गाजा फटने की कगार पर था: 7 अक्टूबर से पहले मिस्र के खुफिया प्रमुख ने इजरायल को दी थी बड़ी चेतावनी

गाजा फटने की कगार पर था: 7 अक्टूबर से पहले मिस्र के खुफिया प्रमुख ने इजरायल को दी थी बड़ी चेतावनी

Sudarshantoday ब्यूरो: इजरायल और हमास के बीच शुरू हुए भीषण संघर्ष को लेकर एक बहुत बड़ा और चौकाने वाला खुलासा सामने आया है। सात अक्टूबर के हमलों से कुछ ही हफ्ते पहले, मिस्र के शीर्ष खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल ने इजरायली नेतृत्व को गाजा पट्टी में सुलग रहे बारूद और संभावित बड़े खतरे को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी थी। इस चेतावनी में साफ तौर पर कहा गया था कि गाजा के हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं और कभी भी एक बड़ा सैन्य संघर्ष भड़क सकता है। इसके बावजूद इजरायली सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक नेतृत्व ने इन खुफिया इनपुट को नजरअंदाज कर दिया, जिसका खामियाजा बाद में एक बड़े नरसंहार और युद्ध के रूप में भुगतना पड़ा। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस खुलासे के बाद से भूचाल आ गया है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • मिस्र के खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल ने 26 सितंबर को इजरायल का दौरा कर हमास की संभावित आक्रामकता के बारे में आगाह किया था।
  • मिस्र ने तनाव को कम करने के लिए इजरायल से गाजा के लिए आर्थिक रियायतें देने और राहत बढ़ाने की अपील की थी।
  • इजरायली अधिकारियों ने इस चेतावनी पर कोई ठोस और त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई।
  • सात अक्टूबर के हमलों से पहले मिस्र सहित कई अन्य देशों ने भी इस तरह की गुप्त सूचनाएं साझा की थीं, जिन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिस्र के तत्कालीन खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल ने पिछले साल 26 सितंबर को इजरायल की यात्रा की थी। इस उच्चस्तरीय दौरे का मुख्य उद्देश्य गाजा पट्टी में लगातार बढ़ रहे तनाव को कम करना और दोनों पक्षों के बीच किसी भी बड़ी सैन्य झड़प को रोकना था। मिस्र के खुफिया प्रमुख ने इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के साथ बंद कमरे में हुई बैठकों में स्पष्ट शब्दों में कहा था कि गाजा के भीतर हमास और अन्य चरमपंथी गुटों की गतिविधियां इस स्तर पर पहुंच चुकी हैं कि पूरा क्षेत्र कभी भी विस्फोट की स्थिति में आ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि गाजा के लोगों की आर्थिक और मानवीय स्थिति बहुत दयनीय है, और यदि इजरायल ने समय रहते आर्थिक राहत, रोजगार के अवसर और व्यापारिक रियायतें नहीं दीं, तो स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

मिस्र हमेशा से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और उसके पास गाजा की जमीनी हकीकत की सबसे सटीक खुफिया जानकारी हुआ करती थी। अब्बास कामेल ने इजरायली प्रधानमंत्री और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को चेताया था कि हमास किसी बड़े और विनाशकारी अभियान की योजना बना रहा है। हालांकि, मिस्र की इस गंभीर चेतावनी को इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान ने उस समय ज्यादा तवज्जो नहीं दी। इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना था कि हमास फिलहाल किसी बड़े युद्ध के लिए तैयार नहीं है और वह केवल गाजा के भीतर अपनी आंतरिक स्थिति को मजबूत करने का दिखावा कर रहा है। इसी गलतफहमी और आत्ममुग्धता के चलते इजरायल ने न तो अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाई और न ही मिस्र द्वारा सुझाई गई आर्थिक रियायतों पर कोई विचार किया।

सात अक्टूबर के हमलों से कुछ दिन पहले तक कई अन्य मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों ने भी इजरायल को इसी तरह की चेतावनियां भेजी थीं। इन सभी रिपोर्ट्स में एक ही बात पर जोर दिया गया था कि गाजा पट्टी में हमास के लड़ाके बड़े पैमाने पर गुप्त अभ्यास कर रहे हैं और इजरायली बस्तियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही है। लेकिन दुर्भाग्यवश, इजरायल की राजनीतिक और सैन्य लीडरशिप ने इन तमाम चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। इस बड़ी नाकामी ने इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक को जन्म दिया, जिसने मध्य पूर्व की भू-राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

मिस्र के खुफिया प्रमुख ने इजरायल को साफ तौर पर बता दिया था कि गाजा के हालात बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं। चेतावनी के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाया जाना इजरायली सुरक्षा तंत्र की ऐतिहासिक विफलता को दर्शाता है।

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

मिस्र के खुफिया प्रमुख द्वारा दी गई इस चेतावनी का सार्वजनिक होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सात अक्टूबर का हमला टाला जा सकता था यदि समय रहते राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाती। इस खुलासे के बाद इजरायल के भीतर अपने ही नेतृत्व के खिलाफ जनता और विपक्षी दलों का गुस्सा और अधिक भड़क सकता है। भविष्य में इस प्रकार की खुफिया चूकों से बचने के लिए इजरायल को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ संवाद के तरीकों में भारी बदलाव करने की आवश्यकता होगी। यह घटना पूरी दुनिया के सुरक्षा तंत्रों के लिए एक बड़ा सबक है कि किसी भी चेतावनी को हल्के में लेना कितना भारी पड़ सकता है।

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