पशु आश्रय स्थल बनाने में खर्च होंगे 7,000 करोड़, NHAI ने सुप्रीम कोर्ट से जताई असमर्थता

पशु आश्रय स्थल बनाने में खर्च होंगे 7,000 करोड़, NHAI ने सुप्रीम कोर्ट से जताई असमर्थता

Sudarshantoday ब्यूरो: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया है कि राजमार्गों के किनारे पशु आश्रय स्थल (Animal Shelters) का निर्माण करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है। प्राधिकरण ने अदालत को सूचित किया कि इस परियोजना पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आएगा, जो वर्तमान बजट और कार्यक्षेत्र के दायरे से बाहर है।

NHAI का तर्क: बजट और कार्यक्षेत्र की सीमाएं

सुप्रीम कोर्ट में दायर रिपोर्ट में NHAI ने कहा है कि राजमार्गों के किनारे पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाना न केवल खर्चीला है, बल्कि इसके रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी एक बड़ी चुनौती है। प्राधिकरण ने तर्क दिया कि उसका प्राथमिक कार्य सड़कों का निर्माण और रखरखाव करना है, न कि पशु कल्याण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना।

NHAI ने अपने जवाब में कहा, ‘राजमार्गों के किनारे पशु आश्रय स्थलों का निर्माण करने के लिए अनुमानित लागत 7,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी। इसके अलावा, इन आश्रयों के संचालन और सुरक्षा के लिए निरंतर धन की आवश्यकता होगी, जो NHAI के वित्तीय ढांचे के अनुकूल नहीं है।’

मामले की पृष्ठभूमि और अदालती रुख

यह मामला राजमार्गों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से शुरू हुआ था। अदालत ने पहले NHAI को सुझाव दिया था कि दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सड़कों के पास ऐसे आश्रय स्थल बनाए जाएं। हालांकि, NHAI के इस रुख के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शीर्ष अदालत इस पर क्या निर्देश देती है।

मुख्य बिंदु:

  • NHAI के अनुसार परियोजना की लागत 7,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • प्राधिकरण ने इसे अपने मुख्य कार्यक्षेत्र से बाहर बताया है।
  • राजमार्गों पर आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक समाधानों पर विचार करने की आवश्यकता है।
  • अदालत अब इस मामले में राज्य सरकारों की भूमिका पर भी विचार कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल आश्रय स्थल बनाने में नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभागों के साथ बेहतर समन्वय में निहित है। अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है कि वह NHAI के इस जवाब को स्वीकार करती है या कोई नया निर्देश जारी करती है।

कनाडा में विमान दुर्घटना: ट्रेनिंग के दौरान दो भारतीय छात्रों की दर्दनाक मौत

कनाडा में विमान दुर्घटना: ट्रेनिंग के दौरान दो भारतीय छात्रों की दर्दनाक मौत

Sudarshantoday ब्यूरो: कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में एक दुखद विमान दुर्घटना में दो भारतीय छात्रों की जान चली गई है। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों छात्र अपनी उड़ान प्रशिक्षण (फ्लाइट ट्रेनिंग) के दौरान एक छोटे विमान में सवार थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद बचाव दल को मौके पर कोई भी जीवित नहीं मिला।

हादसे की विस्तृत जानकारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विमान चिलीवैक हवाई अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ। विमान में सवार दोनों छात्र भारतीय मूल के थे और वहां एक निजी उड़ान अकादमी से कमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण ले रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और परिवहन सुरक्षा बोर्ड (TSB) के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और जांच शुरू कर दी गई है।

जांच के आदेश

कनाडा के परिवहन सुरक्षा बोर्ड ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि वे इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रहे हैं। विमान के मलबे को सुरक्षित कर लिया गया है और तकनीकी खराबी या मानवीय भूल, हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी।

मुख्य बिंदु

  • दुर्घटना ब्रिटिश कोलंबिया के चिलीवैक इलाके में हुई।
  • दोनों मृतक भारतीय छात्र पायलट प्रशिक्षण ले रहे थे।
  • परिवहन सुरक्षा बोर्ड ने दुर्घटना की जांच के लिए टीम गठित की है।
  • भारतीय उच्चायोग ने शोक व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

इस घटना ने पूरे भारतीय समुदाय को स्तब्ध कर दिया है। परिजनों को सूचित कर दिया गया है और दूतावास के अधिकारी शवों को भारत भेजने की प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रहे हैं।

यूपी के बंटवारे पर ओपी राजभर का बड़ा दावा, बोले- पीएम मोदी से मिली है सकारात्मक प्रतिक्रिया

यूपी के बंटवारे पर ओपी राजभर का बड़ा दावा, बोले- पीएम मोदी से मिली है सकारात्मक प्रतिक्रिया

Sudarshantoday ब्यूरो: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राज्य के विभाजन का मुद्दा गरमा गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव रखा है। राजभर के इस बयान ने दशकों पुराने उस बहस को नई हवा दे दी है, जिसमें प्रशासनिक सुगमता के लिए बड़े राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जाती रही है।

छोटे राज्यों का तर्क और राजभर की दलील

ओम प्रकाश राजभर का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य का विकास एक समान रूप से करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने तर्क दिया कि जब राज्य छोटे होते हैं, तो वहां की सरकारें जनता तक बेहतर ढंग से पहुंच पाती हैं और विकास कार्यों में तेजी आती है। राजभर के अनुसार, उन्होंने इस विषय पर प्रधानमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा की है और उन्हें इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने मेरी बातों को गंभीरता से सुना है। छोटे राज्यों के गठन से न केवल शासन-प्रशासन चुस्त होगा, बल्कि पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा में लाने का अवसर भी मिलेगा।

क्या है यूपी विभाजन का इतिहास?

उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग कोई नई नहीं है। पूर्ववर्ती बसपा सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग राज्यों (पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश) में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराया था। हालांकि, केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

प्रमुख बिंदु:

  • प्रशासनिक दक्षता के लिए छोटे राज्यों की वकालत।
  • पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में विकास की धीमी गति का मुद्दा।
  • राजनीतिक गलियारों में इस दावे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।
  • केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह बयान आगामी चुनावों के मद्देनजर एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। राज्य के विभाजन का मुद्दा हमेशा से ही एक संवेदनशील विषय रहा है, जिस पर भविष्य में बड़ी बहस छिड़ सकती है।

राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी 25 सितंबर तक दाखिल करेगी पहली चार्जशीट

राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी 25 सितंबर तक दाखिल करेगी पहली चार्जशीट

Sudarshantoday ब्यूरो: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित धांधली और चोरी के मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने इस संवेदनशील मामले में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, एसआईटी 25 सितंबर या उससे पहले अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट पेश कर देगी।

जांच का दायरा और मुख्य बिंदु

राम मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले दान में हेरफेर की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। इस मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ की गई है और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला गया है। जांच टीम का मुख्य फोकस उन बैंक खातों और ट्रांजेक्शन पर है, जिनके जरिए दान की राशि का दुरुपयोग होने का संदेह है।

एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। 25 सितंबर तक पहली चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, जिसमें कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।

मामले के मुख्य पहलू

  • दान की राशि में हेरफेर के आरोपों की गहन जांच।
  • डिजिटल ट्रांजेक्शन और संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण।
  • एसआईटी द्वारा अब तक की गई पूछताछ और साक्ष्य संकलन।
  • आरोपियों की पहचान और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की दिशा।

आगे की राह

इस मामले ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। राम मंदिर के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है, ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता को लेकर प्रशासन बेहद सख्त है। एसआईटी की चार्जशीट के बाद मामले में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसने की संभावना है।

जापान में तूफान 'डुजुआन' का कहर, टीम इंडिया का अभ्यास सत्र रद्द

जापान में तूफान ‘डुजुआन’ का कहर, टीम इंडिया का अभ्यास सत्र रद्द

Sudarshantoday ब्यूरो: जापान में आने वाले भीषण चक्रवाती तूफान ‘डुजुआन’ ने भारतीय क्रिकेट टीम की तैयारियों को बड़ा झटका दिया है। पूर्वी जापान में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश की चेतावनी के बीच, श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली भारतीय टीम अपना निर्धारित अभ्यास सत्र पूरा नहीं कर सकी। यह मुकाबला भारत और जापान के बीच पुरुषों के क्रिकेट में एक ऐतिहासिक पहला द्विपक्षीय मैच होने वाला है, जिसे लेकर दोनों देशों में खासा उत्साह है।

तैयारियों पर मौसम की मार

तूफान के खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। भारतीय टीम प्रबंधन ने खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अभ्यास सत्र को रद्द करने का निर्णय लिया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि टीम अभी तक वहां की परिस्थितियों से पूरी तरह वाकिफ नहीं हो पाई है।

श्रेयस अय्यर ने कहा, ‘मौसम की स्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं है। हम अभी तक यहां की परिस्थितियों को ठीक से समझ नहीं पाए हैं, लेकिन हम चुनौती के लिए तैयार हैं।’

मैच का महत्व

यह टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक मैच के माध्यम से दोनों देश खेल कूटनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • तूफान ‘डुजुआन’ के कारण पूर्वी जापान में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट।
  • भारत और जापान के बीच यह पहला आधिकारिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच है।
  • राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष आयोजन।
  • टीम इंडिया के अभ्यास सत्र पर मौसम का सीधा असर।

फिलहाल, भारतीय टीम के खिलाड़ी होटल में ही रहकर अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। मैच के आयोजन को लेकर अंतिम फैसला मौसम विभाग की रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा।

पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ FIR दर्ज, गणेश विसर्जन के दौरान भड़काऊ भाषण का आरोप

पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा के खिलाफ FIR दर्ज, गणेश विसर्जन के दौरान भड़काऊ भाषण का आरोप

Sudarshantoday ब्यूरो: मैसूर के पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। कर्नाटक पुलिस ने उनके खिलाफ गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान कथित तौर पर ‘भड़काऊ भाषण’ देने के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह मामला मैसूर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयानों से जुड़ा है, जिसे लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने संज्ञान लिया है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रताप सिम्हा ने गणेश विसर्जन के दौरान एक जनसभा को संबोधित किया था। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। पुलिस का कहना है कि उनके भाषण से क्षेत्र में तनाव पैदा होने की आशंका थी, जिसके बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई

मैसूर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में भड़काऊ बयानबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना के बाद से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने पूर्व सांसद की गिरफ्तारी की मांग की है।

कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। किसी भी व्यक्ति को समाज में वैमनस्य फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। – स्थानीय पुलिस अधिकारी

मुख्य बिंदु

  • प्रताप सिम्हा पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप।
  • गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान दिया था विवादित बयान।
  • पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की।
  • मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई।

फिलहाल, इस मामले पर पूर्व सांसद की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उनके समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। पुलिस अब कार्यक्रम के वीडियो फुटेज की जांच कर रही है ताकि बयानों की सत्यता और संदर्भ को समझा जा सके।

UPI पर 0.4% चार्ज का विरोध: NCP (SP) ने इसे छोटे व्यापारियों पर हमला बताया

UPI पर 0.4% चार्ज का विरोध: NCP (SP) ने इसे छोटे व्यापारियों पर हमला बताया

Sudarshantoday ब्यूरो: यूपीआई (UPI) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी ने सरकार से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

एनसीपी (एसपी) के नेताओं का तर्क है कि डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकार कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, वहीं इस तरह के शुल्क छोटे दुकानदारों के लिए मुसीबत बन सकते हैं। पार्टी का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डालना अनुचित है।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय उस पर शुल्क लगाना विरोधाभासी है। यह कदम छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ने वाला है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

प्रमुख बिंदु:

  • यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव।
  • एनसीपी (एसपी) ने इसे ‘जनविरोधी’ और ‘व्यापारी विरोधी’ बताया।
  • डिजिटल भुगतान की गति धीमी होने की जताई आशंका।
  • सरकार से नीतिगत बदलाव पर पुनर्विचार की मांग।

डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुल्क लागू होता है, तो डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का रुझान कम हो सकता है। छोटे दुकानदार, जो पहले से ही कम मार्जिन पर काम करते हैं, वे इस अतिरिक्त शुल्क को वहन करने में असमर्थ होंगे। एनसीपी (एसपी) ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस पर अपना रुख नहीं बदला, तो वे इसे लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।

ऑस्कर की दौड़ में मराठी फिल्म 'गोंधल': अशोक पंडित ने सरकार से मांगी मदद

ऑस्कर की दौड़ में मराठी फिल्म ‘गोंधल’: अशोक पंडित ने सरकार से मांगी मदद

Sudarshantoday ब्यूरो: मराठी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, संतोष दावखर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘गोंधल’ को 99वें अकादमी पुरस्कारों (ऑस्कर) के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया है। अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में जगह बनाने वाली यह फिल्म अपनी जड़ों से जुड़ी कहानी के कारण वैश्विक मंच पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

वैश्विक मंच पर मराठी संस्कृति की गूंज

फिल्म के निर्देशक संतोष दावखर ने इस चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि ‘गोंधल’ एक ऐसी कहानी है जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं की गहराई को दर्शाती है। उन्हें उम्मीद है कि यह फिल्म न केवल भारतीय दर्शकों को बल्कि वैश्विक सिनेमा प्रेमियों को भी प्रभावित करने में सफल रहेगी।

ऑस्कर का सफर चुनौतीपूर्ण होता है। हमें अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करने के लिए एक मजबूत अभियान की आवश्यकता है, जिसमें सरकार का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। – संतोष दावखर, निर्देशक

IFTDA और FWICE की सरकार से अपील

फिल्म के चयन के बाद अब इसके प्रचार और ऑस्कर अभियान की तैयारी शुरू हो गई है। इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) के प्रमुख अशोक पंडित और FWICE ने महाराष्ट्र सरकार से इस फिल्म के लिए वित्तीय सहायता की मांग की है। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म की स्क्रीनिंग, प्रचार और टीम की यात्रा के लिए भारी खर्च आता है, जिसे अकेले उठाना निर्माताओं के लिए कठिन है।

अभियान के मुख्य बिंदु:

  • फिल्म ‘गोंधल’ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
  • प्रचार अभियान के लिए बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय स्क्रीनिंग और नेटवर्किंग की आवश्यकता है।
  • फिल्म जगत के संगठनों ने इसे ‘मराठी गौरव’ बताते हुए सरकारी मदद की अपील की है।

फिलहाल, फिल्म की टीम ऑस्कर की लॉबिंग और प्रचार रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस ऐतिहासिक अवसर को भुनाने के लिए फिल्म निर्माताओं को आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान करती है या नहीं।

भारत में जल्द कदम रखेगा Apple Pay: अक्टूबर में हो सकती है लॉन्चिंग

भारत में जल्द कदम रखेगा Apple Pay: अक्टूबर में हो सकती है लॉन्चिंग

Sudarshantoday ब्यूरो: टेक दिग्गज एप्पल भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजार में अपनी पैठ जमाने के लिए पूरी तरह तैयार है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपनी लोकप्रिय भुगतान सेवा ‘एप्पल पे’ (Apple Pay) को अगले महीने यानी अक्टूबर में भारत में लॉन्च कर सकती है। यह कदम भारत के फिनटेक इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

शुरुआती दौर में एक्सिस बैंक के साथ साझेदारी

सूत्रों के मुताबिक, एप्पल ने अपनी सेवा को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए एक्सिस बैंक के साथ प्राथमिक बातचीत पूरी कर ली है। शुरुआती चरण में, एप्पल पे का उपयोग एक्सिस बैंक के कार्ड धारकों के लिए उपलब्ध होगा। इसके बाद कंपनी धीरे-धीरे अन्य बड़े बैंकों जैसे एचडीएफसी (HDFC) और आईसीआईसीआई (ICICI) के साथ भी अपने नेटवर्क का विस्तार करेगी।

यूपीआई (UPI) एकीकरण की संभावना

एप्पल पे की सबसे बड़ी ताकत इसका वैश्विक नेटवर्क है, लेकिन भारतीय बाजार की नब्ज को समझते हुए कंपनी इसमें यूपीआई (UPI) को एकीकृत करने पर भी विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है, तो एप्पल पे सीधे तौर पर गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे दिग्गजों को कड़ी टक्कर देगा।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एप्पल का प्रवेश न केवल सुरक्षा के नए मानक स्थापित करेगा, बल्कि आईफोन उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान प्रक्रिया को और भी अधिक सहज और सुरक्षित बना देगा।

मुख्य बिंदु

  • अक्टूबर में भारत में एप्पल पे की संभावित लॉन्चिंग।
  • एक्सिस बैंक के साथ शुरुआती साझेदारी की पुष्टि।
  • एचडीएफसी और आईसीआईसीआई जैसे बैंकों के साथ बातचीत जारी।
  • भविष्य में यूपीआई (UPI) सपोर्ट मिलने की पूरी उम्मीद।

एप्पल का यह कदम भारत के डिजिटल इंडिया मिशन को और गति प्रदान करेगा। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि त्योहारी सीजन से पहले यह लॉन्च एप्पल के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

एशियाई खेलों के लिए तैयार मेराज अहमद खान: 20 साल पुराना ओलंपिक सपना और अटूट हौसला

एशियाई खेलों के लिए तैयार मेराज अहमद खान: 20 साल पुराना ओलंपिक सपना और अटूट हौसला

Sudarshantoday ब्यूरो: बुंदेलखंड के क्रिकेट मैदानों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज तक का सफर तय करने वाले मेराज अहमद खान एक बार फिर एशियाई खेलों के मंच पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार हैं। 50 वर्षीय यह दिग्गज निशानेबाज अपने चौथे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने जा रहे हैं, लेकिन उनके जहन में आज भी वही ओलंपिक पदक का सपना जिंदा है, जिसे उन्होंने दो दशक पहले देखा था।

एक लक्ष्य, एक जुनून

मेराज के लिए शूटिंग केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। रियो ओलंपिक की यादें हों, कोविड-19 का कठिन दौर या व्यक्तिगत जीवन में अपनों को खोने का गम, मेराज ने हर बाधा को एक ‘टारगेट’ की तरह देखा है। उनका मानना है कि जब तक लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक रुकने का कोई सवाल ही नहीं है।

मैं तब तक हार नहीं मानूंगा जब तक मैं जीत नहीं जाता। मेरा पूरा ध्यान अब केवल अगले टारगेट पर है, क्योंकि यही मेरी फिलॉसफी है।

सफलता की लंबी यात्रा

भारत के पहले ओलंपिक स्कीट शूटर और विश्व कप चैंपियन बनने तक का मेराज का सफर संघर्षों से भरा रहा है। काहिरा में मिली ऐतिहासिक जीत ने न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि भारतीय शूटिंग जगत में एक नई उम्मीद भी जगाई है।

मुख्य बिंदु:

  • मेराज अहमद खान का यह चौथा एशियाई खेल है।
  • वे भारत के पहले पुरुष स्कीट वर्ल्ड कप चैंपियन हैं।
  • 50 साल की उम्र में भी उनका फिटनेस और फोकस युवाओं के लिए प्रेरणा है।
  • ओलंपिक पदक का सपना पिछले 20 वर्षों से उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना हुआ है।

आगामी एशियाई खेलों में मेराज न केवल अपनी तकनीक का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि वे उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल पेश करेंगे जो उम्र को सफलता की बाधा मानते हैं। उनके लिए हर शॉट एक नई शुरुआत है और हर प्रतियोगिता खुद को साबित करने का एक और मौका।