के साथ सवाल पूछने और जवाब मांगने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
पत्रकार यदि कार्यक्रम की सूचना, ग्रामीणों की शिकायतों और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित सवाल पूछते हैं, तो उन सवालों का तथ्यात्मक जवाब देना ही संवाद की स्वस्थ प्रक्रिया है।
‘जन विश्वास’ सिर्फ मंच और आंकड़ों से नहीं बनता
जन विश्वास केवल एक सरकारी कार्यक्रम का नाम नहीं होना चाहिए। विश्वास तब मजबूत होता है, जब जनता अपनी समस्या लेकर अधिकारी के पास जाए और उसे जवाब मिले; जब पत्रकार सवाल पूछे तो उसे तथ्य मिलें; और जब प्रशासन की किसी व्यवस्था पर सवाल उठे तो अधिकारी अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखें।
ककराई की घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है—
“जब अभियान का उद्देश्य जनसंवाद है, तो पत्रकारों के सवालों से संवाद क्यों नहीं?”
प्रशासन से यह स्पष्ट होना चाहिए कि कार्यक्रम की सूचना स्थानीय पत्रकारों और ग्रामीणों तक किस माध्यम से पहुंचाई गई, मीडिया को कार्यक्रम की जानकारी देने की जिम्मेदारी किस विभाग की थी और पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों पर अधिकारियों की वास्तविक प्रतिक्रिया क्या थी।
जन विश्वास का रास्ता सवालों को रोककर नहीं, सवालों का जवाब देकर मजबूत होता है।

साइकिल पर दुनिया की सैर: 196 देशों का सफर तय करने वाले हेंज स्टुके की अद्भुत कहानी

साइकिल पर दुनिया की सैर: 196 देशों का सफर तय करने वाले हेंज स्टुके की अद्भुत कहानी

Sudarshantoday ब्यूरो: साल 1962 की बात है, जब जर्मनी के एक युवा टूलमेकर हेंज स्टुके ने अपनी साइकिल उठाई और दुनिया देखने के लिए निकल पड़े। जेब में न के बराबर पैसे और आंखों में पूरी दुनिया नापने का सपना लिए शुरू हुआ यह सफर महज एक यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास का एक अनूठा अध्याय बन गया। अगले 52 वर्षों तक स्टुके ने न केवल सड़कों को नापा, बल्कि मानव सभ्यता के विभिन्न रंगों को भी करीब से देखा।

साइकिल पर 4 लाख मील का सफर

हेंज स्टुके ने अपनी इस महायात्रा के दौरान लगभग 4,03,000 मील (करीब 6.48 लाख किलोमीटर) की दूरी तय की। इस दौरान उन्होंने कुल 196 देशों की सीमाओं को पार किया। उनकी यह यात्रा केवल साइकिल चलाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह दुनिया भर की संस्कृतियों, भौगोलिक विविधताओं और लोगों के जीवन को समझने का एक माध्यम बन गई थी।

जीविकोपार्जन का अनोखा तरीका

इतने लंबे समय तक बिना किसी बड़ी आर्थिक मदद के दुनिया घूमना आसान नहीं था। स्टुके ने अपनी यात्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी फोटोग्राफी और पोस्टकार्ड्स का सहारा लिया। वे जहां भी जाते, वहां की तस्वीरें खींचते और उन्हें बेचकर अपनी अगली मंजिल का रास्ता तय करते। उनकी इस लगन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी मान्यता दी है, जो उनकी यात्रा की व्यापकता और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।

साइकिल चलाना मेरे लिए केवल एक शौक नहीं था, यह एक जीवन जीने का तरीका बन गया था। मैंने दुनिया को उस नजरिए से देखा जो शायद ही किसी और ने देखा हो। – हेंज स्टुके

प्रमुख उपलब्धियां और सीख

  • 1962 में शुरू हुई यात्रा 52 वर्षों तक अनवरत चलती रही।
  • कुल 196 देशों की यात्रा कर एक वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया।
  • 4,03,000 मील की दूरी तय कर साइकिलिंग के इतिहास में नाम दर्ज कराया।
  • फोटोग्राफी के माध्यम से यात्रा का खर्च जुटाकर आत्मनिर्भरता का उदाहरण पेश किया।

हेंज स्टुके का यह सफर आज भी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो दुनिया को अपनी शर्तों पर देखना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधन कम होने के बावजूद भी बड़ी से बड़ी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

दीपिका-रणवीर का आलीशान आशियाना: 100 करोड़ के बांद्रा क्वाड्रप्लेक्स की झलक

दीपिका-रणवीर का आलीशान आशियाना: 100 करोड़ के बांद्रा क्वाड्रप्लेक्स की झलक

Sudarshantoday ब्यूरो: बॉलीवुड के पावर कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर हाल ही में नन्ही किलकारियां गूंजी हैं। अपनी दूसरी बेटी के स्वागत के साथ ही यह जोड़ा अपने जीवन के एक नए और बेहद खूबसूरत अध्याय की शुरुआत कर रहा है। माता-पिता के रूप में अपनी नई भूमिका को एन्जॉय कर रहे इस कपल के आलीशान लाइफस्टाइल और उनके सपनों के घर की चर्चा अक्सर सोशल मीडिया पर होती रहती है।

बांद्रा का आलीशान क्वाड्रप्लेक्स

दीपिका और रणवीर का बांद्रा स्थित सी-फेसिंग क्वाड्रप्लेक्स किसी महल से कम नहीं है। खबरों के अनुसार, इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जाती है। यह घर न केवल अपनी लोकेशन के लिए मशहूर है, बल्कि इसके इंटीरियर और लग्जरी सुविधाओं ने भी सभी का ध्यान खींचा है। अरब सागर के किनारे स्थित यह घर शांति और भव्यता का एक बेहतरीन संगम है।

प्रभादेवी का आशियाना

बांद्रा के अलावा, दीपिका पादुकोण का प्रभादेवी स्थित घर भी काफी चर्चा में रहता है। शादी के बाद से ही यह घर उनके लिए बेहद खास रहा है। यहाँ के इंटीरियर में क्लासिक और मॉडर्न डिजाइन का तालमेल देखने को मिलता है।

घर की प्रमुख विशेषताएं:

  • अरब सागर का शानदार और अबाधित नजारा।
  • आधुनिक और सोफिस्टिकेटेड इंटीरियर डिजाइन।
  • प्राइवेसी और सुरक्षा के लिए हाई-टेक इंतजाम।
  • विशाल बालकनी और ओपन स्पेस।

एक इंटरव्यू के दौरान रणवीर सिंह ने अपने घर के महत्व पर बात करते हुए कहा था कि, ‘मेरे लिए घर का मतलब वह जगह है जहाँ मैं अपनी पत्नी और परिवार के साथ सुकून के पल बिता सकूं। यह जगह हमारे लिए सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि हमारी यादों का संग्रह है।’

निश्चित रूप से, अपनी दूसरी बेटी के आने के बाद, यह आलीशान घर अब और भी अधिक खुशियों और नई यादों से भरने वाला है। फैंस इस कपल के लिए लगातार अपनी शुभकामनाएं भेज रहे हैं।

थ्रिफ्ट सोसायटी की वार्षिक आमसभा में सदस्यों के हित में कई अहम फैसले

थ्रिफ्ट सोसायटी की वार्षिक आमसभा में सदस्यों के हित में कई अहम फैसले

ऋण की ब्याज दर घटकर 8.60 प्रतिशत, लाभांश बढ़कर 17 प्रतिशत; धनतेरस पर करीब ₹2.12 करोड़ का होगा वितरण

भोपाल, 20 सितंबर 2026। BHEE Thrift & Credit Co-operative Society Ltd., BHEL भोपाल की वार्षिक आमसभा का आयोजन रविवार को थ्रिफ्ट सोसायटी परिसर में किया गया। आमसभा में करीब 2000 सदस्यों की मौजूदगी रही। बैठक के दौरान सदस्यों के आर्थिक हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी गई, जिनमें ऋण की ब्याज दर में कमी और लाभांश में वृद्धि प्रमुख रही।

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

वार्षिक आमसभा की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुई। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती किरण ने किया। इसके बाद सोसायटी के अध्यक्ष श्री बंसत कुमार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्था की गतिविधियों और सदस्यों के हित में प्रस्तावित निर्णयों की जानकारी साझा की।

ऋण पर ब्याज दर अब 8.60 प्रतिशत

आमसभा में अध्यक्ष श्री बंसत कुमार ने सदस्यों के लिए ऋण संबंधी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि सोसायटी की ऋण ब्याज दर में 0.15 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इसके बाद ऋण की ब्याज दर 8.60 प्रतिशत रह जाएगी।

नई ब्याज दर 1 अक्टूबर 2026 से लागू की जाएगी। यह सुविधा नए ऋण लेने वाले सदस्यों के साथ-साथ वर्तमान ऋणधारक सदस्यों को भी उपलब्ध होगी। घोषणा के बाद सदस्यों ने निर्णय का स्वागत किया।

लाभांश में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी

आमसभा में सदस्यों के लिए लाभांश से संबंधित भी महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया। सोसायटी की ओर से लाभांश में 1 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद सदस्यों को 17 प्रतिशत लाभांश प्रदान किया जाएगा।

धनतेरस पर ₹2.12 करोड़ के करीब लाभांश वितरण

सोसायटी प्रबंधन के अनुसार इस वर्ष धनतेरस के अवसर पर सदस्यों के बीच लगभग ₹2 करोड़ 12 लाख की राशि लाभांश के रूप में वितरित की जाएगी। इस घोषणा को आमसभा में मौजूद सदस्यों के लिए प्रमुख आर्थिक निर्णयों में से एक बताया गया।

सदस्यों और परिवार की प्रतिभाओं को मिलेगा सम्मान

अध्यक्ष श्री बंसत कुमार ने आने वाले समय में प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित करने की भी घोषणा की। समारोह में सोसायटी के सदस्यों तथा उनके परिवारों की विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते हुए सम्मानित किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अगले वर्ष भी सोसायटी के सदस्यों के लिए उपहार उपलब्ध कराने की योजना जारी रखी जाएगी।

सभी प्रस्तावों को सदस्यों की मंजूरी

वार्षिक आमसभा में निर्धारित एजेंडों और प्रस्तावों को सदस्यों के समक्ष रखा गया। अध्यक्ष ने प्रत्येक विषय की जानकारी देते हुए सदस्यों की जिज्ञासाओं और प्रश्नों के जवाब भी दिए। बैठक में प्रस्तुत सभी एजेंडों को सदस्यों ने समर्थन देते हुए पारित किया।

संचालक मंडल के कार्यों की सदस्यों ने की सराहना

करीब 2000 सदस्यों की मौजूदगी में हुई आमसभा के दौरान सोसायटी की गतिविधियों और संचालक मंडल द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर सदस्यों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। बैठक में संस्था की सदस्य हितैषी गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

संचालक मंडल के सदस्य रहे मौजूद

आमसभा में सोसायटी के उपाध्यक्ष श्री राजेश शुक्ला सहित संचालक मंडल के सदस्य श्री कमलेश नागपुरे, श्री निशांत कुमार नंदा, श्री राजकुमार इडपाची, श्री दीपक गुप्ता, श्रीमती किरण, श्रीमती निशा वर्मा, श्री आशीष सोनी, श्री राजमल बैरागी एवं श्री राजनिकांत चौबे उपस्थित रहे।

आभार प्रदर्शन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में श्री दीपक गुप्ता ने अतिथियों, सदस्यों और संचालक मंडल के सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आमसभा में उपस्थित सभी लोगों को धन्यवाद दिया।

सदस्यों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने पर जोर

अध्यक्ष श्री बंसत कुमार ने कहा कि सोसायटी का उद्देश्य सदस्यों के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऋण ब्याज दर में कमी, लाभांश में वृद्धि और आगामी सदस्य हितैषी योजनाएं इसी उद्देश्य के तहत किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा हैं।

महाराष्ट्र की बेटी नीला विखे पाटिल ने स्वीडन में रचा इतिहास, संसद के लिए चुनी गईं

महाराष्ट्र की बेटी नीला विखे पाटिल ने स्वीडन में रचा इतिहास, संसद के लिए चुनी गईं

Sudarshantoday ब्यूरो: महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित विखे पाटिल राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली नीला विखे पाटिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। नीला विखे पाटिल को स्वीडन की संसद में निर्वाचित किया गया है, जहाँ उन्होंने स्टॉकहोम सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

राजनीतिक विरासत और नई पहचान

नीला विखे पाटिल प्रसिद्ध शिक्षाविद और समाजसेवी अशोक विखे पाटिल की बेटी हैं। महाराष्ट्र में विखे पाटिल परिवार का दशकों पुराना राजनीतिक और सामाजिक योगदान रहा है, जिसे आगे बढ़ाते हुए नीला ने अब स्वीडन की धरती पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह स्वीडन की ‘ग्रीन पार्टी’ (Environmental Party) से जुड़ी हैं और लंबे समय से वहां की स्थानीय राजनीति में सक्रिय थीं।

प्रमुख प्राथमिकताएं और विजन

अपनी जीत के बाद नीला ने कहा कि उनका ध्यान स्वीडन के नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने पर होगा। उनके मुख्य एजेंडे में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कदम।
  • बच्चों का कल्याण और शिक्षा के स्तर में सुधार।
  • स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • आवास और किफायती वित्त व्यवस्था को मजबूत करना।
  • सामाजिक न्याय और समानता के लिए कार्य करना।

नीला विखे पाटिल की जीत केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन भारतीय मूल के लोगों के लिए प्रेरणा है जो विदेशों में अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से मुख्यधारा की राजनीति में अपनी जगह बना रहे हैं।

स्वीडन की राजनीति में बढ़ता प्रभाव

स्वीडन की संसद में उनका चुनाव इस बात का प्रमाण है कि प्रवासी भारतीय अब वैश्विक स्तर पर नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नीला का अनुभव और उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता उन्हें स्वीडन की संसद में एक प्रभावशाली आवाज बनाती है। उनके समर्थकों का मानना है कि वह न केवल स्टॉकहोम के मुद्दों को संसद में उठाएंगी, बल्कि एक समावेशी समाज के निर्माण में भी अहम योगदान देंगी।

विजय सेतुपति की ये 5 फिल्में 'बत्था' से पहले जरूर देखें, अदाकारी के कायल हो जाएंगे

विजय सेतुपति की ये 5 फिल्में ‘बत्था’ से पहले जरूर देखें, अदाकारी के कायल हो जाएंगे

Sudarshantoday ब्यूरो: तमिल सिनेमा के ‘मक्कल सेलवन’ यानी विजय सेतुपति अपनी अनूठी अभिनय शैली और किरदारों में जान फूंकने की कला के लिए जाने जाते हैं। अपनी आगामी फिल्म ‘बत्था’ की रिलीज के लिए तैयार अभिनेता ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दी हैं। यदि आप उनके अभिनय के प्रशंसक हैं या ‘बत्था’ के लिए उत्साहित हैं, तो उनकी ये 5 क्लासिक फिल्में आपको जरूर देखनी चाहिए।

1. विक्रम वेधा (Vikram Vedha)

इस फिल्म में विजय सेतुपति ने ‘वेधा’ का किरदार निभाया है, जो एक गैंगस्टर है। आर. माधवन के साथ उनकी जुगलबंदी और संवाद अदायगी ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक बना दिया। यह फिल्म उनके करियर का एक मील का पत्थर मानी जाती है।

2. सुपर डीलक्स (Super Deluxe)

विजय सेतुपति ने इस फिल्म में ‘शिल्पा’ का किरदार निभाकर सबको चौंका दिया था। एक ट्रांसजेंडर महिला की भूमिका में उनका भावनात्मक और संवेदनशील अभिनय आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।

3. 96 (96)

रोमांटिक ड्रामा फिल्म ’96’ में राम के किरदार में विजय सेतुपति ने जो सादगी दिखाई, वह बेमिसाल है। तृषा कृष्णन के साथ उनकी केमिस्ट्री ने दर्शकों को भावुक कर दिया था। यह फिल्म साबित करती है कि वे केवल एक्शन ही नहीं, बल्कि भावनाओं को भी गहराई से पर्दे पर उतार सकते हैं।

4. सूधु कव्वुम (Soodhu Kavvum)

ब्लैक कॉमेडी शैली की इस फिल्म में विजय सेतुपति ने एक मध्यम आयु वर्ग के अपहरणकर्ता की भूमिका निभाई है। फिल्म का हास्य और उनका अभिनय का अंदाज इसे बार-बार देखने लायक बनाता है।

5. पिज्जा (Pizza)

यह फिल्म विजय सेतुपति के करियर की शुरुआती सफलताओं में से एक है। एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म में उन्होंने जिस तरह से डर और सस्पेंस को पर्दे पर जिया है, वह काबिले तारीफ है।

विजय सेतुपति का हर किरदार एक अलग कहानी कहता है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक बनाती है।

प्रमुख बातें:

  • विजय सेतुपति ने अपने करियर में प्रयोगधर्मी भूमिकाएं चुनी हैं।
  • ‘बत्था’ के रिलीज से पहले उनकी पुरानी फिल्में उनके अभिनय के सफर को समझने में मदद करेंगी।
  • उनकी हर फिल्म में एक अलग तरह की ऊर्जा और गहराई देखने को मिलती है।
Hanuman Ansh Box Office: 315 करोड़ के करीब पहुंची फिल्म, रचा नया इतिहास

Hanuman Ansh Box Office: 315 करोड़ के करीब पहुंची फिल्म, रचा नया इतिहास

Sudarshantoday ब्यूरो: शोभानाथ सत्य की फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता की एक ऐसी इबारत लिखी है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। महज दो करोड़ रुपये के मामूली बजट में बनी यह फिल्म अब एक ब्लॉकबस्टर के रूप में स्थापित हो चुकी है। अपनी रिलीज के 45वें दिन भी फिल्म का जलवा बरकरार है और यह लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।

बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ का दबदबा

फिल्म ने अपनी रिलीज के 45वें दिन 2.73 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन दर्ज किया है, जो इस स्तर पर किसी भी फिल्म के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस आंकड़े के साथ ही फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 308.03 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि आज फिल्म का आंकड़ा 315 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा।

रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

इस फिल्म ने न केवल दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि कमाई के मामले में ‘मिर्जापुर’ और ‘वाइब’ जैसी चर्चित प्रस्तुतियों को भी पीछे छोड़ दिया है। फिल्म की सफलता के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • बजट बनाम कमाई: मात्र 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म का 315 करोड़ के करीब पहुंचना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
  • लगातार प्रदर्शन: 45 दिनों के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की पकड़ मजबूत बनी हुई है।
  • प्रतिस्पर्धा: ‘मिर्जापुर’ और ‘वाइब’ जैसी फिल्मों को पछाड़कर यह साल की सबसे बड़ी सरप्राइज हिट बन गई है।

फिल्म की सफलता का श्रेय इसकी कहानी और दर्शकों के साथ इसके जुड़ाव को जाता है। इतने कम बजट में ऐसी भव्यता और प्रभाव पैदा करना भारतीय सिनेमा के लिए एक नया उदाहरण है।

फिल्म समीक्षकों का कहना है कि ‘हनुमान अंश’ ने यह साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट दमदार हो, तो बजट की सीमाएं सफलता के आड़े नहीं आतीं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह फिल्म अपने लाइफटाइम कलेक्शन में और कितने बड़े आंकड़े जोड़ती है।

एशियाई खेलों में शेफाली वर्मा का ऐतिहासिक शतक, भारत के लिए रचा नया कीर्तिमान

एशियाई खेलों में शेफाली वर्मा का ऐतिहासिक शतक, भारत के लिए रचा नया कीर्तिमान

Sudarshantoday ब्यूरो: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विस्फोटक ओपनर शेफाली वर्मा ने एशियाई खेलों 2026 के सेमीफाइनल मुकाबले में बांग्लादेश के खिलाफ एक ऐसी पारी खेली, जिसे क्रिकेट इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। शेफाली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतक जड़ा और एशियाई खेलों में शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है।

विस्फोटक बल्लेबाजी से बांग्लादेशी गेंदबाजों की उड़ी धज्जियां

शेफाली वर्मा ने अपनी पारी के दौरान मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। उनकी इस आक्रामक पारी में 9 गगनचुंबी छक्के और 3 शानदार चौके शामिल थे। उनकी इस बल्लेबाजी की बदौलत भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 195/4 का विशाल स्कोर खड़ा किया। शेफाली की टाइमिंग और पावर-हिटिंग ने विपक्षी टीम को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया था।

रिकॉर्ड्स की झड़ी

इस ऐतिहासिक पारी के साथ ही शेफाली ने कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं। वे अब भारतीय महिला टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उनकी यह पारी न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि स्वर्ण पदक की दिशा में भारत की दावेदारी को और मजबूत करती है।

शेफाली की यह पारी न केवल तकनीकी रूप से परिपक्व थी, बल्कि दबाव में खेलने की उनकी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन था। उन्होंने जिस तरह से स्पिन और पेस दोनों को संभाला, वह विश्व स्तरीय है।

स्वर्ण पदक की ओर भारत के कदम

  • शेफाली वर्मा एशियाई खेलों में शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनीं।
  • पारी में 9 छक्के और 3 चौके जड़कर विपक्षी गेंदबाजों को किया पस्त।
  • भारत ने सेमीफाइनल में 195 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।
  • शेफाली बनीं भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में सर्वाधिक छक्के लगाने वाली खिलाड़ी।

शेफाली की इस फॉर्म को देखते हुए अब भारतीय फैंस को उम्मीद है कि टीम इंडिया फाइनल में भी इसी लय को बरकरार रखेगी और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक का सपना साकार करेगी।

एशियाई खेलों से वरुण सान्याल बाहर: वजन घटाने के दौरान बिगड़ी तबीयत

एशियाई खेलों से वरुण सान्याल बाहर: वजन घटाने के दौरान बिगड़ी तबीयत

Sudarshantoday ब्यूरो: एशियाई खेलों में भारतीय दल को उस समय बड़ा झटका लगा जब एमएमए (मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स) के होनहार खिलाड़ी वरुण सान्याल को स्वास्थ्य कारणों से प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे वरुण को वजन घटाने की प्रक्रिया के दौरान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

वजन घटाने के दौरान आई समस्या

रिपोर्ट्स के अनुसार, वरुण सान्याल अपनी निर्धारित भार श्रेणी में आने के लिए ‘वेट कट’ प्रक्रिया से गुजर रहे थे। इसी दौरान सौना सत्र (sauna session) में उन्हें चक्कर आने और मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन (muscle cramps) की समस्या हुई। मेडिकल टीम ने तुरंत उनकी जांच की और उन्हें प्रतियोगिता के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त (medically unfit) घोषित कर दिया।

टीम इंडिया के लिए मिला-जुला परिणाम

वरुण के बाहर होने से भारतीय खेमे में निराशा है, लेकिन इसी बीच टीम की अन्य सदस्य सुचिका तारियाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने इवेंट में आगे बढ़ने के साथ-साथ पदक भी सुनिश्चित किया है। एमएमए का एशियाई खेलों में यह पदार्पण संस्करण है, और भारतीय एथलीटों के लिए यह अनुभव चुनौतियों भरा रहा है।

प्रमुख बिंदु

  • वरुण सान्याल को वेट कट के दौरान चक्कर और क्रैम्प्स की समस्या हुई।
  • मेडिकल बोर्ड ने खिलाड़ी को अनफिट घोषित कर प्रतियोगिता से बाहर किया।
  • सुचिका तारियाल ने पदक जीतकर भारतीय उम्मीदों को कायम रखा।
  • एशियाई खेलों में एमएमए का पहली बार आयोजन हो रहा है।

एथलीटों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वरुण के मामले में मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन्हें आराम की सलाह दी गई है।

एड शीरन का फिलिस्तीन-इजरायल विवाद पर बड़ा बयान, कॉन्सर्ट में मची हलचल

एड शीरन का फिलिस्तीन-इजरायल विवाद पर बड़ा बयान, कॉन्सर्ट में मची हलचल

Sudarshantoday ब्यूरो: मशहूर ब्रिटिश गायक एड शीरन ने फिलाडेल्फिया में अपने हालिया कॉन्सर्ट के दौरान मैकलमोर विवाद और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। इस दौरान उन्होंने न केवल अपनी गलतियों को स्वीकार किया, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवीय संकट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर बात की।

कॉन्सर्ट के दौरान क्या बोले एड शीरन?

एड शीरन ने मंच से अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे भी इंसान हैं और उनसे भी गलतियां होती हैं। उन्होंने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष पर गहरा दुख व्यक्त किया। शीरन ने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना और वहां हो रही तबाही उनके लिए बेहद हृदयविदारक है।

मानवीय जीवन की हानि किसी भी राजनीतिक विमर्श से ऊपर है। मैं उन सभी लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं जो इस विनाशकारी संघर्ष में अपनों को खो चुके हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

शीरन के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। जहां एक वर्ग उनके मानवीय दृष्टिकोण की सराहना कर रहा है, वहीं कुछ लोग उनके तरीके और समय पर सवाल उठा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • एड शीरन ने संघर्ष के दौरान हो रही मानवीय क्षति पर दुख जताया।
  • गायक ने स्वीकार किया कि उनसे अतीत में गलतियां हुई हैं।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर उन्होंने अपना पक्ष रखा।
  • फैंस के बीच इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

यह घटना दर्शाती है कि कैसे वैश्विक स्तर पर कलाकार अपने मंच का उपयोग संवेदनशील मुद्दों को उठाने के लिए कर रहे हैं, हालांकि इसके परिणाम हमेशा विवादों को जन्म देते हैं।