बुद्ध मोक्षदाता नहीं, मार्गदाता हैं : पूज्य भंते शुभमचित्त

बुद्ध मोक्षदाता नहीं, मार्गदाता हैं : पूज्य भंते शुभमचित्त

समता बुद्ध विहार में वर्षावास के सातवें रविवार पर हुई धम्मदेशना, बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएं हुए शामिल

दैनिक सुदर्शन टुडे | ब्यूरो चीफ दिव्य कुमार सिंघल | छिंदवाड़ा

छिंदवाड़ा। स्थानीय समता बुद्ध विहार में वर्षावास कार्यक्रम के सातवें रविवार को पूज्य भंते शुभमचित्त जी ने धम्मदेशना देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध मोक्षदाता नहीं, बल्कि मार्गदाता हैं। वे देवताओं और मनुष्यों के मार्गदर्शक हैं। बुद्ध का धम्म पारलौकिक आडंबर के बजाय मानवीय जीवन की वास्तविक समस्या दुःख को समझने और उसके निरोध का मार्ग बताता है।

भंते शुभमचित्त जी ने कहा कि “जीवन की पवित्रता बनाए रखना ही धम्म है।” जीवन की पवित्रता शारीरिक, वाचिक और मानसिक—तीन प्रकार की होती है। शरीर, वचन और मन के दोषों से विरत रहना ही वास्तविक धम्म आचरण है। उन्होंने बताया कि जीवहिंसा, अदत्तादान अर्थात चोरी तथा व्यभिचार शरीर के दोष हैं। असत्य भाषण, कठोर वचन, निंदा-चुगली और व्यर्थ प्रलाप वाणी के दोष हैं। वहीं लोभ, द्वेष और मोह अर्थात अज्ञान मन के दोष माने गए हैं।

अकुशल कर्मों से बचना और चित्त को परिशुद्ध करना ही बुद्ध की शिक्षा

भंते जी ने बुद्ध के उपदेश—
“सब्बपापस्स अकरणं, कुसलस्स उपसम्पदा।
सचित्तपरियोदपनं, एतं बुद्धानुसासनं।”

का अर्थ बताते हुए कहा कि सभी प्रकार के अकुशल कर्मों से बचना, कुशल कर्मों को करना और अपने चित्त को परिशुद्ध करना ही बुद्ध की शिक्षा है।

उन्होंने धम्मदेशना के दौरान दस पुण्य-किरिया वत्थु की भी विस्तार से व्याख्या की। इनमें दान, शील, भावना, अपचायन, वेय्यावच्च, पत्तीदान, पत्तानुमोदना, धम्मस्सवन, धम्मदेसना और दिट्ठुजुकम्म शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन कुशल कर्मों से कुशल चित्त उत्पन्न होता है तथा व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, उन्नति और मुक्ति की दिशा प्रशस्त होती है।

बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाओं की सहभागिता

कार्यक्रम में डॉ. आंबेडकर समता विकास समिति, छिंदवाड़ा के अध्यक्ष संदीप बोरकर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मीना ठवरे, महासचिव कमलेश कुमार चौरासे, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रमोद वासनिक सहित एस.बी. सोनटक्के, भीमराव सोमकुंवर, पी.एन. सोमकुंवर, नामदेव सोमकुंवर, बी.डी. सोमकुंवर, अशोक सोमकुंवर, महेंद्र सोमकुंवर, अरुण सोमकुंवर, डॉ. सुनील सोमकुंवर, डॉ. नरेंद्र सोमकुंवर, सुनील सोमकुंवर, आनंद सोमकुंवर, शीलकांत बंसोड़, प्रहलाद मालवीय, देवेंद्र खांडेकर, बाबूलाल चौहान, प्रशांत गजभिए एवं दीपक बागड़े सहित बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूज्य भंते शुभमचित्त जी की धम्मदेशना का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया तथा बुद्ध, धम्म और संघ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए बुद्ध के बताए धम्ममार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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