कम खर्च, ज्यादा माइलेज और कच्चे रास्तों पर बेहतर प्रदर्शन से ग्रामीण इलाकों की पहली पसंद बनीं 100cc–125cc मोटरसाइकिलें
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के मासिक बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है। ऐसे में अब लोग ऐसी मोटरसाइकिलों की तलाश कर रहे हैं जो कम ईंधन में ज्यादा दूरी तय करें और गांव की ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर भी बेहतर प्रदर्शन दें। ग्रामीण जरूरतों को देखते हुए 100cc से 125cc सेगमेंट की बाइक्स सबसे उपयोगी विकल्प मानी जा रही हैं।
इन बाइक्स में बेहतर माइलेज के साथ मजबूत सस्पेंशन, अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस और आसान मेंटेनेंस जैसी खूबियां मिलती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे और गड्ढों वाले रास्तों के लिए स्पोक व्हील वाली बाइक्स अभी भी अधिक टिकाऊ मानी जाती हैं। वहीं नई बाइक खरीदते समय E20 फ्यूल कम्पैटिबिलिटी जरूर जांचना चाहिए, क्योंकि अब अधिकांश पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध है।
गांव की सड़कों के लिए टॉप माइलेज बाइक्स
| मॉडल | अनुमानित कीमत | माइलेज |
|---|---|---|
| हीरो स्प्लेंडर प्लस | ₹76 हजार के आसपास | 68–70 kmpl |
| बजाज प्लेटिना 100 | ₹71 हजार के आसपास | 70–72 kmpl |
| टीवीएस स्पोर्ट | ₹69 हजार के आसपास | लगभग 70 kmpl |
| होंडा शाइन 100 | ₹66 हजार के आसपास | 65–67 kmpl |
| हीरो HF डीलक्स | ₹70 हजार के आसपास | 65–70 kmpl |
Splendor और HF डीलक्स जैसी बाइक्स ग्रामीण इलाकों में मजबूत सर्विस नेटवर्क के कारण काफी लोकप्रिय हैं। हाल के बिक्री आंकड़ों में भी स्प्लेंडर और HF डीलक्स की मजबूत मांग देखने को मिली है।
बजाज प्लेटिना अपने आरामदायक सस्पेंशन के कारण कच्चे रास्तों पर बेहतर अनुभव देती है, जबकि टीवीएस स्पोर्ट माइलेज के मामले में मजबूत दावेदार मानी जाती है। दूसरी ओर होंडा शाइन 100 कम बजट वाले खरीदारों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरी है। कम्यूटर बाइक्स की कीमतें 80 हजार रुपये से नीचे होने के कारण इनकी मांग लगातार बनी हुई है।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
- हाई ग्राउंड क्लीयरेंस वाली बाइक चुनें
- स्पोक व्हील ग्रामीण रास्तों के लिए बेहतर रहते हैं
- E20 फ्यूल सपोर्ट जरूर जांचें
- किक-स्टार्ट विकल्प उपयोगी साबित हो सकता है
- स्थानीय स्तर पर आसानी से मिलने वाले स्पेयर पार्ट्स को प्राथमिकता दें
इन बाइक्स की EMI आमतौर पर करीब दो हजार रुपये प्रतिमाह से शुरू हो जाती है और सबसे बड़ी बात यह है कि गांवों के स्थानीय मैकेनिक भी बिना विशेष उपकरणों के इनकी मरम्मत आसानी से कर लेते हैं।












