Sudarshantoday ब्यूरो: भारत और जर्मनी के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जर्मनी ने भारत के साथ 8 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी पनडुब्बी परियोजना को लेकर अपनी पूर्ण तत्परता जाहिर की है। नई दिल्ली में तैनात जर्मन राजदूत ने स्पष्ट किया है कि बर्लिन इस रणनीतिक साझेदारी को लेकर बेहद गंभीर है और परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए तैयार है।
प्रोजेक्ट-75 इंडिया: रक्षा क्षेत्र में बड़ी छलांग
यह सौदा भारतीय नौसेना के ‘प्रोजेक्ट-75 इंडिया’ (P-75I) के तहत छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण से संबंधित है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय जलसीमा की सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है। जर्मन राजदूत के अनुसार, यह समझौता न केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी एक नई गति प्रदान करेगा।
जर्मनी भारत की रक्षा जरूरतों को समझता है। हम इस 8 अरब डॉलर की पनडुब्बी डील को लेकर पूरी तरह तैयार हैं और दोनों देशों के बीच तकनीकी हस्तांतरण और सहयोग पर चर्चा अंतिम चरण में है।
इस डील के मुख्य बिंदु
- कुल लागत: लगभग 8 अरब डॉलर (करीब 66,000 करोड़ रुपये)।
- लक्ष्य: भारतीय नौसेना के लिए छह आधुनिक पनडुब्बियों का निर्माण।
- तकनीकी सहयोग: जर्मनी की ओर से उन्नत ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) तकनीक मिलने की उम्मीद है।
- रणनीतिक महत्व: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच यह भारत की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगा।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह डील जर्मनी के साथ फाइनल होती है, तो भारत को न केवल विश्व स्तरीय तकनीक मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। जर्मन कंपनियों और भारतीय शिपयार्ड के बीच साझेदारी से रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हासिल करना और आसान हो जाएगा। फिलहाल, दोनों देशों के रक्षा मंत्रालय इस समझौते की बारीकियों पर काम कर रहे हैं ताकि इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।














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