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बैतूल

उपयंत्री सरेठा पर रिश्वत लेने का खुला आरोप पर जांच में बचाने का पूरा जुगाड़

उपयंत्री सरेठा पर रिश्वत लेने का खुला आरोप पर जांच में बचाने का पूरा जुगाड़

शिकायतकर्ता सिविल इंजीनियर पर बनाया जा रहा है अलग अलग तरीके से दबाव

बैतूल/मनीष राठौर

बैतूल नगरपालिका में खुली रिश्वतखोरी का मामला सामने आया। शिकायत हुई जांच के आदेश हुए लेकिन जांच का कोई रिजल्ट सामने नहीं आया। जबकि नगरपालिका में प्रशासक स्वंय कलेक्टर है। हालात यह है कि शिकायतकर्ता पर अलग अलग तरीके से आरोपी अधिकारी अपना दबाव बना रहा है ताकि वह शिकायत वापस ले ले। मामला इंजीनियर शरद ठाकुर और नगरपालिका के इंजीनियर संजय सरेठा का है। शरद ठाकुर ने कलेक्टर को शिकायत में नपा के उपयंत्री संजय सरेठा सहित अन्य पर भवन निर्माण की अनुमति को लटका कर रखने और रुपए मांगने के मामले में शिकायत की है। कलेक्टर बैंस को की गई शिकायत में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं उन्हें कलेक्टर ने तलब भी किया था। शिकायतकर्ता सिविल इंजीनियर का कहना है कि संयोगवश जहां उपयंत्री ने रिश्वत लो , यहां सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था । सिविल इंजीनियर की माने तो नगरपालिका के एई और एक लिपिक ने भी विकास शुल्क की फीस के 16 के बजाए 20 हजार रूपए मांगे है । रूपए न देने पर सीधे फाईल रोक दी जा रही है । इधर सीएमओ ने इस मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधितों को नोटिस जारी करने और जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी पर उस जांच में क्या हुआ आज तक सामने नहीं आया। नगरपालिका की लोकनिर्माण शाखा नए भवन के स्टेट बैंक के बाजू में लगती है , यहां पर एई , ईई समेत सारे उपयंत्री और स्टाफ के लोग बैठते हैं । सीएमओ कक्ष से दूरी होने का फायदा लोक निर्माण विभाग के तथाकथित अधिकारी और कर्मचारी उठा रहे हैं । सिविल इंजीनियर शरद ठाकुर द्वारा निर्माण कार्य कराए जाते हैं , उन्होंने 4 जनवरी को एक आवेदन नगरपालिका के लोक निर्माण शाखा को दिया था । इस आवेदन में उन्होंने भवन निर्माण की अनुमति मांगी थी । नियमानुसार 30 दिनों के भीतर इसे स्वीकृत किया जाना था , लेकिन 7 अप्रैल तक नक्शा स्वीकृत नहीं किया गया था । उनका आरोप है कि बेवजह कानूनन नियम बताकर नक्शा रोक लिया गया । फाईल में पहले ही स्ट्रेक्चर डिजाईन की मांग की गई । दो सप्ताह पश्चात् पीएनसी की अनुमति मांगी गई । शिकायतकर्ता की माने तो उन्हें पूछताछ पर एई नीरज धुर्वे द्वारा अनावश्यक रूप से टीएनसीपी अनिवार्य करने की जानकारी दी गई । उनके अधीनस्थ एक लिपिक द्वारा फाईल आगे बढ़ाने के लिए खुलेआम रूपए मांगे गए । सिविल इंजीनियर श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया गया और रूपए की भी मांग की गई और प्रकरण को आगे नहीं बढऩे दिया गया । उपयंत्री ने थाने में ही ले ली रिश्वत श्री ठाकुर ने बताया कि भवन निर्माण के लिए आनलाईन आवेदन तीन माह बाद भी उनके प्रकरण पर कोई कार्रवाई नहीं की गई । पैसे न देने पर प्रकरण रोक दिया गया । कार्यालय में अधिकारियों से चर्चा करने पर ठीक से बात तक नहीं की जा रही थी । मोबाईल नम्बर भी ब्लाक कर दिया गया । इसके बाद करीब 4 दिन पहले उपयंत्री संजय सरेठा से इस बारे में आग्रह किया तो उन्होंने 4 हजार रूपए की डिमांड की श्री ठाकुर ने बताया कि उपयंत्री सरेठा कालोनाईजर पर एफआईआर करने को लेकर गंज थाने गए हुए थे । उन्होंने थाने ही बुला लिया और नगद 4 हजार रूपए दिए गए । उन्होंने बताया कि यदि गंज थाने के सीसीटीवी फुटेज देख लिए जाए तो उपयंत्री द्वारा रिश्वत लेने के आरोप सही साबित हो जाएंगे । इसके अलावा उन्होंने श्री सरेठा के मोबाईल 9425684644 पर 1 हजार और 3 हजार के फोन पे पर भुगतान की भी जानकारी दी है ।

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