Sudarshantoday ब्यूरो: बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में प्रतिभा से कहीं ज्यादा अक्सर बाहरी दिखावे और शारीरिक बनावट को प्राथमिकता दी जाती है। हाल ही में अभिनेता अरशद वारसी और प्रतीक गांधी ने एक चर्चा के दौरान इस कड़वे सच पर खुलकर बात की कि कैसे इंडस्ट्री में कलाकारों को एक खास ‘लुक’ में फिट होने के लिए मजबूर किया जाता है।
खुद को यथार्थवादी रखना जरूरी: अरशद वारसी
अरशद वारसी ने अपने बेबाक अंदाज में कहा कि अभिनेताओं को अपनी शारीरिक बनावट को लेकर यथार्थवादी होना चाहिए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, ‘अगर मैं कल कहूं कि मैं ऋतिक रोशन जैसा दिखता हूं, तो मैं मूर्ख हूं। आपको यह समझना होगा कि आपकी अपनी एक पहचान है और आप क्या कर सकते हैं।’ वारसी का मानना है कि हर अभिनेता को अपनी ताकत और सीमाओं को पहचानना चाहिए, न कि किसी और की तरह दिखने की अंधी दौड़ में शामिल होना चाहिए।
‘रिच लुक’ की अजीब मांग
वहीं, ‘स्कैम 1992’ से घर-घर में मशहूर हुए प्रतीक गांधी ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें ऑडिशन के दौरान अजीबोगरीब सलाह दी जाती थी। प्रतीक ने कहा, ‘मुझे अक्सर कहा जाता था कि मुझे थोड़ा ‘रिच लुक’ (अमीर दिखने वाला) अपनाना चाहिए ताकि मैं टीवी के किरदारों के लिए फिट बैठ सकूं। यह समझना मुश्किल था कि आखिर एक अभिनेता के लिए अमीर या गरीब दिखने का पैमाना क्या है।’
इंडस्ट्री में स्टीरियोटाइप का बोलबाला
प्रतीक गांधी और अरशद वारसी दोनों का मानना है कि इंडस्ट्री में कलाकारों को सांचों में ढालने की कोशिश की जाती है, जो उनकी रचनात्मकता को सीमित करती है।
प्रमुख बिंदु:
- अभिनेताओं पर हमेशा एक खास तरह का दिखने का दबाव रहता है।
- अरशद वारसी ने खुद को पहचानने और यथार्थवादी होने पर जोर दिया।
- प्रतीक गांधी ने बताया कि कैसे शुरुआती करियर में उन्हें ‘रिच लुक’ के लिए टोका जाता था।
- इंडस्ट्री में स्टीरियोटाइप को तोड़ने की जरूरत है ताकि प्रतिभा को मौका मिल सके।
यह चर्चा इस बात की ओर इशारा करती है कि बॉलीवुड अब धीरे-धीरे बदल रहा है, जहां केवल लुक्स ही नहीं, बल्कि अभिनय क्षमता को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।














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