स्थानांतरण हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी उत्तर वनमंडल सारनी के रेंजर के रिलीफ नहीं किए जाने से उठे सवाल..?

स्थानांतरण हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी उत्तर वनमंडल सारनी के रेंजर के रिलीफ नहीं किए जाने से उठे सवाल..?

आरटीआई मामला और कोर्ट की समय-सीमा खत्म, फिर भी उप वनमंडलाधिकारी क्यों नहीं कर रहें रेंजर नायक को रिलीफ

जिला ब्यूरो चीफ कुलदीप साहु
सारनी(सुदर्शन टूडे)। मध्यप्रदेश शासन वन विभाग द्वारा प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए बनाए गए नियमों को स्थानीय स्तर पर धरा बताया जा रहा हैं। सरकार की स्पष्ट नीति है कि 3 से 5 वर्ष की अवधि पूरी होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाए। परंतु उत्तर बैतूल वनमंडल के सारनी परिक्षेत्र में शासन के इन आदेशों का पालन होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, 16 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में सारनी परिक्षेत्र के रेंजर शरदेन्दु नायक का स्थानांतरण अमरवाड़ा पूर्व छिंदवाड़ा किया गया था। परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें वर्तमान पद से कार्यमुक्त रिलीफ नहीं किया गया हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्थानांतरण प्रक्रिया को टालने या उलझाने के लिए आरटीआई और अदालती प्रक्रिया की बातें सामने लाई गईं। नियमानुसार स्थानांतरण पत्र जारी होने के बाद लगभग दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को रिलीफ करना अनिवार्य होता है। वहीं यदि मामला कोर्ट या अन्य वैधानिक प्रक्रिया में जाता है, तो भी 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा तय रहती है। सूत्रों का कहना हैं कि जब लगभग दिन की प्राथमिक अवधि और कोर्ट से जुड़ा 30 दिन का समय भी पूरी तरह बीत चुका है, तो फिर रेंजर शरदेन्दु नायक को रिलीव करने में इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही हैं..???

जब सरकार की नीति 3 से 5 साल में तबादले की, तो सारनी में नियम-कायदों को ताक पर क्यों रखा जा रहा

कार्यालय में वर्षों से जमे हैं निचले अधिकारी पर आखिर किस आका का हाथ हैं…?? सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी मिली हैं कि केवल रेंजर ही नहीं, बल्कि सारनी वन परिक्षेत्र कार्यालय में रेंजर से निचले स्तर के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी पिछले कई सालों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। शासन की नीति के अनुसार लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना आवश्यक हैं ताकि पारदर्शी व्यवस्था बनीं रहें। परंतु सारनी कार्यालय में वर्षों से कुर्सियों पर काबिज इन निचले अधिकारियों पर भी प्रशासनिक मेहरबानी बनी हुई है। जनता का सवाल हैं कि आखिर इन कर्मचारियों और अधिकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते इनका स्थानांतरण या फेरबदल नहीं हो पा रहा है…?

उप वनमंडलाधिकारी और वनमंडलाधिकारी की चुप्पी पर उठे सवाल

विभागीय सूत्रों के अनुसार, स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद उप वनमंडलाधिकारी एसडीओ और वनमंडलाधिकारी डीएफओ स्तर से रिलीफ ऑर्डर जारी न होना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है..??

  1. किसकी मेहरबानी: स्थानांतरण सूची में नाम आने और सभी कानूनी व प्रशासनिक समय-सीमाएं समाप्त होने के बाद भी रेंजर नायक को किसके कहने पर रोका गया हैं..???
  1. अधिकारियों का रुख: उप वनमंडलाधिकारी एसडीओ और वनमंडलाधिकारी डीएफओ आखिर किसके दबाव में या किस मंशा से कार्यमुक्ति की फाइल को दबाकर बैठे हैं…???
  1. पारदर्शिता पर उठते सवाल: जब शासन की स्पष्ट नीति 3 से 5 साल में तबादले की है, तो सारनी में वरिष्ठ से लेकर निचले अधिकारियों तक को एक ही जगह जमाए रखने का क्या रहस्य है…???

इनका कहना हैं

मैं आधिकारिक रूप से अधिकृत नहीं हूँ।

शरदेन्दु नायक रेंजर सारनी जिला बैतूल

मामला प्रक्रिया में है। रिलीफ करने की विभागीय प्रक्रिया चल रहीं हैं और हम इन्हें जल्द ही रिलीव कर रहे हैं।

देवांशु शेखर उत्तर वनमंडलाधिकारी (डीएफओ), जिला बैतूल

नोट:- इस संबंध में उप वनमंडलाधिकारी (एसडीओ) का पक्ष जानने के लिए उन्हें दूरभाष पर कॉल किया गया, परंतु उन्होंने मीडिया का फोन नहीं उठाया।

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