चुनाव आयोग विवाद: कांग्रेस ने की विशेष पुनरीक्षण रद्द करने और सीईसी के इस्तीफे की मांग

चुनाव आयोग विवाद: कांग्रेस ने की विशेष पुनरीक्षण रद्द करने और सीईसी के इस्तीफे की मांग

Sudarshantoday ग्राउंड रिपोर्ट: देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से रोकने और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी है। विपक्षी दल का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।

ग्राउंड से मुख्य जानकारी (Key Takeaways)

  • कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह से दोषपूर्ण करार दिया है।
  • फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
  • युवा और जेन-जेड मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में सूची से गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं।
  • चुनाव आयोग ने अपने बचाव में कहा है कि प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित है।
  • विपक्ष ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

घटनाक्रम का सिलसिलेवार ब्योरा (Chronological Event Breakdown)

विवाद की शुरुआत तब हुई जब चुनाव आयोग ने आगामी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि आयोग ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता के मानकों को दरकिनार कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि फॉर्म 6, जो नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किया जाता है, उसमें किए गए बदलावों के कारण प्रक्रिया जटिल हो गई है।

पिछले कुछ दिनों में, कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सॉफ्टवेयर में खामियों और डेटा प्रविष्टि में मानवीय त्रुटियों के कारण हजारों युवा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब विभिन्न राज्यों से जेन-जेड मतदाताओं ने सोशल मीडिया पर अपने नाम गायब होने की शिकायतें साझा कीं। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है ताकि विशिष्ट वर्गों को मतदान से रोका जा सके।

प्रशासनिक व स्थानीय प्रतिक्रिया (Official Action & Public Reaction)

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है जो पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर की जा रही है। आयोग का तर्क है कि डुप्लीकेट नामों को हटाने और मृत मतदाताओं के नाम सूची से निकालने के लिए यह कवायद बेहद जरूरी है।

चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, ‘हम सभी राजनीतिक दलों की चिंताओं का सम्मान करते हैं, लेकिन हमारी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। किसी भी पात्र मतदाता को प्रक्रिया से बाहर नहीं किया गया है। हम तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं और डेटा की शुद्धता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में प्रदर्शन किए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के बूथ स्तर पर बदलाव किए हैं, जिससे आम जनता भ्रमित है। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि उनके परिवार के उन सदस्यों के नाम भी हटा दिए गए हैं जो पिछले कई वर्षों से उसी पते पर रह रहे हैं।

आगे क्या? (What Lies Ahead)

वर्तमान स्थिति यह है कि कांग्रेस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का निर्णय लिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया और प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया, तो वे कानूनी रास्ता अपनाने के साथ-साथ जन आंदोलन भी करेंगे। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग को इस विवाद को सुलझाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी पड़ सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोग अपनी प्रक्रिया में कोई बदलाव करता है या फिर विवाद और गहराता जाएगा। लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता सर्वोपरि है, और इस विवाद का समाधान जल्द होना आवश्यक है ताकि आगामी चुनावों में मतदाताओं का विश्वास बना रहे।

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