Sudarshantoday ब्यूरो: गुरुग्राम के सोहना में करीब एक दशक पुराने स्ट्रीटलाइट घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 4.87 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 नगर निगम अधिकारियों और 3 ठेकेदारों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सोहना में स्ट्रीटलाइट लगाने के लिए आवंटित इस परियोजना में टेंडर दरों में हेरफेर की गई थी। आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया गया, बल्कि मानकों के विपरीत घटिया गुणवत्ता की लाइटें लगाई गईं। जांच में यह भी पाया गया कि जिन लाइटों को लगाने की मंजूरी दी गई थी, उनके स्थान पर बाजार में उपलब्ध सस्ती और अलग विनिर्देश वाली लाइटें लगा दी गईं और भुगतान पूरी कीमत पर लिया गया।
जांच में सामने आई धांधली
विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि भुगतान प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गईं। बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और बिना भौतिक सत्यापन के ही ठेकेदारों को भुगतान जारी कर दिए गए। इस मामले में मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- परियोजना की कुल लागत 4.87 करोड़ रुपये थी।
- अनुमोदित लाइटों के स्थान पर घटिया गुणवत्ता के उपकरण लगाए गए।
- टेंडर की शर्तों को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया।
- दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी धन का गबन किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है। प्रारंभिक जांच में मिली साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अब उन सभी फाइलों और भुगतान रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है जो उस समय के दौरान तैयार किए गए थे। इस मामले में शामिल अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि इस घोटाले में शामिल सभी लोगों की संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए ताकि जनता के पैसे की रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।

















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